सर्वदलीय बैठक: 40 दल हुए शामिल; विपक्ष का वॉकआउट, रिजिजू बोले- सदन सुचारु चलाना सबकी जिम्मेदारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
संसद के मानसून सत्र से एक दिन पहले रविवार को संसद भवन एनेक्सी में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई।
करीब तीन घंटे चली इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), डीएमके समेत 40 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
हालांकि बैठक के दौरान विपक्षी दलों ने टीएमसी के बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने का विरोध करते हुए सांकेतिक वॉकआउट कर दिया।
रिजिजू बोले- सभी दलों ने रखी अपनी बात
बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सभी दलों के साथ सकारात्मक चर्चा हुई और सभी ने अपने-अपने मुद्दे रखे।
उन्होंने कहा, "संसद को बिना किसी व्यवधान के चलाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकार सभी दलों के साथ संवाद के लिए तैयार है।"
20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान लोकसभा और राज्यसभा की कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं।
सत्र के पहले दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में 'वंदे मातरम्' से संबंधित एक विधेयक पेश करेंगे।
टीएमसी के बागी सांसदों को बुलाने पर विवाद
बैठक के दौरान विपक्ष ने टीएमसी के बागी सांसदों के एक गुट को आमंत्रित किए जाने पर कड़ा विरोध जताया।
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वामपंथी दलों और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) सहित पूरे विपक्ष ने इसी मुद्दे पर बैठक का बहिष्कार किया।
महुआ ने उठाए सवाल
महुआ मोइत्रा ने कहा कि संसद के रिकॉर्ड में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 28 सांसद दर्ज हैं, जबकि 20 बागी सांसदों के अलग गुट को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से मान्यता नहीं मिली है। उनके खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाएं भी लंबित हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि 91वें संविधान संशोधन के बाद अलग गुट की व्यवस्था न होने के बावजूद उन सांसदों को सर्वदलीय बैठक में किस आधार पर आमंत्रित किया गया।
सत्र के दौरान कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा
मानसून सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है। वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, किसानों के मुद्दे और अन्य राष्ट्रीय विषयों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में आगामी सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना जताई जा रही है।
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