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शराब के ठेकों की नीलामी शुरू: हर दिन इतने करोड़ की शराब पिएंगे लोग; ये दुकान है सबसे महंगी

KHULASA FIRST

संवाददाता

28 फ़रवरी 2026, 12:58 pm
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शराब के ठेकों की नीलामी शुरू

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्यप्रदेश की नई आबकारी नीति के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शराब दुकानों के ई-टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इंदौर में इस बार शराब कारोबार को 56 ग्रुप में बांटा गया है और सरकार ने इनसे 2102 करोड़ रुपए का राजस्व लक्ष्य तय किया है।

2102 करोड़ का लक्ष्य, ठेकेदारों में हलचल
ई-नीलामी शुरू होते ही शहर की हाई-प्रोफाइल दुकानों को लेकर ठेकेदारों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। बड़े कारोबारी अपना दबदबा बनाए रखने के लिए सक्रिय हैं, वहीं नए खिलाड़ी भी बोली प्रक्रिया में उतर चुके हैं।

सबसे महंगी शराब दुकान
इंदौर की सबसे महंगी शराब दुकान ग्रुप-2 में शामिल एमआर-9 क्षेत्र की है। इसका बेस प्राइस 49 करोड़ 94 लाख रुपए तय किया गया है। फिलहाल यह दुकान ठेकेदार प्रीति जायसवाल के पास है।

दूसरे नंबर पर स्कीम-54 क्षेत्र की दुकान है, जिसका न्यूनतम मूल्य 49 करोड़ 54 लाख रुपए रखा गया है। यह वर्तमान में एनवीआर इंटरप्राइज के पास है।

तीसरे स्थान पर ग्रुप-6 की द्वारिकापुरी क्षेत्र की दुकान है, जिसका बेस प्राइस 42 करोड़ 87 लाख रुपए निर्धारित किया गया है। यह जय मातादी ट्रेडर्स के पास है।

इसके बाद ग्रुप-3 की एमआईजी क्षेत्र की दुकान आती है, जिसका बेस प्राइस 40 करोड़ रुपए तय किया गया है।

क्यों इतनी महंगी हैं ये दुकानें?
एमआर-9 और स्कीम-54 जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में बार और पब संचालित होते हैं। इन प्रतिष्ठानों को शराब की आपूर्ति इन्हीं दुकानों से होती है, जिससे इनकी बिक्री और मांग काफी अधिक रहती है।

इसी तरह द्वारिकापुरी क्षेत्र में भी बार लाइसेंस धारकों की मौजूदगी के कारण खपत ज्यादा है। यही वजह है कि इन दुकानों के बेस प्राइस अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी ऊंचे रखे गए हैं।

100 करोड़ से ज्यादा के दो ग्रुप
इस बार इंदौर में दो ऐसे ग्रुप हैं, जिनकी कुल कीमत 100 करोड़ रुपए से अधिक है। ग्रुप-1 की कुल कीमत 134 करोड़ 95 लाख रुपए तय की गई है। ग्रुप-2 की कीमत 130 करोड़ रुपए रखी गई है, जिसमें एमआर-9 जैसी हाई-डिमांड दुकानें शामिल हैं।

हर दिन 5.75 करोड़ की बिक्री का अनुमान
वित्तीय वर्ष 2025-26 में इंदौर में लगभग 1700 करोड़ रुपए की शराब बिक्री दर्ज की गई थी, यानी औसतन प्रतिदिन 4.65 करोड़ रुपए की खपत। अब 2026-27 के लिए 2102 करोड़ रुपए का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस हिसाब से प्रतिदिन करीब 5 करोड़ 75 लाख रुपए की शराब बिक्री का अनुमान है। आबकारी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राजस्व के मामले में इंदौर प्रदेश का सबसे बड़ा जिला बना हुआ है।

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