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संकट कटै मिटै सब पीरा: अंजनी के लाल; अतुलित बलधाम भगवान हनुमानजी का ब्रह्ममहूर्त में हुआ प्राकट्य

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संवाददाता

02 अप्रैल 2026, 1:15 pm
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संकट कटै मिटै सब पीरा

अहिल्या नगरी में हनुमान भक्ति की बही रसधारा, अलसुबह से मंदिरों में लगा भक्तों का तांता

बल, बुद्धि, विद्या के दाता पवनपुत्र की आराधना में निमग्न हुए भक्त

कहीं स्वर्ण, कहीं रजत चोले से शृंगारित हुए रामभक्त हनुमान, फूल बंगले में भी विराजे अंजनी सुत

बड़े भंडारों सहित हजारों स्थानों पर आज महाप्रसादी के आयोजन

रणजीत हनुमान, वीर बगीची, वनखंडी, पंचमुखी हनुमान मंदिर में विशेष शृंगार, उत्सव

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट…इंदौर

वीर बगीची में श्री श्री पवनानंदजी महाराज आरती करते हुए।

चै त्र मास की पूर्णिमा आई और समस्त त्रिभुवन में यश-आनंद-कीर्ति फैल गई। सुर, मुनि, देव, गंधर्व हर्षित हो उठे। आसमान से पुष्पवृष्टि होने लगी। सकल सृष्टि हर्षित हो उठी। माता अंजनी की गोद में किलक उठे अंजनी के लाल, पितृ चरण भगवान पवन के बाल... पवनपुत्र हनुमंतलाल।

अष्ट सिद्धि जिनके पास है और जो नौ निधि के प्रदाता हैं, ऐसे हनुमानजी महाराज के श्रीचरणों में बारंबार प्रणाम। राम नाम का रसायन जिनके पास, जो शिव के 11वें रुद्रावतार हैं। जिनकी लाल देह पर सदैव लालिमा बसी रहे।

जिनकी देह वज्र के समान, जो सदैव दानव का दलन करने वाले हैं। जो ज्ञान के, गुण के सागर हैं। जो अतुलित बल के धाम हैं। ऐसे अंजनी सुत को कोटि दंडवत प्रणाम।

जो कुमति को निवार देते हैं और सुमति देते हैं। जिनका तन कंचन के समान है। जो सदा सुवेश में रहते हैं। जिनके कर्ण में सदैव कुंडल विराजते हैं और केश गुंथे हुए रहते हैं। जिनके एक हाथ में वज्र, दूजे में ध्वजा विराजती है।

जिनसे त्रिभुवन, यानी तीनों लोक हांकते भी, कांपते भी हैं। जिनके सुमिरन मात्र से भूत-पिशाच निकट नहीं आते। जिनका नाम लेते ही सब संकट कट जाए, सब पीड़ा दूर हो जाए... ऐसे रुद्रावतार को बारंबार प्रणाम।

हनुमंत आराधना में निमग्न हुई अहिल्या नगरी... अहिल्या नगरी इंदौर आज हनुमंत आराधना में पूरी तरह निमग्न है। अंजनी के लाल भगवान हनुमानजी का चहुंओर गुणगान गूंज रहा है। ब्रह्ममुहूर्त से हनुमानजी लला का जयघोष गुंजायमान हो रहा है। कांकड़ा आरती के साथ हनुमान जन्मोत्सव का उत्सव उल्लास के साथ शुरू हो गया।

हनुमानजी की भक्ति की रसधारा में भक्त डूबे हुए हैं। अलसुबह से भक्तों का तांता मंदिरों में लग गया। पवनपुत्र का नयनाभिराम शृंगार बड़ा ही मनोहारी है। कहीं वे स्वर्ण चोले में विराजमान हुए तो कहीं रजत के चोले में दमक रहे हैं। सिंदूर, तेल, वरक के साथ शृंगार भी भक्तों को लुभा रहा है। रणजीत हनुमान, वीर बगीची, वनखंडी, पंचकुइया आश्रम, हरि पर्वत, हंसदास मठ, वीर गढ़ी, सिद्धेश्वर, रोकड़िया हनुमानजी, सुभाष चौक, पंचमुखी हनुमानजी मंदिर जैसे सभी बड़े देवालयों में उत्सव की छटा देखते ही बन रही है। बड़े भंडारों के साथ-साथ आज हजारों स्थानों पर महाप्रसादी के आयोजन भी होंगे। हनुमानजी का जन्मोत्सव ब्रह्ममुहूर्त से लेकर रात तक मनाया जाएगा। इसका नजारा इंदौर के चप्पे-चप्पे पर नजर आ रहा है।

वीर अलीजा सरकार का आज अद्‌भुत अलौकिक स्वर्ण शृंगार हुआ
मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के अनन्य भक्त। निष्काम भक्ति के पर्याय। बल, बुद्धि, विद्या के दाता। भय से अभय करने वाले हनुमानजी लला। दुष्टों का संहार करने वाले, दुर्जनों को दंड देने वाले महावीर। हर संकट से मुक्ति देने वाले। हर पीड़ा को पार करने वाले। हर रोग का नाश करने वाले। हर मनोरथ को पूरन करने वाले। बस, जपते रहो उस हनुमंतवीरा को, जो कलियुग के देवता हैं।

जो सदा रघुनाथजी के दास है। जो मंगलमूर्ति रूप हैं। जो राम-लखन-जानकी के हृदय में विराजते हैं। जो सकल गुण निधान हैं। जो वानराणामधीशं हैं। ऐसे पवनपुत्र परमेश्वर सदैव मेरे हृदय में वास करें, जिनके सुमिरन मात्र से भय दूर। तभी तो जन-जन का जयघोष है- संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बलबीरा। हनुमानजी सरकार रक्षक हैं, तो फिर काहू को डरना।

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