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आबकारी व्यवस्था और शराब राजस्व को लेकर इस बार बड़ा बदलाव: इस शहर ने इतना बढ़ा दिया राजस्व; यह लाइन बंद होने से इन जिलों को भारी नुकसान

KHULASA FIRST

संवाददाता

20 अप्रैल 2026, 2:32 pm
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आबकारी व्यवस्था और शराब राजस्व को लेकर इस बार बड़ा बदलाव

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश में आबकारी व्यवस्था और शराब राजस्व को लेकर इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। गुजरात बॉर्डर से जुड़े जिलों में अवैध सप्लाई पर सख्ती और “गुजरात लाइन” बंद होने के बाद जहां झाबुआ और आलीराजपुर जैसे जिलों को भारी नुकसान हुआ है, वहीं इंदौर ने राज्य के राजस्व में सबसे बड़ी हिस्सेदारी दर्ज की है।

18,679 करोड़ रुपये की आय
राज्य में कुल 3,553 शराब दुकानों का आवंटन पूरा हो चुका है, जिससे सरकार को लगभग 18,679 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई है। यह पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले करीब 12.34% अधिक है, यानी लगभग 2,050 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय दर्ज हुई है।

इंदौर बना सबसे बड़ा राजस्व स्रोत
राजस्व वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान इंदौर का रहा है। शहर से इस बार 2,184 करोड़ रुपये की आय दर्ज हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 432 करोड़ रुपये अधिक है। आबकारी विभाग के अनुसार, नई नीतियों और सख्त निगरानी व्यवस्था के कारण इंदौर लगातार राज्य के टॉप रेवेन्यू जिलों में बना हुआ है।

गुजरात लाइन बंद होने से सीमावर्ती जिलों को झटका
झाबुआ और आलीराजपुर जिलों में इस बार राजस्व में गिरावट दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि गुजरात में अवैध शराब सप्लाई पर रोक और कड़ी कार्रवाई के चलते इन जिलों में कारोबार प्रभावित हुआ है।आलीराजपुर का शराब ठेका इस बार 94 करोड़ रुपये में गया, जबकि पिछले साल यह 117 करोड़ रुपये था। वहीं झाबुआ में भी गिरावट दर्ज हुई और राजस्व 287 करोड़ से घटकर 243 करोड़ रुपये रह गया।

अन्य जिलों की स्थिति
मंदसौर, जबलपुर, आगर, छिंदवाड़ा, शाजापुर, रतलाम और नीमच जैसे जिलों में भी पिछले वर्ष की तुलना में कम राजस्व प्राप्त हुआ है। वहीं दूसरी ओर मैहर, मंडला और सीधी जैसे जिलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।मैहर में 61% तक की बढ़ोतरी देखने को मिली, जबकि मंडला और सीधी में भी 50% से अधिक की वृद्धि दर्ज हुई।

बड़े शहरों का योगदान
राजस्व के मामले में इंदौर के बाद भोपाल ने 1,206 करोड़ रुपये, जबलपुर ने 910 करोड़ रुपये और ग्वालियर ने 684 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। उज्जैन और धार से भी 600 करोड़ रुपये से अधिक की आय दर्ज की गई है। आबकारी नीति और सीमा क्षेत्रों में सख्ती के चलते राज्य के राजस्व नक्शे में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जहां सीमावर्ती जिलों में गिरावट आई है, वहीं इंदौर और बड़े शहरों ने राज्य की आबकारी आय को मजबूती दी है।

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