खबर
Top News

प्रमिला हॉस्पिटल पर सवालों का पहाड़: अवैध निर्माण, दवाई लूट और प्रशासनिक चुप्पी, जिम्मेदार कौन

KHULASA FIRST

संवाददाता

22 अप्रैल 2026, 7:00 pm
248 views
शेयर करें:
प्रमिला हॉस्पिटल पर सवालों का पहाड़

हर काम के दाम तय, नेता और अधिकारी साझेदार?

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े करने वाला प्रमिला हॉस्पिटल का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। अवैध निर्माण, कथित दवाई घोटाले और जिम्मेदार विभागों की चुप्पी ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है। नगर निगम से लेकर जिला प्रशासन तक की निष्क्रियता अब कई सवाल खड़े कर रही है।

अस्पताल बना कमाई का जरिया- आरोप है कि सरकारी विभागों में हर काम की कीमत तय है और नेताओं व अधिकारियों के बीच इसका बंटवारा होता है। इसी माहौल में प्रमिला हॉस्पिटल पर भी गंभीर आरोप लगे हैं कि यहां मरीजों के इलाज के नाम पर आर्थिक शोषण का शिकार बनाया जा रहा है।

दवाई ‘लूट’ कांड के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई- एक सप्ताह पहले अस्पताल में कथित ‘दवाई लूट’ का खुलासा हुआ, जिसमें महापौर पुष्यमित्र भार्गव की मौसी के साथ अधिक कीमत वसूलने का आरोप लगा। इसके बाद मेडिकल जांच और दवाइयों की कीमतों में भारी अंतर को लेकर भी हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की गई, लेकिन इसके बावजूद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

खुदाई से हिली नींव, 70 लोगों की जान खतरे में
6 फरवरी 2025 को खुलासा फर्स्ट द्वारा एक खुलासे में बताया गया था कि पार्किंग के लिए की गई खुदाई के दौरान पास की गोविंद विहार बिल्डिंग की नींव प्रभावित हो गई थी। इससे करीब 14 परिवारों के लगभग 70 लोगों जिसमें शामिल बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की जान जोखिम में पड़ गई थी। शिकायत के बाद संबंधित भवन अधिकारी ने स्वीकार भी किया कि स्वीकृति केवल आवासीय नक्शे की है और बेसमेंट (पार्किंग) निर्माण अवैध है, फिर भी निर्माण कार्य जारी रहा।

एक साल से जारी है अवैध निर्माण, निगम की आंखें बंद
हॉस्पिटल के डॉ. जैन दंपति पर अवैध निर्माण को लेकर भी गंभीर आरोप हैं। बताया जा रहा है कि नगर निगम एक साल से अधिक समय से इस पर आंखें मूंदे बैठा है। भवन अधिकारी को चार मंजिला से अधिक निर्माणाधीन इमारत नजर नहीं आ रही, जबकि इसकी शिकायत पहले ही की जा चुकी है। आरोप है कि अवैध निर्माण के बावजूद न तो काम रोका गया और न ही निर्माण कंपनी एमबी कंस्ट्रक्शन पर कोई कार्रवाई की गई। इससे प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

डॉक्टरों पर लगे गंभीर आरोप
यह पूरा मामला कथित तौर पर प्रमिला हॉस्पिटल एंड आई वीएफ सेंटर से जुड़े डॉ. भरत जैन और डॉ. मून जैन से संबंधित है। आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर निर्माण और संचालन जारी रखा गया, जबकि संबंधित विभाग मूकदर्शक बने रहे।

सवालों के घेरे में प्रशासनिक चुप्पी
पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिकायतों, खुलासों और न्यायालय में याचिका के बावजूद भी जिम्मेदार विभाग कार्रवाई से क्यों बच रहे हैं? क्या यह केवल लापरवाही है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा गठजोड़ काम कर रहा है?

स्वीकृति आवासीय, निर्माण अस्पताल का
जानकारी के अनुसार, प्लॉट नंबर 16 पर 31 मार्च 2023 को शंकरलाल गुप्ता के नाम से भूतल सहित चार मंजिला आवासीय भवन का नक्शा स्वीकृत किया गया था। इसके बावजूद यहां अस्पताल संचालन और अतिरिक्त निर्माण किया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है।

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!