खबर
Top News

विज्ञापन एजेंसियों की दादागीरी बिना अनुमति ठोंक देती हैं बोर्ड: निगम को नहीं दिया जाता निर्धारित शुल्क

KHULASA FIRST

संवाददाता

05 अप्रैल 2026, 4:47 pm
177 views
शेयर करें:
विज्ञापन एजेंसियों की दादागीरी बिना अनुमति ठोंक देती हैं बोर्ड

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
हाल ही में एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर द्वारा विजय नगर से रेडिसन के बीच मेट्रो ट्रेन के पिलर के बीच बनी क्यारियों में लगाए गए विज्ञापन बोर्ड का घोटाला पकडऩे के बाद साफ हो गया कि शहर में विज्ञापन एजेंसियों की दादागीरी जारी है। ये एजेंसियां चाहे जहां अपने विज्ञापन बोर्ड ठोंक देती है जिसकी कोई अनुमति नहीं ली जाती और निर्धारित शुल्क निगम को नहीं दिया जाता।

इसमें कोई दो राय नहीं कि विज्ञापन एजेंसियों का ये भ्रष्टाचार नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। मामले में राठौर द्वारा महापौर को लिखे गए पत्र के बाद कल मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी भरी बैठक में कहा कि ये गलत बात है। इस तरह नहीं होना चाहिए।

विज्ञापन एजेंसी बिना शुल्क चुकाए कैसे यूनिपोल, विज्ञापन बोर्ड लगा सकती हैं। लेकिन एजेंसियों ने तो इंदौर को अपना चारागाह बना लिया है। वो स्थान पर निगाहें गड़ाने के बाद नगर निगम, स्मार्ट सिटी या एआईसीटीएसएल से अनुमति (कई बार नहीं)

जारी करवा लेते हैं जबकि इसका राजस्व सिर्फ और सिर्फ नगर निगम को ही मिलना चाहिए। शहर को सौंदर्यीकृत और विकसित करने के लिए दिनरात मशक्कत करने वाले नेताओं के कार्यों पर ये एजेंसिंयां पलीता लगा रही हैं।

इनके लिए शहर का ट्रैफिक या सुंदरता कोई मायने नहीं रखती बल्कि उन्हें अपनी जेब भरने से मतलब है। एक बार पूर्व में नगर निगम ने पूरे शहर को होॢडंग्स-फ्लैक्स आदि से मुक्त करवा लिया था, लेकिन बाद में फिर ये विज्ञापन एजेंसियां सामने आ गईं और अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके अपने बोर्ड-यूनिपोल ठोंक दिए।

हद तो ये है कि स्थान का चयन भी ये एजेंसियां खुद कर लेती हैं और कहां से सेटिंग करना है, ये भी तय करके अपनी कारगुजारी को अंजाम दे देती है। ये कहना गलत नहीं होगा कि निगम के अधिकारियों ने शहर में इन एजेंसियों को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसी जगहों पर भी बस स्टॉप बना दिए जहां सिटी बसें आती-जाती नहीं।

कई चौराहों पर तो टर्निंग पर ही बस स्टॉप बना दिए गए ताकि इन एजेंसियों को लाभ मिले और निगम को राजस्व की हानि हो। सवाल है कि जब नगर निगम में चुनी हुई परिषद है, स्मार्ट सिटी में बोर्ड है जिसके कलेक्टर अध्यक्ष हैं, एआईसीटीएसएल का भी अपना एक बोर्ड है।

इसके बावजूद भी इन एड एजेंसियों को इतनी आसानी से बेतरतीब तरीके से होल्डिंग यूनिपोल फ्लेक्स लॉलीपॉप लगाने की अनुमति कैसे मिल जाती है?

निगम अधिकारियों का गठजोड़ बेनकाब करेंगे राठौर

हाल ही में इस मामले को प्रमुखता से उठाने वाले एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने बताया कि उन्होंने ये मामला पकड़ा और इसके लिए सोमवार को महापौर, निगमायुक्त, ईओडब्लयू, मंत्री, कलेक्टर समेत हर अथॉरिटी को पत्र लिखेंगे और जांच की मांग करेंगे।

विज्ञापन बोर्ड लगाने की अनुमति देने और शुल्क लेने का अधिकार केवल नगर िनगम को ही है, स्मार्ट सिटी या एआईसीटीएसएल ये काम नहीं कर सकती। शहर में होने वाले आयोजनों का टैक्स भी निगम ही वसूल सकती है। जिस विज्ञापन एजेंसी ने ये बोर्ड लगाए थे उसे 2019 में 5 साल का टैंडर दिया गया था।

2024 में टैंडर खत्म होने के बाद नए टैंडर जारी किए जाने थे लेकिन अधिकारियों ने कोराना काल का हवाला देकर एजेंसी को बख्श दिया। सवाल ये है कि क्या एजेंसी ने किसी और को कोरोना की रााहत दी?

खुद नगर निगम ने ही जनता को क्या राहत दी? जनता से तो कोरोना काल के दौरान भी पूरा टैक्स वसूला। फिर विज्ञापन एजेंसी को किस बात की मोहलत दी गई? वैसे भी ये टैंडर तीन साल के लिए होना थे।

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!