सीलिंग की जमीन पर कॉलोनी बसाने का आरोप: बीजेपी के पूर्व विधायक के करीबी पर FIR की मांग
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कलेक्टर कार्यालय की कॉलोनी सेल से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि हातोद के सोनगीर गांव में विकसित की जा रही 'स्वास्तिक ग्रांड' कॉलोनी को कथित तौर पर सीलिंग की जमीन पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विकास मंजूरी दिलाई गई। जांच के बाद जिला प्रशासन ने कॉलोनी की विकास मंजूरी निरस्त कर दी है।
बीजेपी नेता के करीबी का बताया जा रहा प्रोजेक्ट
यह प्रोजेक्ट बीजेपी नेता और राऊ के पूर्व विधायक जीतू जिराती के करीबी बताए जाने वाले पूर्व पार्षद पति नीलेश चौधरी और उनके परिवार से जुड़ा बताया जा रहा है। प्रोजेक्ट को 8 जनवरी 2025 को विकास मंजूरी और जून 2025 में रेरा की मंजूरी मिली थी।
ऐसे हुआ खुलासा
जानकारी के अनुसार, सोनगीर गांव की करीब 17 हेक्टेयर जमीन पर कॉलोनी विकसित करने का प्रस्ताव दिया गया था। जमीन बाबूलाल चौधरी, दिनेश चौधरी, सुनील चौधरी समेत परिवार के अन्य सदस्यों के नाम दर्ज थी। प्रोजेक्ट में शरद गुप्ता को डेवलपर बनाया गया था।
कॉलोनी सेल ने विकास अनुमति जारी कर दी
विकास मंजूरी के लिए वर्ष 2009-10 का एक आदेश प्रस्तुत किया गया, जिसमें दावा किया गया कि संबंधित भूमि सीलिंग से मुक्त होकर निजी रिकॉर्ड में दर्ज हो चुकी है। इसी आधार पर कॉलोनी सेल ने विकास अनुमति जारी कर दी।
दूसरे बिल्डर की आपत्ति के बाद शुरू हुई जांच
इसी क्षेत्र में अपना प्रोजेक्ट लाने वाले बिल्डर मेहुल मेहता पिता नवीन मेहता ने विकास मंजूरी की प्रक्रिया के दौरान संबंधित सीलिंग मुक्त आदेश की प्रति मांगी। जब आदेश उपलब्ध नहीं हुआ तो उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उसी आदेश के आधार पर स्वास्तिक ग्रांड को मंजूरी मिली है तो उन्हें भी मंजूरी दी जाए। मामला कलेक्टर शिवम वर्मा तक पहुंचा, जिन्होंने फाइल दोबारा खुलवाकर जांच के निर्देश दिए।
जांच में नहीं मिला आदेश
एसडीएम स्तर पर हुई जांच में सामने आया कि जिस आदेश के आधार पर जमीन को सीलिंग मुक्त बताया गया था, उसका रिकॉर्ड उपलब्ध ही नहीं है। बताया गया कि प्रकरण क्रमांक 0009/बी-121/2010-11 में 8 दिसंबर 2010 का आदेश होने का दावा किया गया था, लेकिन रजिस्टर में केवल आदेश क्रमांक दर्ज मिला, वास्तविक आदेश नहीं मिला।
बिल्डर पक्ष से भी आदेश की प्रति मांगी गई, लेकिन वह उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। जांच में यह भी सामने आया कि मामला राजस्व बोर्ड तक गया था, जहां से एसडीएम को सुनवाई के लिए भेजा गया था, लेकिन अंतिम आदेश का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
विकास मंजूरी निरस्त
जांच रिपोर्ट और संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर देने के बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने विकास मंजूरी रद्द करने के निर्देश दिए। इसके बाद अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य ने आधिकारिक रूप से स्वास्तिक ग्रांड की विकास मंजूरी निरस्त कर दी।
टीएंडसीपी के रिटायर्ड अधिकारी का नाम भी चर्चा में
पूरे मामले में नगर एवं ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) के पूर्व सहायक संचालक दर्शन लाल (डीएल) गोयल का नाम भी सामने आया है। उनकी पत्नी मनोरमा गोयल डेवलपर्स कंपनी में 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी साझेदार बताई जा रही हैं। कंपनी में शरद गुप्ता, दीपक टेगे और रौनक अग्रवाल की भी हिस्सेदारी है। ये दस्तावेज रेरा और विकास मंजूरी की फाइलों में लगाए गए बताए जा रहे हैं।
रेरा मंजूरी के बाद बिक चुके हैं सैकड़ों प्लॉट
कॉलोनी में 1,000 से 3,000 वर्गफीट तक के कुल 271 प्लॉट हैं। जून 2025 में रेरा मंजूरी मिलने के बाद करोड़ों रुपये के प्लॉट की बुकिंग और बिक्री होने का दावा किया जा रहा है। अब विकास मंजूरी निरस्त होने के बाद प्लॉट खरीदने वाले लोग असमंजस में हैं। आरोप है कि मामले की जानकारी के बावजूद प्रोजेक्ट में खरीद-बिक्री जारी है। ऐसे में रेरा मंजूरी रद्द कराने और प्लॉट की बिक्री पर रोक लगाने की मांग भी उठ रही है।
एफआईआर की मांग
मामले में आरोप लगाया जा रहा है कि कॉलोनी सेल के साथ कथित धोखाधड़ी कर फर्जी आदेश के आधार पर विकास मंजूरी हासिल की गई। इसी आधार पर नीलेश चौधरी, उनके परिवार, डेवलपर शरद गुप्ता तथा कंपनी के अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की जा रही है। साथ ही वर्ष 2010-11 में राजस्व रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों और संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच की मांग उठी है।
क्या बोले अधिकारी और नीलेश चौधरी
अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य ने विकास मंजूरी निरस्त किए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि जांच के बाद यह निर्णय लिया गया है। वहीं नीलेश चौधरी ने कहा कि वह बाहर थे और उन्हें पूरे मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि विकास मंजूरी निरस्त हुई है तो वह जानकारी लेकर अपनी प्रतिक्रिया देंगे।
जानिए कौन हैं नीलेश चौधरी?
नीलेश चौधरी राऊ क्षेत्र में बीजेपी के नेता हैं और पूर्व विधायक जीतू जिराती के करीबी माने जाते हैं। उनकी पत्नी द्रोपदी वैशाली नगर वार्ड से पार्षद रह चुकी हैं।
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