जमीन घोटाले का बड़ा खुलासा: नामांतरण फाइल गायब; सस्पेंड पटवारी बिना मंजूरी करता रहा विदेश यात्राएं
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर में जमीन नामांतरण घोटाले को लेकर चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। जांच के बाद जहां पटवारी और एक कर्मचारी को निलंबित किया गया था, वहीं अब इस पूरे मामले की मूल फाइल ही तहसील से गायब हो गई है। इसके साथ ही सस्पेंड पटवारी द्वारा बिना अनुमति कई विदेश यात्राएं करने की बात भी सामने आई है, जिससे पूरे मामले में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
18 हेक्टेयर जमीन के नामांतरण में गड़बड़ी
यह मामला खुड़ैल तहसील के ग्राम भिंगारिया से जुड़ा है, जहां करीब 18 हेक्टेयर जमीन के नामांतरण में अनियमितताएं सामने आईं। शिकायतकर्ता संजीव कानूनगो और सुरेशचंद्र कानूनगो ने आरोप लगाया था कि वास्तविक वारिसों को नामांतरण प्रक्रिया से बाहर रखा गया। बताया गया कि रामकुंवर बाई के असली उत्तराधिकारियों को शामिल किए बिना ही जमीन का नामांतरण कर दिया गया, जिससे विवाद खड़ा हो गया।
जांच के बाद कार्रवाई, फिर फाइल गायब
मामले की जांच कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर एडीएम रोशन राय ने की थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर पटवारी रोहित तिवारी और बाबू मीना यादव को निलंबित किया गया, जबकि नायब तहसीलदार दयाराम निगम को नोटिस जारी किया गया।
मूल फाइल तहसील कार्यालय से गायब
हालांकि, अब इस पूरे प्रकरण से जुड़ी मूल फाइल तहसील कार्यालय से गायब हो चुकी है। केवल आदेश की एक कॉपी ही उपलब्ध है। नायब तहसीलदार ने संबंधित आदेश पर हस्ताक्षर से भी इनकार किया है, जिससे मामले में और उलझन बढ़ गई है।
रिकॉर्ड में बदलाव, जमीन ट्रांसफर
आरोप है कि आदेश के आधार पर पटवारी ने जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव कर दिए और भूमि को दूसरे के नाम दर्ज कर दिया गया। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि पूरे मामले में सुनियोजित तरीके से गड़बड़ी की गई।
बिना अनुमति विदेश यात्राएं
सस्पेंड पटवारी रोहित तिवारी को खुड़ैल क्षेत्र का प्रभावशाली पटवारी माना जाता रहा है। वर्ष 2017 में चयनित हुए तिवारी के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
बिना विभागीय अनुमति कई बार विदेश यात्रा
अब यह भी सामने आया है कि वह बिना विभागीय अनुमति कई बार विदेश यात्रा कर चुका है, जिनमें बैंकॉक जैसे स्थानों की यात्राएं भी शामिल हैं। नियमों के मुताबिक, सरकारी कर्मचारियों को विदेश जाने से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होता है।
तहसीलों में ‘गठजोड़’ का आरोप
इस पूरे मामले ने तहसील स्तर पर भ्रष्टाचार और दलालों के गठजोड़ की आशंका को और गहरा कर दिया है। आरोप है कि कई अधिकारी और कर्मचारी वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं, जिससे सिस्टम में पारदर्शिता प्रभावित हो रही है।
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