भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा की नई टीम में इंदौर को झटका: कार डील और धनबल की शिकायतों ने बदला समीकरण; कैलाश विजयवर्गीय का असर दिखा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा (बीजेवाईएम) की नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा के साथ ही इंदौर की सियासत में हलचल तेज हो गई है। इस बार संगठन ने चौंकाने वाले फैसले लेते हुए कई मजबूत दावेदारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। खास बात यह रही कि धनबल और कथित ‘कार डील’ जैसी शिकायतों ने चयन प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई।
इंदौर के आधा दर्जन से अधिक दावेदार मैदान में थे
प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर द्वारा घोषित नई टीम में इंदौर के आधा दर्जन से अधिक दावेदार मैदान में थे, लेकिन अंतिम सूची में कई बड़े नाम गायब रहे। सूत्रों के अनुसार, इन दावेदारों के खिलाफ शिकायतें बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल तक पहुंची थीं, जिनमें आर्थिक प्रभाव और पद के लिए सौदेबाजी जैसे आरोप शामिल थे। एक मामले में तो पद के बदले कार डील की शिकायत सामने आने के बाद संबंधित दावेदार की मजबूत दावेदारी भी खारिज कर दी गई।
इंदौर से इन नेताओं को मिली जिम्मेदारी
नई कार्यकारिणी में इंदौर से विवेक शर्मा को उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि घनश्याम सिंह को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा अंकित रावल और अमन यादव को सह-कोषाध्यक्ष, नयन दुबे को सोशल मीडिया सह-प्रभारी, स्निग्धा मौर्य को नीति एवं शोध सह-प्रभारी, भावेश दवे को प्रशिक्षण प्रभारी और आशीष हार्डिया को लीगल कनेक्ट प्रभारी बनाया गया है। महू से अक्षत शर्मा को नमो ऐप सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।
अंतिम समय में बदले समीकरण
उपाध्यक्ष और मंत्री जैसे प्रमुख पदों के लिए नयन दुबे को मजबूत दावेदार माना जा रहा था। उन्हें महापौर पुष्यमित्र भार्गव और प्रदेश मंत्री गौरव रणदिवे का समर्थन भी प्राप्त था। हालांकि अंतिम समय में समीकरण बदले और विवेक शर्मा आगे निकल गए। बताया जा रहा है कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के समर्थन और हस्तक्षेप ने इस फैसले में निर्णायक भूमिका निभाई, जिससे विवेक को उपाध्यक्ष पद मिल गया।
नयन दुबे को सबसे बड़ा झटका
वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) पृष्ठभूमि से आने वाले घनश्याम सिंह को उनके संगठनात्मक अनुभव के आधार पर मंत्री पद दिया गया। इस फेरबदल से नयन दुबे को सबसे बड़ा झटका लगा, जो बड़े पद की उम्मीद में पहले से सक्रिय तैयारी कर रहे थे।
धनबल वाले दावेदारों की छुट्टी
इस बार संगठन ने स्पष्ट संदेश देते हुए उन दावेदारों को किनारे कर दिया, जिन पर धनबल के इस्तेमाल के आरोप थे। इनमें अक्षत चौधरी और अक्षांशु तिवारी जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। मजबूत राजनीतिक बैकअप के बावजूद इन नामों पर आई शिकायतों के चलते इन्हें सूची से बाहर कर दिया गया।
नई टीम से यह संकेत
कुल मिलाकर, बीजेवाईएम की नई टीम ने यह संकेत दिया है कि संगठन अब छवि और आंतरिक फीडबैक के आधार पर फैसले ले रहा है। इंदौर की राजनीति में इस फैसले के दूरगामी असर देखने को मिल सकते हैं।
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