रिपोर्ट में बड़ा अलर्ट: एयरपोर्ट क्षमता के पार; जल्द विस्तार नहीं हुआ तो थमेगी विकास की रफ्तार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट तेजी से बढ़ती यात्री संख्या के दबाव में अपनी क्षमता की सीमा तक पहुंच चुका है। आईआईएम इंदौर की हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि समय रहते विस्तार नहीं किया गया तो शहर की आर्थिक वृद्धि पर गंभीर असर पड़ सकता है।
10 साल में 1 करोड़ पार कर सकती है यात्री संख्या
रिपोर्ट के मुताबिक, अगले एक दशक में इंदौर एयरपोर्ट से यात्रियों की संख्या 1 करोड़ के आंकड़े को पार कर सकती है। फिलहाल एयरपोर्ट का मौजूदा ढांचा पहले ही सैचुरेशन पॉइंट के करीब पहुंच चुका है।
एयरपोर्ट्स पर यात्री वृद्धि दर 7-8%
दिलचस्प बात यह है कि जहां देश के अन्य एयरपोर्ट्स पर यात्री वृद्धि दर 7-8% है, वहीं इंदौर में यह करीब 14% दर्ज की गई है, जो शहर की तेजी से बढ़ती कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है।
5 साल में दोगुनी हो सकती है भीड़
विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा रफ्तार जारी रही तो अगले 5 वर्षों में ही यात्री संख्या लगभग दोगुनी हो सकती है। ऐसे में वर्तमान टर्मिनल, रनवे और कार्गो सुविधाएं इस बढ़ते दबाव को संभालने में सक्षम नहीं रहेंगी। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि एयरपोर्ट विस्तार अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुका है।
कार्गो और इंटरनेशनल कनेक्टिविटी बड़ी चुनौती
इंदौर के तेजी से बढ़ते फार्मास्युटिकल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एयर कार्गो की सीमित क्षमता बड़ी बाधा बन रही है। पर्याप्त कोल्ड-चेन और आधुनिक कार्गो इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के चलते निर्यात आधारित उद्योगों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सीमित संख्या भी शहर की वैश्विक कनेक्टिविटी को प्रभावित कर रही है।
GSDP लक्ष्य पर पड़ सकता है असर
मध्य प्रदेश सरकार ने 2028-29 तक राज्य का GSDP दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को समय पर अपग्रेड नहीं किया गया, तो इस लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है। एयरपोर्ट को क्षेत्रीय आर्थिक विकास की रीढ़ बताते हुए इसे प्राथमिकता के आधार पर विकसित करने की जरूरत जताई गई है।
“अब विस्तार ही एकमात्र विकल्प”
आईआईएम इंदौर के डायरेक्टर हिमांशु राय के अनुसार, इंदौर का एयरपोर्ट शहर के विकास की गति से पीछे छूटता जा रहा है। ऐसे में इसका विस्तार अब सिर्फ योजना नहीं, बल्कि तत्काल आवश्यकता बन गया है। रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि अगर समय पर कदम नहीं उठाए गए, तो इंदौर की ‘उड़ान’ आधी रह सकती है।
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