भाजपा में एक और नितिन लेकिन नबीन
KHULASA FIRST
संवाददाता

राकेश अचल वरिष्ठ पत्रकार खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सत्तारूढ़ भाजपा में अब एक नहीं बल्कि दो-दो नितिन हो गए हैं। एक नबीन हैं, दूसरे प्राचीन। निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी के रूप में लंबी पतारसी के बाद 14 दिसंबर 2025 को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गये नितिन नबीन को चुनाव प्रक्रिया की औपचारिकता पूरी होने के बाद अंतत: भाजपा के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चुन लिया गया। मंगलवार 20 जनवरी को उनके निर्विरोध अध्यक्ष बनने की घोषणा की गई।
भाजपा की कमान सम्हालने वाले नितिन नबीन दूसरे बिहारी हैं या पहले से ही लगभग तय था कि पार्टी नेतृत्व की ओर से राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए बिहार के युवा नेता नितिन नबीन ही सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाएंगे। फिर भी चुनाव प्रक्रिया की सारी औपचारिकताएं पूरी की गईं। पार्टी संविधान के अनुसार, 36 में से 30 प्रदेशों में अध्यक्ष का निर्वाचन पूरा होने के बाद 16 जनवरी, 2026 को राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन कार्यक्रम की अधिसूचना पार्टी के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी के. लक्ष्मण द्वारा जारी की गई।
निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार को नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में दोपहर दो से शाम चार बजे तक नामांकन प्रक्रिया संपन्न हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, प्रदेश अध्यक्षों की उपस्थिति में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नितिन नबीन के समर्थन में कुल 37 सेट नामांकन पत्र दाखिल हुए थे।
भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नबीन किसकी खोज हैं, ये अनुसंधान का विषय है, किंतु मेरा कयास है कि जेपी नड्डा साहब ही उन्हें खोजकर लाए होंगे, क्योंकि वे भी बिहारी हैं।
नितिन नबीन सिन्हा बिहार के प्रतिष्ठित भाजपा नेता नबीन किशोर सिन्हा के बेटे हैं। नितिन के लिए दिल्ली उतनी ही नबीन है, जितनी 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए थी। नितिन बांकीपुर से 4 बार के विधायक हैं। भाजपा की कमान सम्हालने से पहले वे बिहार सरकार में सड़क निर्माण मंत्री रहे।
नितिन नबीन से पहले महाराष्ट्र के सडक मंत्री रहे नितिन गडकरी को भी भाजपा की कमान सौंपी गई थी। पिछले चुनाव में उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा को भारी अंतर से हराया था। नितिन नबीन भाजयुमो के राष्ट्रीय महासचिव भी रहे।
सब जानते हैं कि नितिन नबीन नितिन गडकरी भी नहीं हो सकते और जेपी नड्डा भी नहीं बन सकते। उन्हें भाजपा पर अपनी छाप लगाने के लिए लंबा संघर्ष भी करना पड़ेगा और वक्त का इंतजार भी। भाजपा के नये अध्यक्ष नितिन नबीन अनुभव और उम्र में इतने छोटे हैं कि किसी प्रवक्ता को भी आंख नहीं दिखा सकते।
नबीन को पार्टी और संघ के बीच संतुलन कायम करने के साथ ही पार्टी में अपनी लाबी भी तैयार करना होगी। नितिन नबीन का कार्यकाल 3 साल का होगा। आने वाले तीनों साल नितिन के लिए चुनौती भरे होंगे, क्योंकि इन्हीं तीन साल में अनेक विधानसभा चुनावों के साथ उन्हें अगले आमचुनाव का भी सामना करना होगा।
यदि पार्टी आगे बढ़ती है, तो उन्हें मुफ्त में सफलता मिलेगी और यदि पार्टी ठिठकती है, तो असफलता का ठीकरा उनके सिर पर फोड़ा जाएगा। बहरहाल हम नितिन नबीन को शुभकामनाएं देते हैं और उम्मीद करते हैं कि वे भाजपा को कुछ न कुछ नबीन तो बनाएंगे ही।
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