‘जिस मुल्क में रहो वफादार रहो: अमेरिका में गूंजा ‘भागवत मंत्र’
KHULASA FIRST
संवाददाता

जोहरान ममदानी का विरोध बेकार, न्यूयॉर्क में आरएसएस मुखिया के लिए हजारों उमड़े
मुस्लिम समुदाय के मामले में एक बार फिर मुखर हुए आरएसएस प्रमुख, संगठन का नजरिया साफ किया
आरएसएस सुप्रीमो की दो-टूक- भारत में मुस्लिम नहीं होना चाहिए, ऐसा सोचने वाला हिंदू नहीं
‘वन वर्ल्ड-वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में भागवत बोले- धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है
न्यूयॉर्क मेयर ममदानी व अमेरिका में मौजूद भारत विरोधी लॉबी का विरोध बेदम-बेअसर, संघ प्रमुख को सुनने सभी धर्मों के हजारों लोग जुटे
अमेरिका के 39 राज्यों व 850 से अधिक शहरों से 5 हजार से ज्यादा प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा, 250 संस्थाओं का मिला समर्थन
सिर्फ हिंदुओं तक सीमित नहीं था कार्यक्रम, 16 विभिन्न धर्मों व धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोग पहुंचे
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आरएसएस के मुखिया डॉ. मोहन भागवत का कहना है अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू रह नहीं सकता। हिंदू कहलाना है, तो यह मानना होगा कि सभी रास्ते एक ही ईश्वर के पास जाते हैं। पूरी मानवता एक है। विविधता हमारी आंतरिक एकता की सजावट है।
इसे स्वीकारना चाहिए, इसका सम्मान और संरक्षण भी होना चाहिए। ये ‘भागवत मंत्र’ अमेरिका की धरती पर गूंजा। इस मंत्र के जरिये विश्व के सबसे बड़े हिंदू संगठन के मुखिया ने सकल दुनिया को एक बार फिर भारत के सनातन वैश्विक चिंतन व अमर मंत्र ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश दिया।
हां, आरएसएस प्रमुख ने ये भी जोर देकर कहा कि व्यक्ति को उस मुल्क के प्रति वफादार रहना चाहिए, जहां व गुजर-बसर कर रहा है। आरएसएस सुप्रीमो इन दिनों अमेरिकी धरती पर हैं। अमेरिका में मौजूद भारत विरोधी लॉबी की अनेक विघ्न-बाधा के बावजूद उनका शनिवार को सभी धर्म के अनुयायियों द्वारा भव्य स्वागत हुआ।
रा ष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को न्यूयॉर्क के ऐतिहासिक मेडिसन स्क्वेयर गार्डन के इन्फोसिस थियेटर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम को संबोधित किया। यह कार्यक्रम आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित उनके वैश्विक संपर्क अभियान का मुख्य हिस्सा था।
इसका शीर्षक ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ था। कार्यक्रम में अमेरिका के लगभग 39 राज्यों और 850 से अधिक शहरों से आए 5,000 से ज्यादा भारतीय-अमेरिकी प्रवासियों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसका आयोजन मुख्य रूप से ‘अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ संस्था द्वारा किया गया। संस्था को 250 से अधिक हिंदू-अमेरिकी संगठनों ने सहयोग किया।
यह आयोजन केवल हिंदुओं तक सीमित नहीं था। इसमें 16 विभिन्न धर्मों और धार्मिक परंपराओं के वैश्विक आध्यात्मिक नेताओं को भी आमंत्रित किया गया था। इस मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विविधता में एकता, भारतीय संस्कृति और वैश्विक कल्याण पर जोर देते हुए कई बड़ी बातें कही, जो दुनिया सुनना चाहती थी।
उन्होंने कहा विविधता में एकता भारत के डीएनए में है। केवल भौतिक सफलता से जीवन को पूर्ण नहीं माना जा सकता, बल्कि मानवता और एकजुटता ही दुनिया की चुनौतियों का असली समाधान हैं।
आरएसएस मुखिया ने इस अवसर पर मुस्लिमों पर बड़ा बयान दिया। अपने भाषण के दौरान उन्होंने समावेशी भारत की बात करते हुए कहा- भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, ऐसा सोचने वाला व्यक्ति हिंदू नहीं हो सकता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का दृष्टिकोण पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने का है। उन्होंने भारतीय प्रवासियों को संदेश देते हुए कहा कि वे जहां रह रहे हैं, उस कर्मभूमि के प्रति पूरी तरह वफादार रहें और साथ ही अपनी मातृभूमि की सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़े रहें।
कार्यक्रम में मौजूद 30 देशों के लगभग 180 धार्मिक नेताओं के मिलकर एक साझा संकल्प लिया। इसमें नफरत, अपमान और हिंसा को जायज ठहराने के लिए धर्म के इस्तेमाल को पूरी तरह खारिज किया गया और ‘वन वर्ल्ड-वन ह्यूमैनिटी’ का नारा दिया गया।
न्यूयॉर्क दौरे के दौरान मेडिसन स्क्वेयर गार्डन के कार्यक्रम से पहले मोहन भागवत ने कई अन्य सामाजिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया। वह न्यूयॉर्क के ऐतिहासिक इस्कॉन मंदिर व भक्ति सेंटर गए, जहां इस्कॉन की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर ‘कृष्ण चेतना’ और एकता का संदेश दिया।
उन्होंने वहां बेघर और जरूरतमंद लोगों के लिए चलाए जा रहे भोजन वितरण अभियान में भी शिरकत की। न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित टाइम्स स्क्वेयर के बिलबोर्ड पर मोहन भागवत की तस्वीरों को भी प्रदर्शित किया गया, जो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा।
इस वैश्विक कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर कुछ विवाद और विरोध भी देखने को मिला, लेकिन कार्यक्रम की सफलता में वह बेदम व बेअसर साबित हुआ। न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी और कुछ अमेरिकी नागरिक अधिकार संगठनों जैसे हिंदुओं फॉर ह्यूमन राइट्स और इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने मोहन भागवत के इस कार्यक्रम का कड़ा विरोध किया और इसे रोकने की मांग की थी।
प्रशासन ने कार्यक्रम रोकने से इनकार कर दिया। हालांकि कार्यक्रम के दौरान मेडिसन स्क्वेयर गार्डन के बाहर कुछ समूहों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया। इस विवाद पर आरएसएस के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने पहले ही बयान जारी कर कहा था कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से आपसी संवाद, सम्मान और ‘भारतीय लोकाचार’ के तहत है, जो सभी का स्वागत करता है।
भागवत ने समझाया क्या है भारत-अमेरिका में मोटा अंतर
मोहन भागवत ने अमेरिका में प्रचलित ‘प्लूरलिज्म’ यानी बहुलतावाद की अवधारणा और भारत के ‘विविधता में एकता’ के विचार के बीच अंतर समझाया। उन्होंने कहा अमेरिका की चर्चा में बहुलतावाद प्रमुख अवधारणा के रूप में सामने आता है, जबकि भारत के संदर्भ में विविधता के बावजूद एकता की भावना महत्वपूर्ण है।
भारत में अलग-अलग जीवनशैली, खान-पान और जरूरतों के बावजूद लोगों को जोड़ने वाली एक स्वाभाविक एकता मौजूद है। भागवत का अमेरिका की धरती से मुस्लिम समुदाय के प्रति दिए गए बयान को दुनियाभर के मुल्कों में जबरदस्त सराहना मिल रही है और उस दुष्प्रचार का जवाब भी, जो भारत में अल्पसंख्यक को लेकर फैलाया जा रहा है।
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