AI इम्पैक्ट समिट 2026: क्या हमने अवसर को आपदा में बदल दिया
KHULASA FIRST
संवाददाता

आलोक बाजपेयी स्वतंत्र पत्रकार खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भारत की मेजबानी में एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन 16 से 20 फरवरी तक दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ जो कि वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) बहस में एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित हुआ। यह पहला ऐसा वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन था जो ग्लोबल साउथ में आयोजित किया गया, जिसमें 100 से अधिक देशों के नेता, टेक दिग्गजों के सीईओ, शोधकर्ता और स्टार्टअप्स शामिल हुए।
एआई इम्पैक्ट समिट की श्रृंखला की शुरुआत 2023 में ब्रिटेन के ब्लेचली पार्क से हुई, जहां एआई सुरक्षा पर फोकस था। उसके बाद दक्षिण कोरिया और फ्रांस में समिट्स हुए, जो समावेशिता, शासन और नवाचार पर केंद्रित थे। 2026 का भारत द्वारा होस्ट विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने का प्रयास था।
भारत, दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजार के साथ, एआई को स्केल पर तैनात करने का मॉडल पेश कर रहा है। स्पष्ट रूप से यह एक बड़ा अवसर था जो कि वैश्विक स्तर पर AI के क्षेत्र में भारत की स्थिति बेहद मजबूत करने की क्षमता रखता था।
लेकिन समिट के दौरान बदइंतजामी, गलगोटियास यूनिवर्सिटी के विवाद, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा कथित रूप से ‘जबरन हाथ उठवाने’ जैसी घटनाओं ने समिट का नकारात्मक कारणों से भी अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचा। प्रश्न यह है कि क्या इनसे देश की छवि वैश्विक पटल पर सुधरने की बजाय और बिगड़ गई है?
इसका आकलन तथ्यों, मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के विचारों के आधार पर करें तो लगता है कि कुप्रबंधन और प्रदर्शन के अति उत्साह में एक अद्भुद अवसर को आपदा में तो नहीं बदला गया लेकिन उसका वैसा उपयोग भी नहीं कर पाए जितनी गुंजाइश थी. समिट के समग्र प्रभाव को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता लेकिन कुछ घटनाओं का लंबे समय में छवि पर असर पड़ सकता है, जो कि थोड़ी सी सावधानी से और समझदारी से टाली जा सकती थी. देश के नजरिये से अवसर का पूरा उपयोग न हो पाना दुखद है खासकर जब भारत AI में ग्लोबल साउथ के लीडर के रूप में उभरना चाहता है।
समिट में प्रमुख विवाद और प्रबंधन की चूकें - समिट की शुरुआत से ही आयोजन में कई कमियां सामने आईं, जिन्होंने इसे ‘काओटिक’ (अव्यवस्थित) करार दिया। मुख्य मुद्दे इस प्रकार हैं:
क्राउड मिसमैनेजमेंट और लॉजिस्टिकल फेलियर: समिट में लंबी कतारें, भीड़ का गलत प्रबंधन, और प्रधानमंत्री मोदी की विजिट से आयोजन स्थल को खाली कराना, एक्ज़िबिटर्स को अचानक निकालना जैसी घटनाएं हुईं। हाई सिक्योरिटी वाले ज़ोन में एक्ज़िबिटर्स द्वारा चोरी की शिकायतें की गईं तो कहीं लैपटॉप-कैमरा बैन जैसी समस्याएं भी उभरीं।
डिजिटल पेमेंट सिस्टम फेल हो गया, जिससे कैश-ओनली ऑपरेशन चलाना पड़ा। समिट के दौरान आम डेलीगेट्स के लिए शटल सर्विस का इंतज़ाम ना होने और सुरक्षा कारणों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट बैन करने से दूर तक पैदल चलने को मजबूर होना पड़ा. मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या से डेमो प्रभावित हुए. समिट के दौरान वीआईपी मूवमेंट के कारण लोगों को होने वाली असुविधा की भी खबरें आईं।
प्रदर्शनी हॉल को जनता के लिए अचानक बंद करने से भी कुछ कंपनियों ने नाराजगी जताई। इन सबसे समिट की प्रोफेशनल इमेज को प्रभावित हुई.
ट्रैफिक जाम : मेट्रो एक्सेस की कमी और ट्रैफिक जाम से कई डेलिगेट्स फंस गए। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री श्री ऋषि सुनक ने ट्रैफिक जैम में फँसने के बाद तंज़ कसा कि AI सब कुछ कर सकती है, दिल्ली का यातायात नहीं सुधार सकती । इनसे सोशल मीडिया पर आलोचना हुई, और विपक्षी नेताओं ने समिट को ‘पीआर स्पेक्टेकल’ बताया।
गलगोटियास यूनिवर्सिटी का रोबोडॉग विवाद: गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने समिट में एक रोबोटिक डॉग ‘ओरियन’ को अपने इन-हाउस डेवलपमेंट के रूप में पेश किया, लेकिन यह चाइनीज कंपनी यूनिट्री का Go2 मॉडल निकला। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यूनिवर्सिटी को स्टॉल खाली करने को कहा गया।
यूनिवर्सिटी ने माफी मांगी और कहा कि यह ‘गलत जानकारी’ थी. श्री राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने इसे मोदी सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ की विफलता बताया। ग्लोबल मीडिया ख़ासकर चीन के मीडिया ने इस घटना को हाईलाईट किया और इससे देश की छवि वैश्विक स्तर पर हास्यास्पद बनी। यह घटना ‘फेक इनोवेशन’ का प्रतीक बन गई, और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत की AI क्षमताओं पर सवाल उठे।
मोदी द्वारा ‘जबरन हाथ उठवाने’ का मुद्दा: टेक महारथियों के बीच ‘असहज’ पल उस वक़्त आये जब समापन के दौरान एक फोटो अवसर पर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ओपन एआई के सीईओ श्री सैमुअल हैरिस ऑल्टमैन और एन्थ्रोपिक के सह-संस्थापक और सीईओ श्री डारियो अमोदेई हैं को हाथ पकड़कर ऊपर उठाने का संकेत दिया।
वीडियो में देखा गया कि वैश्विक टेक दिग्गजों, जो व्यावसायिक प्रतिद्वंद्वी हैं, ने एक-दूसरे का हाथ पकड़ने के बजाय मुट्ठी बंद कर हाथ ऊपर उठाए, जिसे कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और विपक्षी नेताओं ने ‘असहज’ (awkward) क्षण बताया। श्री नरेंद्र मोदी ने AI के जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया और एक गिनीज वर्ल्ड रेकॉर्ड के लिए 250,000 से अधिक लोगों से ‘रिस्पॉन्सिबल AI प्लेज’ लिया, जिसमें हाथ उठाकर प्रतिज्ञा कराई गई।
कुछ रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स में इसे ‘जबरन’ बताया गया, खासकर क्योंकि यह सामूहिक एक्टिविटी थी और कुछ डेलिगेट्स ने इसे प्रेशराइज्ड महसूस किया। हालांकि, यह सीधे जबरन नहीं था, बल्कि एक इवेंट का हिस्सा था। विपक्ष ने इसे ‘शोबाजी’ करार दिया।
बिल गेट्स की उपस्थिति पर भ्रम : माइक्रोसॉफ्ट प्रमुख की अटेंडेंस कंफ्यूजन को के एपस्टीन कनेक्शन से जोड़ा गया और इससे विवाद बढ़ा।
भारत को हुए लाभ: आर्थिक और रणनीतिक उन्नति : एक ओर जहां यह समिट भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने और आर्थिक अवसरों को बढ़ाने का माध्यम बना, वहीं दूसरी ओर नौकरियों के नुकसान, बुनियादी ढांचे पर दबाव और कार्यान्वयन की चुनौतियां जैसे मुद्दे भी उभरे।
समिट ने भारत को कई मोर्चों पर लाभ पहुंचाया, जो लंबे समय तक अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्थिति को प्रभावित करेंगे। सबसे प्रमुख लाभ निवेश और आर्थिक विकास का है। समिट से $200 बिलियन से अधिक के निवेश की संभावना जताई गई, जिसमें से $90 बिलियन पहले से ही प्रतिबद्धताएं प्राप्त हो चुकी हैं।
भारत एआई मिशन के तहत कंप्यूट संसाधनों, डेटा सेंटरों और रिन्यूएबल एनर्जी समर्थित इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश कर रहा है, जो स्टार्टअप्स और उद्योगों को बढ़ावा देगा। उदाहरण के लिए, अमेजन, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट ने 2030 तक $67.5 बिलियन का निवेश प्रतिबद्ध किया है। दूसरा, वैश्विक स्थिति में मजबूती।
भारत को ग्लोबल साउथ और उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के बीच ब्रिज के रूप में पोज़ीशन किया गया, जो एआई गवर्नेंस में विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इसे “मानव-केंद्रित प्रगति” और “समावेशी विकास” के लिए एक मंच बताया, जहां एआई को सतत विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में उपयोग करने पर जोर दिया गया।
समिट ने एआई को समावेशी विकास के लिए उपयोग करने पर जोर दिया, जैसे जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य और शिक्षा में। समिट में एआई-आधारित उत्पादों पर चर्चा हुई। भारत के डेटा, जो एआई का ‘पेट्रोल’ है, और 700 मिलियन चैटजीपीटी यूजर्स का लाभ उठाकर, एआई को लोकलाइज्ड बनाने की दिशा में कदम उठाने पर चर्चा हुई।
92% भारतीय कार्यकर्ता एआई टूल्स का उपयोग करते हैं, जो अमेरिका के 64% से अधिक है, जो उत्पादकता बढ़ाने का संकेत है। समिट ने एआई को सस्टेनेबल ग्रोथ के लिए उपयोग करने पर फोकस किया, जैसे कृषि और वित्तीय समावेशन में। यह भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को एआई के साथ एकीकृत करने का अवसर प्रदान करता है।
इन विवादों के बावजूद, समिट में गूगल के श्री सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया जैसे बड़े वैश्विक नामों की उपस्थिति को भारत की बढ़ती डिजिटल शक्ति के रूप में देखा गया। सुंदर पिचाई और सैम ऑल्टमैन ने भारत को AI अपनाने में एक वैश्विक लीडर और अपने लिए महत्वपूर्ण बाजार बताया।
भारत को हुई हानियां: चुनौतियां और जोखिम : समिट के बावजूद, कई क्षेत्रों में नुकसान या चुनौतियां उभरीं, जो भारत की एआई यात्रा को जटिल बनाती हैं। सबसे बड़ी चिंता नौकरियों का नुकसान है। एआई क्रांति आईटी और सर्विस सेक्टर को प्रभावित कर सकती है, लाखों हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की नौकरियां खतरे में हैं।
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