बंते पहलवान, बुलंदियां जिनके कदमों में रहीं
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर शहर मप्र की औद्योगिक राजधानी कहलाता है, पर इसका सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक वैभव और खेल संपदा भी अद्वितीय है। मालव माटी की सौंधी महक व कुश्ती कला देश-दुनिया में मशहूर है। इंदौर की कुश्ती कला को बाणगंगा के एक युवा ने बुलंदियों तक पहुंचाया। उस युवा का नाम था बंते यादव, जो ताउम्र कुश्ती की पहचान के रूप में रहा।
14 जून को ब्रह्मलीन बंते पहलवान का पुण्य स्मरण दिवस है। ऐसे में उनकी प्रेरणादायी यादों को सहेजते हुए एक भव्य कुश्ती दंगल का आयोजन किया जा रहा है। इसमें स्थानीय बास्केटबॉल कॉम्प्लेक्स में हजारों कुश्ती प्रेमियों की मौजूदगी में देश के ख्यात पहलवान जौहर दिखाएंगे।
इस अवसर पर बंते पहलवान स्मृति पटल पर सहज ही उभर रहे हैं। स्थानीय बलभीम व्यायामशाला में युवा साथियों के बीच कुश्ती के दाव-पेंच आजमाते बंते पहलवान को जब देश के बड़े मैदानों पर अपने हुनर के प्रदर्शन का मौका मिला तो उन्होंने साबित कर दिया कि कुश्ती के प्रति उनकी श्रद्धा और समर्पण अद्भुत था।
बंते पहलवान ने 1985 में ओपन नेशनल में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। स्कूल के दिनों में कई राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में उनकी कुश्ती कला को पहचान मिली और मप्र पुलिस के अधिकारियों की नजर उन पर पड़ी तो उन्हें ‘अंडर एज’ में ही मध्य प्रदेश पुलिस में सीधे भर्ती कर लिया गया।
पुलिस विभाग में कार्य के दौरान उनकी कुश्ती कला और निखरी और यहां भी उन्होंने अपना जलवा बरकरार रखा। उन्होंने मप्र पुलिस की ओर से खेलते हुए कुश्ती कला में देश को ढेरों मेडल दिलवाए। यह वह दौर था जब मध्यप्रदेश पुलिस की कुश्ती कला को बंते पहलवान के नाम से जाना जाता था।
बंते पहलवान ने अपने जीवनकाल में करीब दो हजार से अधिक कुश्तियां लड़ीं और मप्र पुलिस के साथ इंदौर शहर को अलग पहचान दिलाई। उनकी बुलंदियों को जानने के लिए इतना ही काफी है कि भारत को ओलंपिक मेडल दिलाने वाले मशहूर पहलवान सुशील कुमार के गुरु, सतपाल पहलवान के भाई और तत्कालीन वर्ल्ड चैंपियन नरेश कुमार के साथ दिग्गज महावीर सिंह जाट पहलवान, वर्ल्ड चैंपियन कमल पहलवान, पंजाब के बेनसिंह और चंदगीराम के मशहूर शिष्य तसवीरसिंह पहलवान, गुरु हनुमान के शिष्य राजेंद्र चांद गुरु पहलवान, दोला पहलवान, सलीम पहलवान और जाहिद पहलवान जैसे दिग्गजों को मैदान में धूल चटाई।
कुश्ती के मैदान में एक वक्त ऐसा था कि उनके खौफ से कई पहलवान स्पर्धा में शामिल ही नहीं होते थे। बंते पहलवान बुलंदियों के दौर में कुश्ती को अलविदा कहने के पूर्व मैदान में सैकड़ों युवाओं की फौज खड़ी कर दी, जिन्होंने कुश्ती के मैदान में उनका नाम रोशन किया।
कुश्ती ने बंते पहलवान को जनता के बीच लोकप्रिय कर दिया था। उनकी इसी लोकप्रियता को देखते हुए मप्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और सहकारिता नेता सुभाष यादव ने उन्हें राजनीति के जरिये समाज से जुड़े रहने की प्रेरणा दी और वे कांग्रेस से जुड़ गए।
वे कांग्रेस संगठन के कई प्रमुख पदों पर रहे। उनके उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव से भी पारिवारिक संबंध रहे। यही वजह है कि मप्र में समाजवादी पार्टी के संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी बंते पहलवान को सौंपी गई, जो उन्होंने पूरी निष्ठा से निभाई।
इस तरह बंते पहलवान ताउम्र जनता के बीच रहे और लोकप्रियता के नए मुकाम हासिल किए। दुःख इस बात का है कि समाज को उनकी बहुत जरूरत थी, लेकिन वे अचानक सबको गमगीन कर रुखसत हो गए। ऐसे अद्भुत युवा को याद करते हुए आज हर आंख नम है, लेकिन कुश्ती के हर मैदान और समाज के लोगों के बीच उनकी यादों में वे अमर हैं।
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