मैदान पर गुस्सा: क्या अभिषेक शर्मा बन रहे हैं आईपीएल के नए 'एंग्री यंग मैन'?
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, हेमंत उपाध्याय।
सनराइजर्स हैदराबाद (एसआरएच) के तूफानी सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा इन दिनों अपनी आतिशी बल्लेबाजी से ज्यादा अपने तल्ख तेवरों को लेकर चर्चा में हैं। कोलकाता के ईडन गार्डन्स में कोलकाता नाइट राइडर्स यानी केकेआर टीम के खिलाफ मिली शानदार जीत के बावजूद यह मैच अभिषेक के लिए एक कड़वी याद छोड़ गया। अंपायर के फैसले पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताना उन्हें काफी भारी पड़ा है। भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड यानी बीसीसीआई ने उनके इस व्यवहार को अनुशासनहीनता माना है, जिसके बाद अब उनके नाम के साथ एक 'डिमेरिट पॉइंट' का दाग भी जुड़ गया है।
जब आया ईडन गार्डन्स में वो विवादित पल
यह पूरी घटना मैच के 9वें ओवर की है। अभिषेक शर्मा 48 रन बनाकर क्रीज पर थे। अपने अर्धशतक के बेहद करीब इस खिलाड़ी का तभी ब्लेसिंग मुजरबानी की एक गेंद पर वरुण चक्रवर्ती ने बाउंड्री पर कैच लपका। मामला बेहद करीबी था, इसलिए निर्णय थर्ड अंपायर को सौंपा गया। रिप्ले में कैच पूरी तरह स्पष्ट नहीं लग रहा था, लेकिन अंपायर ने तकनीकी आधार पर अभिषेक को आउट करार दिया। बस, यहीं अभिषेक अपना आपा खो बैठे। उन्होंने न केवल मैदान पर अंपायरों से बहस की, बल्कि पवेलियन लौटते समय भी अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।
मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगा
इस वाकये के बाद अभिषेक पर मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है। उन्हें आईपीएल कोड ऑफ कंडक्ट के आर्टिकल 2.3 (मैदान पर अनुचित व्यवहार) का दोषी पाया गया है। सबसे बड़ा जोखिम उनके खाते में जुड़ा 1 डिमेरिट पॉइंट है। क्रिकेट के नियम कहते हैं कि यदि किसी खिलाड़ी के खाते में 4 डिमेरिट पॉइंट हो जाते हैं, तो उस पर एक या अधिक मैचों का प्रतिबंध लग सकता है।
क्या 'बैड बॉय' बनते जा रहे हैं अभिषेक?
अभिषेक शर्मा को क्रिकेट जगत में एक शांत और फोकस्ड खिलाड़ी माना जाता रहा है, लेकिन जैसे-जैसे उनका कद बढ़ रहा है, मैदान पर उनकी आक्रामकता भी बढ़ी है। हालांकि वे करियर के शुरुआती दौर में बेहद अनुशासित थे, लेकिन पिछले कुछ समय से उनके नाम के साथ विवाद जुड़ने लगे हैं। इससे पहले घरेलू क्रिकेट में पंजाब के लिए खेलते समय भी उन्होंने आउट दिए जाने पर अंपायर के सामने बुदबुदाते हुए विरोध दर्ज कराया था, जिस पर मैच रेफरी ने उन्हें 'ऑफ द रिकॉर्ड' कड़ी चेतावनी दी थी।
दिग्गजों का इतिहास और अभिषेक को नसीहत
क्रिकेट के इतिहास में जोश में होश खोने वाले अभिषेक अकेले खिलाड़ी नहीं हैं। साल 2019 में 'कैप्टन कूल' एमएस धोनी भी एक विवादित फैसले पर डगआउट छोड़कर मैदान के बीचों-बीच अंपायरों से भिड़ने पहुंच गए थे। विराट कोहली तो कई बार अंपायरों पर चिल्लाने के कारण भारी जुर्माना भर चुके हैं। वहीं, शाकिब अल हसन द्वारा स्टंप्स को लात मारना क्रिकेट की सबसे शर्मनाक घटनाओं में गिनी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अभिषेक को यह समझना होगा कि यह अनुशासनहीनता उनके करियर को नुकसान पहुंचा सकती है।
टीम और मेंटर्स की प्रतिक्रिया- मौन समर्थन या मजबूरी?
इस विवाद पर दिलचस्प बात यह है कि अभिषेक ने खुद सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है, लेकिन बीसीसीआई की प्रेस रिलीज के मुताबिक उन्होंने अपनी गलती मान ली है। उन्होंने सजा स्वीकार कर ली, इसलिए इस मामले में अब कोई औपचारिक सुनवाई नहीं होगी।
अपेक्षित सम्मान नहीं मिलना निराशा का कारण
सनराइजर्स हैदराबाद का खेमा और उनके मेंटर फिलहाल उनके बचाव में खड़े दिख रहे हैं। दिग्गज युवराज सिंह ने एक पॉडकास्ट में अभिषेक की मानसिकता का बचाव करते हुए कहा कि जब एक खिलाड़ी सालों तक प्रदर्शन करने के बाद भी अपेक्षित सम्मान (जैसे कप्तानी) नहीं पाता, तो उसके अंदर की निराशा कभी-कभी इस तरह बाहर आ जाती है। टीम के हेड कोच डेनियल विटोरी और कार्यवाहक कप्तान ईशान किशन ने भी उनके व्यवहार पर टिप्पणी करने के बजाय उनकी उस 21 गेंदों में 48 रनों की पारी की तारीफ की, जिसने मैच का रुख बदल दिया था। टीम मैनेजमेंट इस जुर्माने को नजरअंदाज कर रहा है क्योंकि टीम के लिए अभिषेक का तूफानी प्रदर्शन फिलहाल उनके व्यवहार से कहीं ज्यादा बड़ा है।
फिलहाल सीनियर खिलाड़ियों और कोच का ध्यान अभिषेक की 'गलती' से ज्यादा उनके 'मैच जिताऊ फॉर्म' पर है। वे उन्हें एक शुद्ध 'मैच-विनर' के रूप में देख रहे हैं और चाहते हैं कि वे अपनी इस दहकती आक्रामकता को विवादों के बजाय केवल रनों के अंबार में तब्दील करें।
क्या है डिमेरिट पॉइंट
डिमेरिट पॉइंट क्रिकेट में खिलाड़ियों के खराब व्यवहार और अनुशासनहीनता को मापने का एक पैमाना है। जब कोई खिलाड़ी मैदान पर अंपायर से बहस करता है, अपशब्दों का प्रयोग करता है या खेल भावना के विपरीत कार्य करता है, तो मैच रेफरी दोषी पाए जाने पर खिलाड़ी के रिकॉर्ड में 'डिमेरिट पॉइंट' जोड़ देते हैं। ये पॉइंट एक निश्चित समय सीमा (आमतौर पर 24 महीने) तक खिलाड़ी के खाते में बने रहते हैं। यदि कोई खिलाड़ी बार-बार गलती करता है और उसके खाते में कुल 4 डिमेरिट पॉइंट जमा हो जाते हैं, तो उसे नियमों के अनुसार एक टेस्ट मैच या दो वनडे/टी-20 मैचों के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाता है। सरल शब्दों में, यह एक 'ब्लैक मार्क' की तरह है, जो खिलाड़ी को भविष्य में बड़ी सजा या निलंबन की चेतावनी देता है।
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