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बड़वाह-धामनोद फोरलेन के खिलाफ आंदोलन तेज: बाबा साहब के अनुयायी मांग रहे 'मोहन सरकार' से अधिकार

KHULASA FIRST

संवाददाता

14 अप्रैल 2026, 1:43 pm
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बड़वाह-धामनोद फोरलेन के खिलाफ आंदोलन तेज

खेती-किसानी से बेदखल किए जा रहे किसानों ने रोका सर्वे कार्य

डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पूर्वी व पश्चिमी रिंग रोड, इंदौर-उज्जैन, उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाई-वे और सिंहस्थ के लिए भूमि अधिग्रहण की तरह अब बड़वाह-धामनोद स्टेट हाई-वे के खिलाफ निमाड़ के युवा किसानों का आंदोलन जोर पकड़ रहा है। कल एमपीआरडीसी के अधिकारियों ने जबरिया सर्वे की कोशिश की, जिसे आंदोलनरत किसानों ने विफल कर दिया।

प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कौड़ियों के दाम पर भू-अधिग्रहण के खिलाफ प्रभावित ग्रामीण किसान- मजदूर संघर्ष कर रहे हैं। अंग्रेजों की तर्ज पर आज भी नौकरशाह मनमाने तरीके से, दलित हो या जनजातीय समाज या फिर कमजोर वर्ग के छोटे-बड़े किसान, सबके अधिकारों का खुलकर दमन कर रहे हैं।

भू-अधिग्रहण के खिलाफ कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम कई ज्ञापन दिए हैं लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उनके अधिकारों का हनन कर एमपीआरडीसी सुनियोजित तरीके से प्रभावित गांवों में सर्वे की कोशिश क रहा है। कल जब सर्वे टीम बडवी गांव पहुंची तो किसानों ने शांतिपूर्वक जमकर विरोध दर्ज किया। टीम का विरोध अन्य गांवों में भी हुआ।

दलित-किसान-मजदूर वर्ग की आवाज नहीं सुन रही सरकार... पीड़ितों का कहना है यह सब तब हो रहा है, जब राजनेता वोट बैंक की खातिर डॉ. अंबेडकर नगर महू में बाबा साहब का सालाना औपचारिक स्मरण कर रहे हैं।

सरकार दलित राजनीतिक इवेंट में मशगूल है दूसरी ओर महू के समीप ही दलित वर्ग के लिए आरक्षित महेश्वर विधानसभा क्षेत्र में किसान भू-अधिग्रहण के खिलाफ अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

इस इलाके में दलित और जनजातीय वर्ग बड़ी संख्या में खेती-किसानी पर आश्रित है। सभी वर्गों के किसान और मजदूर आंदोलन कर रहे हैं। इसके बावजूद खेती किसानी की सनातन संस्कृति और कृषि रोजगार पर आश्रित दलित जनजातीय, पिछड़े, अगड़े और कमजोर वर्ग की आवाज सरकार को सुनाई नहीं दे रही।

विडंबना है सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, आवाज सुनाई तो दे रही है लेकिन सुनना नहीं चाहते। यह आवाज है नर्मदा किनारे की उर्वरा बहूफसली सिंचित और सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरण समृद्ध सनातन खेती-किसानी कर रहे किसानों और इन पर आश्रित हजारों जनजातीय दलित, कमजोर वर्ग के श्रमिकों की।

नर्मदा तीर से उठी आवाज
किसानों का कहना है धामनोद-बड़वाह फोरलेन के लिए कौड़ियों के दाम पर जमीन अधिग्रहित की जा रही है। इसके विरोध में आवाज हुंकार में बदल गई है। राजस्व विभाग और मप्र सड़क विकास निगम के अफसरों ने अंग्रेजों की तरह किसान वर्ग और श्रमिकों को पूरी तरह नजरअंदाज कर भू-अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की है।

कई मायनो में कानून-कायदों के उल्लंघन के साथ की जा रही है। मुआवजा अंग्रेजों के जमाने के कानून और भाव से दिया जा रहा है। पैतृक उर्वर कृषि भूमि से बेदखल किए जा रहे भूमि स्वामी छोटे किसान बड़ी संख्या में हैं।

वे सरकार से लगातार मांग कर रहे हैं अधिग्रहित भूमि का मुआवजा बाजार मूल्य के आधार पर भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार चार गुना दिया जाए।

सरकार को यह मंजूर नहीं है। वह बलपूर्वक अधिग्रहण कर रही है। किसान शांतिपूर्ण तरीके से सर्वे करने आ रहे लोगों को खेतों में प्रवेश नहीं करने दे रहे हैं।

जेल जाने को तैयार... कल ऐसे कुछ गांवों में जब टीम पहुंची तो किसानों ने सर्व नहीं करने दिया। उन्हें बताया कलेक्टर, एसडीएम और मुख्यमंत्री तक मांगों को लेकर कई ज्ञापन दे चुके हैं और आंदोलन भी कर रहे हैं लेकिन सरकार और उसके अफसरों ने प्रभावित किसानों का दु:ख-दर्द जानने की कोशिश नहीं की।

प्रभावितों ने साफ-साफ कहा जब तक चार गुना मुआवजा और अन्य महत्वपूर्ण मांग नहीं मानी जाती, सर्वे या किसी भी तरह भू-अधिग्रहण नहीं होने दिया जाएगा चाहे, जेल क्यों न जाना पड़े।

ग्राम बड़वी के प्रभावितों ने बताया सोमवार को टीम सर्वे करने आई थी। हमने नहीं होने दिया। उन्होंने अपील की अन्य ग्रामीण भी अपने।अपने खेतों का सर्वे न होने दें। सर्वे स्टैंड मशीन से करते हैं और मोबाइल से ऑनलाइन डाटा अपलोड करते हैं।

इसलिए इस मशीन को न चलने दें। कुछ किसान भाई सर्वे कार्य रोकने के साथ सर्वे के आदेश की कॉपी मांग रहे थे लेकिन सरकारी अमले को कह दिया गया है कि आप हमारे खेत में बिना हमारी अनुमति के घुस नहीं सकते हैं चाहे आपके पास आदेश हो।

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