फर्जी ‘वॉइस ऑफ डीसी’ अकाउंट से छवि बिगाड़ने का प्रयास: 4 पर एफआईआर; डेली कॉलेज पर डिजिटल हमले की साजिश का हुआ खुलासा
KHULASA FIRST
संवाददाता

महिलाकर्मियों व सिक्ख समाज को लेकर की थी आपत्तिजनक पोस्ट
फर्जी अकाउंट से रची गई कथित बदनामी की डिजिटल स्क्रिप्ट
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक नामों में शामिल डेली कॉलेज को सोशल मीडिया के जरिये घेरने की कथित साजिश का बड़ा खुलासा हुआ है। ‘वॉइस ऑफ डीसी’ नाम के एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट से संस्था की साख पर हमला करने, प्रबंधन को विवादों में घसीटने और कथित डिजिटल दुष्प्रचार फैलाने के आरोप में चार लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई है।
मामला अब सिर्फ एक अकाउंट का नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा, प्रभाव और योजनाबद्ध डिजिटल साजिश की जांच तक पहुंच चुका है। डेली कॉलेज प्रबंधन की शिकायत पर संदीप पारेख, अनुराग जैन, रंजीतसिंह नामली और मानवीर बायस के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए संस्था, उसके प्रबंधन, समिति सदस्यों और प्राचार्य की छवि को धूमिल करने की कथित कोशिश की।
शिकायत के अनुसार वॉइस ऑफ डीसी नाम से बनाया गया इंस्टाग्राम अकाउंट इस तरह संचालित किया जा रहा था कि आम लोगों को यह भ्रम हो कि यह डेली कॉलेज या उससे जुड़े किसी अधिकृत पक्ष का आधिकारिक मंच है। यही बिंदु इस पूरे मामले को और गंभीर बना देता है, क्योंकि आरोप केवल आलोचना या असहमति का नहीं, बल्कि प्रतिरूपण और छलपूर्वक विश्वास पैदा करने का भी है।
बताया गया है कि इस फर्जी अकाउंट के जरिये लगातार ऐसी सामग्री पोस्ट की जा रही थी, जिसे डेली कॉलेज प्रबंधन ने झूठी, भ्रामक, अपमानजनक और संस्था-विरोधी बताया है। सोशल मीडिया के दौर में, जहां एक पोस्ट कुछ ही मिनटों में सैकड़ों-हजारों लोगों तक पहुंच जाती है, इस तरह का डिजिटल अभियान किसी भी संस्था की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
आरोप लगाया गया है कि संबंधित डिजिटल गतिविधियों के दौरान संस्थान की महिला कर्मचारियों के खिलाफ कुछ पोस्ट और कथित कंटेंट के माध्यम से टीका-टिप्पणी की गई, जिसे प्रबंधन ने अशोभनीय व संस्था के कार्य वातावरण और गरिमा के खिलाफ माना है। इसके अलावा यह आरोप भी है कि कुछ चित्रों/विजुअल सामग्री के माध्यम से सिक्ख समाज के प्रति आपत्तिजनक संकेत और उंगलियां उठाई गईं।
यदि जांच में यह पक्ष प्रमाणित होता है, तो मामला केवल मानहानि या फर्जी अकाउंट का नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता, समुदाय विशेष के प्रति आपत्तिजनक प्रस्तुति और संस्थागत वातावरण को विषाक्त करने जैसे गंभीर आयाम भी ग्रहण कर सकता है। यही कारण है कि यह प्रकरण अब केवल डेली कॉलेज की छवि तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसमें महिला सम्मान और सामाजिक सौहार्द जैसे पहलू भी जुड़ते नजर आ रहे हैं।
मेटा के बाद अब पुलिस तक पहुंचा मामला
डेली कॉलेज प्रशासन ने शिकायत में यह भी कहा है कि कानूनी कार्रवाई से पहले संस्था ने अपने स्तर पर सभी उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल किया। फर्जी अकाउंट को इंस्टाग्राम पर रिपोर्ट किया गया, मेटा प्लेटफॉर्म को औपचारिक शिकायत भेजी गई और उपलब्ध माध्यमों से जुड़ी जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया।
लेकिन जब कथित तौर पर गतिविधियां जारी रहीं और सामग्री प्रसारित होती रही, तब संस्था को कानूनी रास्ता अपनाना पड़ा। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि एफआईआर दर्ज कराना लगातार जारी कथित डिजिटल हमले के बाद उठाया गया निर्णायक कदम था।
अलग-अलग धाराओं में केस
इस पूरे मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की प्रासंगिक धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है। हालांकि जांच में तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर कानूनी पहलुओं की गहराई से पड़ताल की जाएगी। जांच एजेंसियों के समक्ष कई महत्वपूर्ण सवाल हैं कि अकाउंट किसने बनाया? उसका संचालन कौन कर रहा था? कंटेंट किसके निर्देश पर तैयार किया गया?
क्या इसके पीछे कोई बड़ा डिजिटल या संस्थागत नेटवर्क सक्रिय था? क्या इस अभियान में और भी लोग शामिल थे? क्या महिला कर्मचारियों और समुदाय विशेष से जुड़े कंटेंट का भी कोई सुनियोजित एंगल था? जांच के दौरान सोशल मीडिया लॉग, आईपी डिटेल्स, डिजिटल फुटप्रिंट, कंटेंट सोर्सिंग और कम्युनिकेशन रिकॉर्ड जैसे तकनीकी पहलू अहम भूमिका निभा सकते हैं।
मामला सिर्फ अकाउंट का नहीं, इरादे का
उक्त प्रकरण ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आज के दौर में सोशल मीडिया केवल संवाद का मंच नहीं, बल्कि प्रभाव, भ्रम और प्रतिष्ठा पर हमले का हथियार भी बन सकता है। इस मामले को और अधिक गंभीर बनाते हैं वे आरोप, जिनमें संस्था की महिला कर्मचारियों और सिक्ख समाज के प्रति कथित आपत्तिजनक प्रस्तुति की बात भी सामने आई है।
डेली कॉलेज का सख्त संदेश- ‘प्रतिष्ठा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’
डेली कॉलेज प्रबंधन ने स्पष्ट कहा है कि संस्था की प्रतिष्ठा, विरासत और विश्वसनीयता से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रबंधन का कहना है कि यह केवल एक संस्था का मामला नहीं, बल्कि उस शैक्षणिक विश्वास का प्रश्न है, जो वर्षों में बनता है और जिसे कुछ लोग कथित रूप से डिजिटल माध्यम से चोट पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। प्रबंधन ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति या समूह इस तरह की हरकत करने की हिमाकत न कर सके।
‘अहेड मीडिया’ से मिली जानकारी ने खोले पूरे खेल के तार
मामले में एक अहम मोड़ तब आया, जब ‘अहेड मीडिया’ नामक फर्म की स्वामिनी अलीशा सैनी से मिली जानकारी ने पूरे प्रकरण को नई दिशा दे दी। शिकायत में कहा गया है कि पहले आरोपी संदीप पारेख के कुछ डिजिटल कार्यों से जुड़ी रही अलीशा को कथित रूप से ऐसे पोस्ट और कंटेंट तैयार करने के लिए कहा गया था, जो डेली कॉलेज जैसी संस्था की गरिमा के खिलाफ थे।
शिकायत के मुताबिक अलीशा ने इससे इनकार करते हुए पूरे मामले की जानकारी डेली कॉलेज प्रबंधन को दी। यदि जांच में यह पक्ष सही साबित होता है तो मामला केवल एक फर्जी अकाउंट का नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित डिजिटल दुष्प्रचार अभियान का गंभीर उदाहरण माना जा सकता है।
सोशल मीडिया पर ‘इमेज वॉर’ की कथित कोशिश
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि फर्जी अकाउंट के माध्यम से संस्था, उसके प्रबंधन और संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ लगातार ऐसा माहौल तैयार करने की कोशिश की गई, जिससे डेली कॉलेज की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हों।
यह कथित डिजिटल अभियान केवल पोस्ट डालने तक सीमित नहीं था, बल्कि ऐसा प्रतीत कराने की कोशिश की गई मानों यह अकाउंट सच्चाई या आवाज के नाम पर कोई अधिकृत या अंदरूनी मंच हो।
यहीं से यह मामला इमेज वॉर और डिजिटल नैरेटिव कंट्रोल की शक्ल लेता दिखाई देता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था के खिलाफ इस तरह का अभियान उसके छात्रों, अभिभावकों, पूर्व छात्रों और समाज में बने विश्वास को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
आगामी चुनावों को प्रभावित करने का भी था प्रयास?
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू वह आरोप है, जिसमें कहा गया है कि इस पूरे डिजिटल अभियान का उद्देश्य केवल बदनामी नहीं था, बल्कि आगामी चुनावों के परिणामों को प्रभावित करना भी हो सकता है। इस दुष्प्रचार के जरिये संस्था के भीतर माहौल को प्रभावित करने और प्रतिस्पर्धी संस्थानों को लाभ पहुंचाने की भी कोशिश की गई। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह केवल कुछ लोगों की नाराजगी थी या इसके पीछे कोई बड़ा एजेंडा, समूह या हित काम कर रहा था?
‘डीसी’ नाम का इस्तेमाल कर भ्रम फैलाने का आरोप
डेली कॉलेज का संक्षिप्त नाम ‘डीसी’ है और शिकायत में आरोप है कि इसी संक्षिप्त नाम से लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा की गई। कथित तौर पर कोशिश की गई कि लोग इस अकाउंट को डेली कॉलेज से जुड़ा या उससे प्रभावित मंच समझें।
सोशल मीडिया पर किसी संस्था के नाम, प्रतीक या संक्षिप्त पहचान का इस्तेमाल कर फर्जी विश्वसनीयता गढ़ना एक गंभीर प्रवृत्ति मानी जाती है। यही कारण है कि इस मामले में केवल मानहानि नहीं, बल्कि पहचान के दुरुपयोग, छल और साजिश जैसे पहलू भी उभरकर सामने आ रहे हैं।
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