टीम आशीष सिंह को आशीष: प्रियंक मिश्रा नहीं पा सके इंदौर; भारी पड़े शिवम वर्मा
KHULASA FIRST
संवाददाता

इंदौर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी के कलेक्टर दंपति रहे सुरक्षित
डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कलेक्टरों की तबादला सूची ऐसे समय आई, जब प्रदेश सरकार गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर हैरान परेशान है और न चाहते हुए भी कल से गेहूं की खरीदी शुरू करना पड़ी। किसान आंदोलन के बाद जागी सरकार के आदेश पर अपने वातानुकूलित चैंबर से निकलकर कलेक्टर जब मंडियों की दौड़ लगाने को मजबूर हुए, इसी बीच लंबे समय से बनती-बिगड़ती तबादला सूची जारी कर दी गई। इंदौर के भागीरथपुरा में जहरीले जल कांड के बावजूद शिवम वर्मा पाक-साफ बने रहे।
इसी तरह इंदौर कलेक्टर से उज्जैन संभाग आयुक्त के पद पर पहुंचे आशीष सिंह की टीम के प्रमुख इंदौर कलेक्टर के साथ नर्मदा पट्टी के प्रमुख कलेक्टर अपनी कलेक्ट्री में सुरक्षित बने हुए हैं।
इनमें खरगोन, खंडवा, बड़वानी के कलेक्टर शामिल हैं। खरगोन की कलेक्टर भव्या मित्तल और खंडवा के ऋषभ गुप्ता दंपति टीम आशीष के विश्वसनीय हैं।
इसी तरह वर्मा दंपति शिवम वर्मा और बड़वानी कलेक्टर ज्योति सिंह भी अपने जिले में जमे हुए हैं। धार के कलेक्टर प्रियंक मिश्रा बहुत पहले से इंदौर कलेक्ट्री के लिए प्रयासरत थे, लेकिन उस समय बाजी शिवम वर्मा के हाथ लगी।
इस बार भी वर्मा भारी पड़े और मिश्रा को भोपाल जाना पड़ा। ऐसा भी नहीं कि मुख्य सचिव अनुराग जैन की रेटिंग लिस्ट में महत्वपूर्ण माने जाने वाले यह आईएएस बहुत बढ़िया परफॉर्म कर रहे हैं, फिर भी इनका बने रहना मायने रखता है।
खरगोन में जब से भव्या मित्तल कलेक्टर बनी हैं, तब से लगातार किसानों के आंदोलन हो रहे हैं। इसमें कोई दो मत नहीं कि मित्तल ईमानदार और कर्त्तव्यपरायण हैं, लेकिन प्रशासन पर हावी बाबूराज से बात बन नहीं रही। इस पर भूमि अधिग्रहण के मामले में भी प्रशासन की असंवेदनशीलता बनी हुई है।
कलेक्टर चाहे धार के हों या खरगोन, खंडवा, बड़वानी अथवा अन्य जिले के, हुकूमत का स्वरूप लाट् साहब वाला जैसा है। ईमानदार कलेक्टर होते हुए भी भ्रष्ट बाबूराज प्रशासन पर हावी है।
खरगोन जिला इसका उदाहरण है। तबादला सूची में बहुत सारे प्रमोटी आईएएस कलेक्ट्री की बाट जोहते रह गए। इनमें मुख्य रूप से आशीष सिंह के करीबी और उज्जैन के नगर निगम अपर आयुक्त संतोष टैगोर को जिला नहीं मिलना भी चौंकाता है। टैगोर सहज-सरल और व्यावहारिक होने के साथ समस्याओं के समाधान के लिए जाने जाते हैं। जो भी हो, सिंहस्थ और गेहूं खरीदी के बहाने कई कलेक्टर बचे हुए हैं।
प्रदेश में गुरुवार देर रात वल्लभ भवन से जो आदेश निकला, उसने प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में एक साथ खुशी और बेचैनी दोनों पैदा कर दीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 26 आईएएस अधिकारियों के तबादला आदेश जारी किए, जिनमें भोपाल समेत 14 जिलों के कलेक्टर बदल दिए गए।
इंदौर, उज्जैन, खरगोन, खंडवा और बड़वानी यानी मालवा-निमाड़ की वह धुरी, जो प्रदेश की आर्थिक-राजनीतिक धड़कन है, इस सूची से बाहर रही। यह संयोग नहीं, सोची-समझी रणनीति है।
खरगोन और बड़वानी निमाड़ की वह पट्टी है, जो जनजातीय बहुल है और राजनीतिक दृष्टि से हमेशा संवेदनशील रही है। यहां कलेक्टर का किरदार सिर्फ प्रशासनिक नहीं, राजनीतिक भी होता है। वैसे भी डॉ. मोहन यादव सरकार कलेक्टर के माध्यम से शासन, प्रशासन और राजनीतिक नियंत्रण हर जिले में बने हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार सरकार प्रशासनिक और पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल करने की तैयारी में थी और राज्य सरकार आईएएस अधिकारियों की नई सूची तैयार कर चुकी थी। सरकार की प्रशासनिक सर्जरी का मुख्य आधार अधिकारियों की परफॉर्मेंस और उनके खिलाफ मिली शिकायतें रहीं।
प्रशासनिक संदेश स्पष्ट है, जो अधिकारी ढीले पड़े, वे बदले गए। जो जिले संवेदनशील थे और जहां खरीदी तुरंत शुरू होना थी, वहां स्थिरता बनाए रखी गई। जानकारी के अनुसार गेहूं का उपार्जन इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 9 अप्रैल से शुरू हो गया और पहले दिन 45 केंद्रों पर 1,616 क्विंटल गेहूं का उपार्जन किया गया।
क्या कहती है यह सर्जरी?
यह तबादला सूची कई संकेत देती है। डॉ. मोहन यादव सरकार प्रशासनिक ढिलाई बर्दाश्त नहीं करती। मालवा-निमाड़ की रणनीतिक और राजनीतिक अहमियत को देखते हुए वहां यथास्थिति बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।
सिंहस्थ-2028 की तैयारी अब प्रशासनिक तबादलों को भी नियंत्रित कर रही है। सबसे महत्वपूर्ण इस सूची में जो नाम नहीं हैं, वे भी अगले दौर की प्रतीक्षा में हैं। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि दो-तीन महीनों में एक और बड़ी सर्जरी होगी, जिसमें इंदौर सहित वे जिले भी आ सकते हैं जो अभी बचे रहे।
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