शहर में बड़ी कार्रवाई: इतने होटल कर दिए सील; इतने भवनों को नोटिस किए जारी, जानिये क्या है इसका कारण
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर में आवासीय क्षेत्रों में अवैध रूप से चल रहे व्यावसायिक निर्माणों के खिलाफ नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 होटलों को सील कर दिया, जबकि 64 अन्य भवनों को नोटिस जारी किए गए हैं। इन भवनों में होटल, हॉस्टल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं, जो आवासीय नक्शे के विरुद्ध हैं। यह कार्रवाई विधानसभा में उठे सवाल के बाद तेज हुई, जिसमें महालक्ष्मी नगर सहित कई क्षेत्रों में हो रहे अवैध उपयोग का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया था।
किन-किन इलाकों में हुई कार्रवाई
नगर निगम की टीम ने वीणा नगर, योजना 94, चिकित्सक नगर और महालक्ष्मी नगर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अभियान चलाया। इन इलाकों में बड़ी संख्या में आवासीय भूखंडों पर पूरी तरह व्यावसायिक निर्माण खड़े कर दिए गए थे। कार्रवाई का नेतृत्व भवन अधिकारी टीना सिसोदिया ने किया। इस दौरान भवन अनुज्ञा शाखा, राजस्व विभाग और रिमूवल टीम के अधिकारी भी मौजूद रहे।
सील किए गए प्रमुख होटल
नगर निगम के अनुसार जिन होटलों को सील किया गया, उनमें प्रमुख रूप से होटल ग्रांड गिरधर, ऋषि इम्पेरियल, ईजी स्टे, कृष्णा पैलेस, यूनिटी, ग्लोरी, कंचन, उत्सव, होटल केयर, पैराडाइज और क्लासिक इन सहित अन्य शामिल हैं। साथ ही कुछ रेस्टोरेंट और बार भी इस कार्रवाई की जद में आए हैं।
64 और भवनों पर लटकी तलवार
निगम ने 64 अन्य भवनों को नोटिस जारी किए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में हॉस्टल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यदि इनका उपयोग नहीं रोका गया तो इन्हें भी सील करने की कार्रवाई जल्द की जाएगी।
विधानसभा में उठे सवाल के बाद तेज हुई कार्रवाई
इस मुद्दे को विधानसभा में विधायक महेन्द्र हार्डिया द्वारा उठाया गया था। इसके जवाब में नगर निगम ने स्वीकार किया कि महालक्ष्मी नगर और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आवासीय भूखंडों का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। स्थानीय रहवासी संघ भी लंबे समय से इन अवैध गतिविधियों की शिकायत करते आ रहे थे, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई, फिर भी जारी अवैध निर्माण
नगर निगम पहले भी महालक्ष्मी नगर, तुलसी नगर और चिकित्सक नगर सहित कई क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक निर्माणों को हटाने की कार्रवाई कर चुका है। इसके बावजूद, इन इलाकों में लगातार 100% तक व्यावसायिक उपयोग के मामले सामने आ रहे हैं। शहर में हाउसिंग बोर्ड और प्राधिकरण के आवासीय प्लॉट्स पर भी बड़े स्तर पर होटल, हॉस्पिटल और हॉस्टल संचालित हो रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्ती दिखाई है। चेन्नई से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने देशभर में आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाई जाए। सभी नगरीय निकाय सर्वे कर स्थिति स्पष्ट करें। 15 मई तक विस्तृत रिपोर्ट हलफनामे के साथ प्रस्तुत करें।
नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन: कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां स्थानीय निवासियों के लिए गंभीर असुविधा पैदा करती हैं। पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। और नागरिकों के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन करती हैं। साथ ही, कोर्ट ने इन अवैध गतिविधियों में प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत की जांच के भी निर्देश दिए हैं।
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