खाकी वर्दी पर दाग: पुलिस हिरासत में मौत और सोना लूटकांड से हिला सिस्टम; सवालों के कटघरे में पुलिस की कार्यप्रणाली
KHULASA FIRST
संवाददाता
पुलिसकर्मियों का सीसीटीवी आया सामने
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कानून के रखवालों पर ही जब कानून तोड़ने के आरोप लगने लगें, तो ये सिर्फ घटनाएं नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के चरमराने का संकेत होती हैं। इंदौर में सामने आए दो ताजा मामलों ने पुलिस महकमे की साख पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है।
एक ओर भागीरथपुरा चौकी में चोरी के संदेही की फिनाइल पीने से मौत, तो दूसरी ओर वारंट की आड़ में घर में घुसकर सोना लूटने और ऑनलाइन वसूली के आरोप। इन दोनों घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि वर्दी के भीतर कुछ चेहरे कानून नहीं, बल्कि मनमानी चला रहे हैं।
भागीरथपुरा चौकी का मामला किसी भी संवेदनशील समाज को झकझोर देने वाला है। रामजी पिता रमेशचंद्र झा (45) निवासी शीतल नगर (कुशवाह नगर), जिसे बाइक चोरी के शक में पकड़ा गया था, पुलिस हिरासत में ही मौत के मुंह में चला गया।
पुलिस का दावा है कि उसने रविवार शाम करीब पांच बजे बाथरूम में जाकर फिनाइल पी ली, लेकिन यह कहानी जितनी सरल बताई जा रही है, उतनी है नहीं। उसे शनिवार को सिपाही योगेंद्र कौरव ने वाहन चोरी के शक में पकड़ा था। रामजी सीसीटीवी कैमरे और कंप्यूटर फिटिंग का काम करता था। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक व्यक्ति को बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के दो दिन तक चौकी में क्यों बैठाकर रखा गया?
गिरफ्तारी की एंट्री, सूचना और कानूनी प्रक्रिया कहां थी? जानकारी के मुताबिक, आरोपी को न सिर्फ चौकी में रखा गया, बल्कि उसे घर तक ले जाकर पूछताछ की गई, वह भी बिना वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के। यह सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह सिर्फ लापरवाही थी या फिर जानबूझकर नियमों को ताक पर रखा गया?
घटना के दिन भी हालात सामान्य नहीं थे। पुलिस का कहना है कि रामजी ने पानी पीने के बहाने बाथरूम में जाकर फिनाइल पी लिया। सवाल उठना लाजमी है कि पुलिस चौकी जैसे स्थान पर फिनाइल खुले में क्यों रखा था? क्या हिरासत में मौजूद व्यक्ति की निगरानी नहीं की जानी चाहिए थी? यह चूक नहीं, गंभीर लापरवाही है।
सबसे ज्यादा सवाल इलाज को लेकर उठ रहे हैं। परिजन पूछ रहे हैं कि जब चौकी के आसपास निजी अस्पताल मौजूद थे, तो रामजी को सात किलोमीटर दूर जिला अस्पताल क्यों ले जाया गया? क्या यह देरी उसकी मौत की वजह बनी? अगर समय पर इलाज मिलता, तो क्या उसकी जान बच सकती थी? ये सवाल अब जांच का विषय हैं।
घटना के बाद आनन-फानन में चौकी प्रभारी एसआई संजय धुर्वे और सिपाही योगेंद्र कौरव को निलंबित कर दिया गया है और न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं, लेकिन यह कार्रवाई अब एक तयशुदा पैटर्न बन चुकी है। हर घटना के बाद निलंबन, जांच और फिर धीरे-धीरे मामला ठंडा। इससे न तो पीड़ित परिवार को न्याय मिलता है और न ही सिस्टम में सुधार। डीसीपी जोन-3 राजेश व्यास का कहना है कि पूरे मामले की न्यायिक जांच के लिए पत्र लिख दिया गया है।
ये है मामला...
जानकारी के अनुसार गौरव जैन से विवाद का मुख्य कारण तत्कालीन विजय नगर सीएसपी राकेश गुप्ता से चल रहा उनका 65 लाख का लेनदेन है। 13 सितंबर 2025 को राकेश गुप्ता ने गौरव के खिलाफ लसूड़िया थाने में धमकी का केस भी दर्ज करवाया था। ग्वालियर की कोर्ट में चेक बाउंस का केस भी गौरव के खिलाफ दायर किया था, जहां से उसका गिरफ्तारी वारंट निकला था। इसी की आड़ में पुलिसकर्मी गौरव के फ्लैट में घुसे थे।
इंदौर में यह पहला मामला नहीं है। पिछले वर्षों में भी पुलिस हिरासत में मौत के कई मामले सामने आए हैं। अप्रैल 2019 में गांधी नगर थाने में ग्राम रिजलाय निवासी संजू पिता इंदरसिंह की मौत हो गई थी। उसे वाहन चोरी की शंका में पकड़ा गया था। पूछताछ और मारपीट के बाद उसकी मौत हो गई।
तत्कालीन टीआई नीता देअरवाल सहित आधा स्टॉफ सस्पेंड हुआ था। वहीं, सितंबर 2022 में मानपुर थाने में लूट के आरोपी अर्जुन पिता देवकरण की भी पुलिस हिरासत में मौत हुई थी। तब टीआई विजय सिसौदिया सहित तीन-चार पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी थी।
दिसंबर 2015 में एमआईजी थाने में चोरी के मामले में पंकज वैष्णव को पकड़ा गया था। उसे बाथरूम में फांसी लगा ली थी। तब टीआई एमएस सैय्यद सहित अन्य पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिरी थी। हालांकि हर बार जिम्मेदारों पर कार्रवाई की बात होती है, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदलती।
घर में घुसकर 22.50 तोला सोना ले गए
दूसरी ओर, लसूड़िया थाना क्षेत्र का मामला पुलिस की छवि को और धूमिल करता है। यहां एक एसआई समेत पांच पुलिसकर्मियों पर वारंट के नाम पर घर में घुसकर 22.50 तोला सोना लूटने और रिश्वत लेने के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि पुलिसकर्मी आधी रात को दबिश देने पहुंचे, पहले सीसीटीवी कैमरे तोड़े और फिर नकली चाबी से घर में घुस गए।
तलाशी के नाम पर उन्होंने घर का कीमती सामान समेट लिया। पीड़ित गौरव जैन निवासी हरिदर्शन अपार्टमेंट का कहना है कि चेक बाउंस के मामले में ग्वालियर की कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था। एक अप्रैल की रात लसूड़िया थाने के एसआई संजय विश्नोई, हेड कांस्टेबल राकेश शर्मा, प्रणित भदौरिया, रवींद्र कुशवाह, दिनेश गुर्जर और दीपेंद्र मिश्रा के साथ घर पहुंचे।
सिपाही रवींद्र ने फ्लैट के बाहर लगा सीसीटीवी कैमरा तोड़ दिया, फिर नकली चाबी से ताला खोलकर अंदर घुस गए। फ्लैट की तलाशी ली और पत्नी विजेता के 22.50 तोला वजनी सोने के आभूषण चुरा लिए। इतना ही नहीं हेड कांस्टेबल राकेश शर्मा ने 27 हजार रुपये रिश्वत के रूप में लिए।
वकील से संपर्क करने के एवज में 10 हजार रुपये सोनू कुशवाह के खाते में जमा करवाए। 17 हजार रुपये बेटे तुषार शर्मा के खाते में जमा कराए यानी पुलिसकर्मियों ने न सिर्फ सोना-चांदी और अन्य सामान उठाया, बल्कि रिश्वत के लिए दबाव भी बनाया। उसे थाने ले जाने के बजाय गेस्ट हाउस में रखा गया और वहां कथित तौर पर मारपीट भी करवाई गई।
उन्होंने जमानत पर छूटते ही डीसीपी जोन-2 को पूरी घटना शिकायत की और सीसीटीवी कैमरे में रिकार्ड घटनाक्रम सबूत सहित दिए। उल्लेखनीय है कि अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह किसी आपराधिक गिरोह से कम नहीं, बल्कि वर्दी में छिपे अपराधियों की कहानी है।
दो दिनों में देना है जांच रिपोर्ट...
मामले में डीसीपी जोन-2 कुमार प्रतीक ने एसआई संजय विश्नोई सहित सभी पांचों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर लाइन अटैच कर दिया गया है। मामले में दो दिनों में जांच रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। - पराग सैनी, एसीपी विजय नगर
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