क्लब में चुनाव से पहले बड़ा खेल: सत्ता में बने रहने के लिए संविधान बदलने की तैयारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
यशवंत क्लब की मैनेजिंग कमेटी का द्विवार्षिक चुनाव जून 2026 के अंत में प्रस्तावित है। क्लब के संविधान के अनुसार कोई भी पदाधिकारी लगातार दो कार्यकाल (कुल चार वर्ष) तक ही पद पर रह सकता है। इसके बाद उसे एक कार्यकाल का विराम लेना अनिवार्य है, फिर वह दोबारा चुनाव लड़ सकता है।
प्रस्ताव लाने की तैयारी
वर्तमान मैनेजिंग कमेटी के चेयरमैन मनजीत सचदेवा (टोनी) और सचिव संजय गोरानी लगातार दो-दो कार्यकाल जीत चुके हैं। इनका कार्यकाल भी जून में समाप्त हो रहा है। ऐसे में कमेटी अब क्लब संविधान में संशोधन का प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए जल्द ही ईओजीएम (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग) बुलाने की योजना है।
क्या है प्रस्ताव?
तैयार किए गए प्रस्ताव के अनुसार क्लब संविधान के रूल नंबर 42 में संशोधन किया जाएगा। वर्तमान प्रावधान के तहत चेयरमैन, सचिव, सह सचिव, कोषाध्यक्ष और पांच कमेटी सदस्य लगातार दो टर्म के बाद चुनाव लड़ने के पात्र नहीं होते।
अब प्रस्ताव है कि इन सभी पदों पर टर्म संबंधी प्रतिबंध समाप्त कर दिया जाए, ताकि चेयरमैन, सचिव, सह सचिव, कोषाध्यक्ष और कमेटी सदस्य बिना किसी कार्यकाल सीमा के दोबारा चुनाव लड़ सकें।
सत्ता में बने रहने की कोशिश?
क्लब के भीतर इस प्रस्ताव को मौजूदा पदाधिकारियों की सत्ता में लगातार बने रहने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ समय से कमेटी सदस्य क्लब सदस्यों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर माहौल तैयार कर रहे थे।
बताया जा रहा है कि कुछ सदस्यों के माध्यम से एक पत्र तैयार कराया गया, जिसके आधार पर अब ईओजीएम बुलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
इसी बीच कुछ सदस्यों की मांग है कि यदि संविधान संशोधन का प्रस्ताव आता है तो उस पर हाथ उठाकर नहीं, बल्कि गुप्त मतदान (बैलेट) के जरिए निर्णय लिया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। अभी तक क्लब में आमतौर पर हाथ उठाकर ही प्रस्ताव पारित किए जाते रहे हैं।
जल्दबाजी क्यों?
जानकारी के अनुसार, यह प्रस्ताव इसी माह पारित कराना आवश्यक माना जा रहा है, ताकि आगामी जून चुनाव में मौजूदा पदाधिकारी इसका लाभ उठा सकें। मार्च के बाद वर्तमान कमेटी की भूमिका सीमित होकर केवल केयरटेकर जैसी रह जाएगी, इसलिए चुनाव से पहले प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि इस कवायद से कई सदस्यों में नाराजगी देखी जा रही है। इसे क्लब की लोकतांत्रिक परंपरा और वर्षों पुरानी व्यवस्था के खिलाफ कदम बताया जा रहा है। कुछ सदस्य इसे तानाशाही रवैये के रूप में भी देख रहे हैं।
नए लोगों को मौका कब?
वर्तमान चेयरमैन टोनी सचदेवा पिछले करीब 50 वर्षों से मैनेजिंग कमेटी और विभिन्न पदों पर सक्रिय रहे हैं। वे 1992 में पहली बार चेयरमैन बने थे। इसके बाद 1998, 2004, 2008, 2014, 2016, 2022 और 2024 में भी चेयरमैन चुने गए। वर्तमान में वे लगातार दो कार्यकाल से इस पद पर हैं।
संजय गोरानी भी लगातार दो टर्म से सचिव पद संभाल रहे हैं। ऐसे में अब टर्म सीमा को समाप्त करने का प्रस्ताव क्लब की राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है।
पहले सदस्यता बढ़ाकर बनाई जमीन
क्लब में वर्ष 2000 से सदस्यता पर रोक लगी हुई थी। मौजूदा मैनेजिंग कमेटी के कार्यकाल में 100 नए सदस्यों को 25-25 लाख रुपए शुल्क लेकर जोड़ने का प्रस्ताव पारित किया गया। तय किया गया था कि चार वर्षों में 25-25 सदस्य जोड़े जाएंगे।
लेकिन चुनावी समीकरणों को देखते हुए सभी 100 सदस्य केवल दो वर्षों में ही बना लिए गए, ताकि आगामी चुनाव में इसका लाभ मिल सके। अब इसके बाद संविधान में संशोधन की तैयारी को भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
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