महिलाओं के साथ अभद्रता करने वालों को पार्टी से निकाले भाजपा: पत्रकार वार्ता में महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया बोलीं
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
महिलाओं की चिंता होने का दम भरने वाली भारतीय जनता पार्टी सबसे पहले उन नेताओं को अपनी पार्टी से निकले जिन पर महिलाओं के साथ अभद्रता करने के मुकदमे दर्ज हुए हैं। भाजपा का हाथ महिलाओं के साथ दुराचार करने वालों के साथ है। महिलाओं के साथ अनैतिकता करने वाले मामलों के जल्द निपटारे के लिए पूरे देश में विशेष न्यायालय का गठन किया जाए।
यह बात कल इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया ने कही। उन्होंने कहा कि गोवा में भाजपा पार्षद सुशांत नायक के बेटे सोहम सुशांत नायक द्वारा लगभग 20-30 नाबालिग बच्चियों का सामूहिक बलात्कार और यौन उत्पीड़न किए जाने का मामला चर्चा में है।
यह आरोपी इन बच्चियों के वीडियो बनाकर वायरल करता रहा। यह काम वह 3 साल से लगातार कर रहा था, लेकिन वहां की भाजपा सरकार चुप थी। वहां की पुलिस, सरकार, मुख्यमंत्री का कहना था कि इस बारे में उन्हें कुछ पता ही नहीं था। जब पीड़ित परिवार के साथ लोग सड़कों पर उतरे तो मामला दर्ज किया गया। यह कोई इस तरह का पहला मामला नहीं है।
विशेष न्यायालय का गठन हो- उन्होंने कहा कि ब्रजभूषण शरण सिंह के मामले से पूरा देश वाकिफ है। कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज होने के बावजूद भाजपा की सरकार ने देश की बेटियों, बल्कि पहलवान बेटियों के साथ छेड़छाड़ और अश्लील हरकत करने के आरोपी इस पूर्व सांसद को भी बचा लिया।
हमेशा महिला अस्मिता की बात करने वाली भाजपा को चाहिए कि उसकी पार्टी के जितने नेताओं पर महिलाओं के साथ अभद्रता, बलात्कार आदि के मुकदमे दर्ज हैं उन सभी को पार्टी से निकाले। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने देश में महिला आरक्षण लाकर महिलाओं को राजनीति में उनका अधिकार देने की पहल की थी।
उस समय भाजपा ने इसका विरोध किया था। अब भाजपा की सरकार महिला आरक्षण लाकर खुद को महिलाओं का हितैषी का दावा करना चाहती है। मेरी मांग है कि यदि सरकार को महिलाओं की इतनी चिंता है तो पूरे देश में महिलाओं के साथ होने वाली अभद्रता, बलात्कार, उत्पीडऩ जैसी इस तरह की घटनाओं के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालय का गठन किया जाए।
महिलाओं पर होने वाले अत्याचार मप्र पर कलंक
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को देश में महिलाओं पर सबसे ज्यादा अत्याचार करने वाले प्रदेश के रूप में पहचाना जाता है। महिलाओं पर होने वाले अत्याचार मप्र पर एक कलंक है, जिसे मिटाने के लिए राज्य सरकार को पहल करना चाहिए, लेकिन देखने में आ रहा है कि सरकार दुष्कर्म के आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई करने में असमर्थ है।
लोकसभा में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने बताया कि वर्ष 2019 से 2023 के 5 साल के दौरान मप्र में 62000 से ज्यादा बालिकाएं लापता हुईं, जिनमें से 44000 को तो ढूंढ लिया, लेकिन 18000 से ज्यादा अब तक लापता हैं। भारत सरकार द्वारा लोकसभा में दी गई यह जानकारी मप्र में बालिकाओं और महिलाओं की असुरक्षा की स्थिति को उजागर करती है।
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