23 साल बाद चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला: पूर्व मुख्यमंत्री का बेटा पाया दोषी; उम्रकैद की हुई सजा, हाईकोर्ट ने कहा-सभी आरोपियों पर एक समान कानून लागू
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, रायपुर।
करीब 23 साल पुराने बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
राहत देना न्यायसंगत नहीं
हाईकोर्ट की स्पेशल डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जब सभी आरोपियों के खिलाफ समान साक्ष्य हों, तो किसी एक को अलग तरीके से राहत देना न्यायसंगत नहीं है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की बेंच ने कहा कि सभी आरोपियों के खिलाफ एक जैसे साक्ष्य होने पर अलग-अलग फैसले नहीं दिए जा सकते। किसी एक आरोपी को बरी करने के लिए ठोस और विशिष्ट कारण जरूरी होते हैं। अदालत ने इसी आधार पर अमित जोगी को दोषी करार दिया।
उम्रकैद और जुर्माना
कोर्ट ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 1000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने के निर्देश भी दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
4 जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए। 28 आरोपियों को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका था। अमित जोगी को 2007 में ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। बाद में इस फैसले को चुनौती दी गई और मामला उच्च अदालतों तक पहुंचा।
CBI जांच और दोबारा सुनवाई
शुरुआत में पुलिस जांच पर सवाल उठने के बाद मामला CBI को सौंपा गया था। CBI ने अमित जोगी समेत कई आरोपियों के खिलाफ हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन CBI ने हाईकोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेजा। करीब 11 हजार पन्नों की चार्जशीट और विस्तृत सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अब यह फैसला सुनाया है।
पहले भी 28 आरोपी दोषी ठहराए जा चुके
इस मामले में पहले ही 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी जा चुकी है, जिनमें 2 तत्कालीन CSP, 1 थाना प्रभारी, रायपुर मेयर के परिजन और कई अन्य आरोपी शामिल हैं। हाईकोर्ट ने उनकी सजा को पहले ही बरकरार रखा था।
कौन थे रामावतार जग्गी?
रामावतार जग्गी छत्तीसगढ़ की राजनीति में प्रभावशाली नेता माने जाते थे। वे वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल के करीबी थे और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) में कोषाध्यक्ष पद पर कार्यरत थे। उनकी हत्या ने उस समय प्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया था।
टाइमलाइन: 23 साल का सफर
2003: रायपुर में जग्गी की हत्या
2003-04: मामला CBI को सौंपा गया
2007: ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी को बरी किया
इसके बाद: CBI की अपील, मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
सुप्रीम कोर्ट: दोबारा सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेजा
2026: हाईकोर्ट ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई
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