बड़ा घोटाला: अध्यक्ष सहित 23 पर FIR; शासन को लगाया 83 लाख का चूना
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, सिवनी।
लखनादौन नगर में चट्टी से बस स्टैंड मार्ग पर नगर परिषद द्वारा निर्मित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की दुकानों के आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला सामने आया है।
14 दुकानदारों के खिलाफ प्रकरण दर्ज
जांच के बाद आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, जबलपुर ने नगर परिषद लखनादौन की अध्यक्ष सहित कई अधिकारियों, पीआईसी सदस्यों और 14 दुकानदारों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया है कि दुकानों के मनमाने आवंटन से शासन को लगभग 83 लाख रुपये की राजस्व क्षति हुई है।
बिना पूरी राशि और अनुबंध के दिया गया कब्जा
जानकारी के अनुसार नगर परिषद द्वारा आठ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में कुल 75 दुकानों का निर्माण कर नीलामी प्रक्रिया की गई थी।
नियमों के अनुसार नीलामी के 21 दिन के भीतर 25 प्रतिशत राशि जमा करना और शेष राशि 120 दिन के भीतर जमा करना अनिवार्य था। इसके बाद अनुबंध कर मासिक किराया तय किया जाना था।
दुकानों का कब्जा दे दिया
हालांकि जांच में पाया गया कि 24 अगस्त 2020 से 18 अक्टूबर 2024 के बीच कई दुकानदारों को बिना पूरी नीलामी राशि जमा कराए और बिना किसी वैध अनुबंध के दुकानों का कब्जा दे दिया गया।
सत्यापन में सामने आया कि 32 दुकानों में से 13 दुकानदारों ने लगभग 79.82 लाख रुपये जमा नहीं किए, वहीं करीब 2.88 लाख रुपये किराया भी वसूल नहीं किया गया।
आरक्षित दुकानों के आवंटन में भी गड़बड़ी
जबलपुर निवासी रविंद्र सिंह आनंद की शिकायत पर इस पूरे मामले की जांच शुरू हुई थी। आरोप है कि आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित दुकानों को नियमों के विपरीत सामान्य वर्ग के लोगों को आवंटित किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि आरक्षित दुकान क्रमांक-7 को बिना पुनः नीलामी कराए वैभव दुबे को आवंटित कर दिया गया, जबकि नियमों के अनुसार किसी दुकान को अनारक्षित घोषित करने से पहले तीन बार नीलामी विफल होना आवश्यक होता है। पीआईसी की बैठक में प्रस्ताव पारित कर लाभ पहुंचाया गया।
इन पर दर्ज हुआ प्रकरण
ईओडब्ल्यू की जांच में तत्कालीन सीएमओ गजेंद्र पांडे, गीता वाल्मीक, वर्तमान राजस्व उपनिरीक्षक रवि गोल्हानी, पीआईसी सदस्य देवकी शिवकुमार झारिया, संगीता संजय गोल्हानी, वर्षा श्रीकांत गोल्हानी, अनीता संदीप जैन, सविता गोलू कुमरे सहित 14 दुकानदारों पर मिलीभगत और पद के दुरुपयोग के आरोप पाए गए हैं।
ईओडब्ल्यू के अनुसार इस पूरे प्रकरण से शासन को लगभग 83 लाख रुपये की वित्तीय क्षति हुई है। मामले की आगे की जांच जारी है।
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