ASI रामपाल गिरफ्तार: सीडीआर लीक कांड की परतें उधेड़ती खुलासा फर्स्ट की खबर; डिटेक्टिव मुकेश के साथ की थी गोवा ट्रिप
KHULASA FIRST
संवाददाता

जांच टीम में ही शामिल एएसआई प्रभाकर महाजन की भूमिका पर भी सवाल
आदेश प्रताप सिंह भदौरिया वरिष्ठ पत्रकार खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इन दिनों चर्चित सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) लीक कांड में ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने पूरी जांच पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस एएसआई प्रभाकर महाजन उर्फ प्रभु उर्फ सिंघम पर नेटवर्क से जुड़े होने का शक है, उसके ही जांच टीम का हिस्सा होने की बात सामने आई है। मामला सिर्फ डेटा लीक का नहीं, बल्कि पुलिस सिस्टम के भीतर जमे संगठित रैकेट की ओर इशारा कर रहा है।
आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस) ने पूरे केस के सबसे बड़े सूत्रधार एएसआई रामपाल के खिलाफ सायबर सेल में केस दर्ज करवाने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, खुलासा फर्स्ट की जांच में खुलासा हुआ है कि एएसआई रामपाल पाल और एटीएस की जांच टीम के एएसआई प्रभाकर महाजन, डिटेक्टिव एजेंसी संचालक मुकेश तोमर के साथ गोवा ट्रिप पर गए थे।
उल्लेखनीय है एटीएस को इंदौर में ‘इंदौर डिटेक्टिव सर्विस’ चलाने वाले मुकेश तोमर के बारे में लोगों की सीडीआर की खबर मिली थी। मुकेश जासूसी की आड़ में आम लोगों का निजी डेटा भी बेच रहा था। कॉल डिटेल की जांच में एटीएस को क्राइम ब्रांच के एएसआई रामपाल पाल और आरक्षक रविंद्र राठौड़ की भूमिका भी संदिग्ध मिली।
तीन दिन पहले एटीएस ने रविंद्र को उसके घर से तो टॉवर लोकेशन के आधार पर सोलापुर (महाराष्ट्र) से पकड़ा था। वह क्राइम ब्रांच में दर्ज एक केस की जांच के लिए हेड कांस्टेबल राहुल बाथम और आरक्षक कन्हैया दांगी के साथ था। एटीएस ने राहुल और कन्हैया के कथन लेकर उन्हें रवाना करने के बाद रामपाल पाल के मोबाइल में संदिग्ध डेटा मिलने पर उसे हिरासत में ले लिया था।
उधर, आरक्षक रविंद्र को भी पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया, लेकिन रामपाल के संबंध फरार डिटेक्टिव एजेंसी संचालक मुकेश तोमर से मिले। एएसआई रामपाल पाल डिटेक्टिव एजेंसी संचालकों को काल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर) और टावर लोकेशन बेचने के काम कर रहा था।
कल साइबर सेल (भोपाल) में केस दर्ज होने के बाद उसकी गिरफ्तारी ले ली गई। एजेंसी ने उसके मोबाइल की जांच की तो मुकेश तोमर को भेजी मोबाइल की टावर लोकेशन के मैसेज मिले। कल एटीएस ने रामपाल के खिलाफ राज्य साइबर सेल में केस दर्ज करवा कर न केवल उसकी गिरफ्तारी ले ली, बल्कि उसे कोर्ट में पेश कर उसका रिमांड भी मांग लिया।
एएसआई रामपाल का मोबाइल और लैपटाप जब्त कर मोबाइल से एजेंसी संचालक को भेजी जानकारी भी रिकवर की है। एटीएस ने एक अन्य डिटेक्टिव एजेंसी संचालक योगेश को भी हिरासत में ले लिया है।
भोपाल की एक अन्य एजेंसी के संचालक और मुकेश तोमर के पार्टनर अनिकेत को भी एटीएस ने हिरासत में ले रखा है। करीब तीन-चार एजेंसियों के लिए पीछा करने का काम करने वाले एक युवक सुल्तान को एटीएस ने शुक्रवार सुबह उठाया था, जिसे देर रात पूछताछ के बाद छोड़ दिया।
गरबा करते हुए क्राइम ब्रांच एएसआई रामपाल (यलो शर्ट) एटीएस का एएसआई प्रभाकर महाजन (ब्लैक टीशर्ट) और फरार एजेंसी संचालक मुकेश तोमर सबसे पीछे िदखाई दे रहे है। ।
सबसे बड़ा सवाल जांच में ही संदिग्ध क्यों
हैरानी की बात यह है कि जिन एजेंसियों पर कार्रवाई के लिए टीम बनाई गई, उसी टीम में एएसआई प्रभाकर महाजन को शामिल किया गया। अब तक वह तीन कर्मचारियों को पकड़ भी चुका है, लेकिन उसकी खुद की भूमिका जांच के घेरे में है।
भोपाल की डिटेक्टिव एजेंसी के संचालक अनिकेत सहित कई लोगों से पूछताछ जारी है। आधा दर्जन से ज्यादा एजेंसियां रडार पर हैं। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि कुछ बड़े उद्योगपति और अफसर भी इन एजेंसियों के क्लाइंट रहे हैं। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं। आने वाले समय में और बड़े नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
गोवा ट्रिप ने खोली संबंधों की पोल
पता चला है कि मार्च में मुकेश तोमर, एएसआई रामपाल और प्रभाकर महाजन गोवा ट्रिप पर गए थे, जिसका पूरा खर्च तोमर ने उठाया। यह ट्रिप उनके गहरे रिश्तों का बड़ा सबूत मानी जा रही है। सूत्रों का दावा है कि कई मामलों में एएसआई प्रभाकर खुद एजेंसी में बैठकर क्लाइंट से डील करता था। इससे साफ है कि यह कोई छोटा खेल नहीं, बल्कि उनका संगठित रैकेट है।
गिफ्ट से की सेटिंग और सिस्टम में सेंधमारी
खुलासा फर्स्ट की प्राथमिक पड़ताल में खुलासा हुआ है कि इंदौर डिटेक्टिव एजेंसी के संचालक मुकेश तोमर ने महंगे गिफ्ट देकर क्राइम ब्रांच में सेंधमारी की। उसने एएसआई रामपाल पाल और सिपाही रविंद्र को अपने नेटवर्क से जोड़ा।
मुकेश तोमर आम लोगों की गोपनीय कॉल डिटेल और टावर लोकेशन मोटी रकम लेकर बेचता था। इससे मिलने वाली रकम पुलिसकर्मियों को महंगे गिफ्ट और आर्थिक फायदे देकर अपने नेटवर्क को मजबूत करने में खर्च करता था।
मुकेश तोमर के एटीएस की जांच टीम में शामिल एएसआई प्रभाकर महाजन उर्फ प्रभु उर्फ सिंघम से भी करीबी संबंध सामने आए हैं।
तोमर ने एएसआई रामपाल को बुलेट के लिए आर्थिक मदद की। एएसआई प्रभाकर को महंगा आईफोन गिफ्ट किया।
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