मध्य भारत में बांबे हॉस्पिटल लाया आधुनिक जीवनरक्षक ईसीएमओ: बांबे हॉस्पिटल, न सिर्फ इंदौर; सेंट्रल इंडिया में भरोसे का एकमात्र नाम
KHULASA FIRST
संवाददाता

हार्ट-लंग्स के इलाज के लिए आई नई तकनीक
चिकित्सा जगत में आई नई तकनीकों पर बांबे हॉस्पिटल में वृहद् कार्यशाला
कार्यशाला में जुटे प्रदेशभर के डॉक्टर्स, एनेस्थेसिया एक्सपर्ट
इलाज की प्रक्रिया आसान
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अस्पताल प्रबंधन सदैव नई तकनीकों व शोध-अनुसंधान से जुड़ा भी रहता है। मरीज को बेहतर इलाज व आधुनिक तकनीक से इलाज की प्रक्रिया को आसान करने के प्रयास निरंतर चलते रहते हैं। इसी कड़ी में बांबे हॉस्पिटल में ईसीएमओ यानी एक्स्ट्रा कॉर्पोरियल मेंब्रेन ऑक्सीजनशन विषय पर कार्यशाला का आयोजन हुआ। ईसीएमओ चिकित्सा जगत की एक नई तकनीक है, जो हृदय रोग से जुड़ी गंभीर समस्याओं, हार्ट व फेफड़ों के इलाज- ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में एक अहम भूमिका निभाएगी।
बांबे हॉस्पिटल में ईसीएमओ (एक्स्ट्रा कॉर्पोरियल मेंब्रेन ऑक्सीजनशन) विषय पर विशेष शैक्षणिक कार्यशाला आयोजित की गई। मध्य भारत में अपनी तरह की पहली मानी जाने वाली इस कार्यशाला में इंदौर सहित प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों से आए डॉक्टरों, एनेस्थेसिस्ट, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों तथा परफ्यूजनिस्ट ने गंभीर बीमार मरीजों के इलाज में उपयोग होने वाली आधुनिक जीवनरक्षक तकनीक ईसीएमओ के बारे में जाना। यह एक उन्नत तकनीक है, जिसमें मशीन की सहायता से मरीज के शरीर के बाहर रक्त को ऑक्सीजन प्रदान कर पुनः शरीर में पहुंचाया जाता है, जिससे हृदय और फेफड़ों को अस्थायी सहारा मिलता है।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों ने ईसीएमओ की उपयोगिता, इसके संकेत, संभावित जटिलताओं तथा गंभीर मरीजों के प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी। साथ ही प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी दिया गया, जिसमें सिमुलेटर और आधुनिक उपकरणों की सहायता से अभ्यास कराया गया।
कंसल्टेंट कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. नीरज गुप्ता द्वारा आयोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता सीनियर कर्डियोलॉजिस्ट डॉ. इदरीस खान ने की तथा संचालन सीनियर इंटेंसिविस्ट डॉ. प्रीतिमा चानना ने किया। कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. सुनील दुबे तथा कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अभिमन्यु निगम की अहम भूमिका रही। डिप्टी डायरेक्टर मेडिकल सर्विसेज डॉ. दिलीपसिंह चौहान ने आभार व्यक्त किया।
बांबे हॉस्पिटल, यानी भरोसे का एक नाम। मरीज व अस्पताल के बीच का एक अनूठा विश्वास व भरोसे से भरा नाता। चिकित्सा के पेशे में आई तमाम व्यावसायिक विकृतियां आज भी अस्पताल को स्पर्श नहीं कर पाई हैं। यही कारण है कि सेंट्रल इंडिया में आज भी बांबे हॉस्पिटल ही चिकित्सा जगत में एक विश्वसनीय नाम है।
इनका कहना
आधुनिक तकनीक ईसीएमओ को लेकर बांबे हॉस्पिटल से जुड़े डॉक्टरों का मत... बांबे हॉस्पिटल ने हमेशा मरीजों की देखभाल में उन्नत और नवीन प्रक्रियाओं को लाने में अग्रणी भूमिका निभाई है। यह कार्यशाला उसी दिशा में एक कदम है। - डॉ. दिलीपसिंह चौहान, डायरेक्टर
भविष्य के डॉक्टरों को नवीनतम ज्ञान और कौशल से अवगत कराना जरूरी है, ताकि वे जटिल चिकित्सा चुनौतियों का सामना कर सकें। ईसीएमओ एक जीवनरक्षक तकनीक है। - डॉ. इदरीस खान
ईसीएमओ को वह पहचान मिले, जिसकी यह हकदार है और अधिकाधिक अस्पतालों में यह शुरू हो, जिससे गंभीर, लेकिन उपचार योग्य मरीजों की जान बचाई जा सके। - डॉ. नीरज गुप्ता
गंभीर हार्ट/लंग फैल्युअर से पीड़ित मरीजों के इलाज अथवा इनके ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे मरीजों की जान बचाने में ईसीएमओ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। - डॉ. सुनील दुबे
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