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बड़े शराब ठेकेदारों को झटका: मोनोपॉली पर लगेगा ब्रेक; इन जिलों में किया बड़ा फेरबदल

KHULASA FIRST

संवाददाता

27 फ़रवरी 2026, 1:14 pm
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बड़े शराब ठेकेदारों को झटका

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश की नई आबकारी नीति (वित्तीय वर्ष 2026-27) में इस बार सरकार का मुख्य फोकस शराब ठेकेदारों की मोनोपॉली खत्म करने पर रखा गया है।

इसके तहत प्रदेश के सबसे बड़े आबकारी रिवेन्यू वाले जिले इंदौर में शराब दुकानों की ग्रुपिंग नए सिरे से की गई है। वहीं गुजरात बॉर्डर से सटे धार, झाबुआ और अलीराजपुर में भी बड़ा बदलाव किया गया है।

सिंगल ठेकेदारी सिस्टम खत्म
अब तक धार, झाबुआ और अलीराजपुर जैसे संवेदनशील जिलों में एक ही ठेकेदार पूरे जिले का ठेका लेता था, जिससे तस्करी और अनियमितताओं की आशंका बनी रहती थी।

नई नीति के तहत इन जिलों की दुकानों को ग्रुपिंग सिस्टम में डाल दिया गया है। अब हर ग्रुप के लिए अलग-अलग ई-टेंडर/बोली होगी और कोई भी जिला एकल ठेकेदार के हाथ में नहीं जाएगा।

इंदौर में ग्रुपिंग में बड़ा बदलाव
इंदौर में पहले शराब दुकानों को 60 से ज्यादा ग्रुपों में बांटा गया था। नई नीति में इनकी संख्या घटाकर 56 ग्रुप कर दी गई है। हालांकि संख्या कम की गई है, लेकिन ग्रुपिंग का तरीका पूरी तरह बदला गया है।

सभी ग्रुप्स को कमाई के हिसाब से बैलेंस किया गया है
ज्यादा कमाई वाली दुकानों को एक ही ग्रुप में रखने की बजाय उन्हें हटाकर कम आय वाली दुकानों के साथ जोड़ा गया। जिन इलाकों में कुछ ठेकेदारों का दबदबा था, वहां से दुकानों का पुनर्विन्यास किया गया। इससे न केवल मोनोपॉली कम होगी, बल्कि सभी ठेकेदारों को बराबरी का अवसर मिलेगा।

इंदौर से 2102 करोड़ का लक्ष्य
नई नीति के तहत इंदौर से इस बार 2102 करोड़ रुपए आबकारी राजस्व का लक्ष्य रखा गया है। पिछला लक्ष्य: लगभग 1750 करोड़ रुपए था। यानी करीब 350 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी।

बॉर्डर जिलों में ग्रुपिंग का पूरा गणित
धार में दुकानों को 21 ग्रुप में बांटा गया है। नया राजस्व लक्ष्य: 570 करोड़ रुपए रखा गया है। पिछले साल: 475 करोड़ रुपए था।

झाबुआ में दुकानों को 9 ग्रुप में बांटा गया है। नया लक्ष्य: 345 करोड़ रुपए रखा गया है। पिछले साल: 287 करोड़ रुपए था।

अलीराजपुर जिले को पहली बार ग्रुपिंग सिस्टम में शामिल किया गया। राजस्व लक्ष्य में करीब 20% की बढ़ोतरी की गई है।

तस्करी पर भी लगेगी लगाम
गुजरात बॉर्डर से सटे इन जिलों में लंबे समय से शराब तस्करी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि सिंगल ठेका हटने से नेटवर्क कमजोर होगा। बड़े खिलाड़ियों का दबदबा टूटेगा। निगरानी और नियंत्रण आसान होगा।

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