गालीबाज पुलिस अधीक्षक ने फिर उगला जुबानी जहर: खाकी वर्दी पर बेशर्मी के छींटे
KHULASA FIRST
संवाददाता
एक के बाद एक आरोप, पहले एसआई, अब ड्राइवर बना निशाना, सिस्टम की चुप्पी पर उठे सवाल
वायरल ऑडियो ने खोली पुलिस महकमे की कड़वी सच्चाई
खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
भोपाल के देहात एसपी रामशरण प्रजापति एक बार फिर विवादों के दलदल में फंसते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला उस ऑडियो से जुड़ा है, जिसने महकमे की अंदरूनी हकीकत को सरेआम कर दिया। वायरल ऑडियो में एसपी अपने पुलिस विभाग के ड्राइवर संजीव चौधरी पर अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करते सुनाई दे रहे हैं।
इससे पहले पिछले साल यही एसपी एक एसआई को गालियां दे चुके हैं, जिससे आहत होकर जान देने का मन बना चुके एसआई ने डीजीपी को शिकायत कर इसे ही सुसाइड नोट बताया था। ये दोनों घटनाएं सिर्फ एक अफसर के व्यवहार पर सवाल नहीं उठातीं, बल्कि पूरी पुलिस व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर आरोप खड़े करती है।
जानकारी के अनुसार ताजा मामला तब सामने आया, जब लगातार 24 घंटे की ड्यूटी से जूझ रहे ड्राइवर संजीव चौधरी ने दो दिन की छुट्टी मांगी। आरोप है कि छुट्टी देने के बजाय भोपाल के देहात एसपी रामशरण प्रजापति ने उसे फटकार लगाई। जब वह एक दिन देरी से ड्यूटी पर पहुंचा तो उसकी गैरहाजिरी दर्ज करा दी। हद तो तब हो गई, जब संजीव ने अधिकारियों के कहने पर एसपी को फोन लगाया। दूसरी तरफ से उसे राहत नहीं, बल्कि गालियों की बौछार मिली।
सूत्रों के मुताबिक एसपी बंगले पर तैनात तीन ड्राइवरों में से एक को पहले ही हटा दिया गया था, जबकि दूसरे ड्राइवर चंद्रभान धाकड़ एक हादसे के बाद हाथ में फ्रैक्चर होने के चलते मेडिकल पर हैं। ऐसे में पूरा बोझ अकेले संजीव पर डाल दिया गया।
वह तीनों की ड्यूटी अकेले करने को मजबूर था। आखिरकार लगातार काम और दबाव के बीच उसने दो दिन की छुट्टी मांगी, जो उसे भारी पड़ गई।
...तब एसआई बने थे एसपी का शिकार- यह पहला मौका नहीं है, जब एसपी रामशरण प्रजापति पर इस तरह के आरोप लगे हों। इससे पहले थाना सूखी सेवनिया (देहात, भोपाल) के एसआई केसी यादव ने भी उन पर गाली-गलौज, प्रताड़ना और मारने तक दौड़ने तक के गंभीर आरोप लगाते हुए सीएम, डीजीपी, आईजी और मानवाधिकार आयोग से शिकायत की थी।
शिकायत में लिखा था कि सितंबर 2025 में एसपी रामशरण प्रजापति ने अवैध शराब के एक अपराध की डायरी मंगाई थी। वे 20 सितंबर को एसपी के कहने पर उनकी टेबल पर केस डायरी छोड़कर चले गए थे। 24 सितंबर को एसपी प्रजापति ने मीटिंग बुलवाई थी। चूंकि इस बीच आरोपी जबलपुर हाई कोर्ट में जमानत याचिका लगा चुका था।
इसके चलते उन्होंने मीटिंग के बाद एसपी से उक्त डायरी वापस मांगी। एसपी ने इसे गुस्ताखी मानते हुए उन्हें सार्वजनिक रूप से गालियां दीं। यादव ने इस बदसलूकी से आहत होकर एसपी के व्यवहार की रोजनामचा रिपोर्ट डाली और आत्महत्या का मन बना लिया था। हालांकि स्टाफ की समझाइश और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उन्हें पीछे हटना पड़ा, लेकिन नतीजा अब तक सवालों के घेरे में है।
सवाल... जो जवाब मांगते हैं?
महकमे के भीतर आला अफसर द्वारा अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ किए गया उक्त व्यवहार न केवल अनुशासन को तार-तार करता है, बल्कि पुलिस विभाग की छवि को भी गहरा नुकसान पहुंचाता है। अब सवाल यह है कि क्या हर बार आरोपों के बाद भी कार्रवाई सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगी या इस बार जिम्मेदारी तय कर सख्त कदम उठाए जाएंगे। अगर वर्दी के भीतर ही सम्मान सुरक्षित नहीं, तो कानून व्यवस्था पर भरोसा आखिर कैसे कायम रहेगा?
संबंधित समाचार

पीठासीन अधिकारी की जान बचाने वाले जवान सम्मानित:चुनाव ड्यूटी के दौरान आया था हार्ट अटैक

भारतीय किसान संघ ने बिजली की आपूर्ति को लेकर की चर्चा:विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक से की भेंट

व्यापारियों का विवाद बना जानलेवा:मारपीट के बाद बुजुर्ग व्यापारी की मौत; मारे थे लात-घूंसे

लेंसकार्ट शोरूम पर प्रदर्शन करके कर्मचारियों को बिंदी-टीका लगाया:हिंदू कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!