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भीषण आग तो लगना ही थी: पीथमपुर की हजारगो कंपनी के जालसाज ने की जादूगरी की पराकाष्ठा

KHULASA FIRST

संवाददाता

24 अप्रैल 2026, 6:23 pm
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भीषण आग तो लगना ही थी

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
दो दिन पहले पीथमपुर में एक वेस्ट प्रोसेसिंग कंपनी में भीषण आग लगी या लगवाई गई? कहा जा रहा है उस दिन से लगातार लग रही है जिस दिन प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फर्जी या बोगस तरीके से बनी इस कंपनी को खतरनाक कचरा प्रबंधन का लाइसेंस दिया था। पीथमपुर की बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल और अन्य इंडस्ट्री के संचालक वर्षों से कह रहे हैं हजारगो इंडस्ट्री को एकेवीएन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति खतरनाक है और यह बात सच साबित हो रही है।

इस इंडस्ट्री में बीते चार वर्षों से आग लग रही है और प्रशासन तथा संबंधित विभाग ने आंखें मूंद रखी है। इसके पास न प्रौद्योगिकी है न उम्दा संसाधन फिर भी धड़ल्ले से वह सब कर रही है जो नहीं करना चाहिए या कहें नहीं करने देना चाहिए।

कहा जाता है प्रदूषण विभाग के सदस्य सचिव स्तर के एक अधिकारी इस इंडस्ट्री के संरक्षक हैं इसलिए कार्रवाई नहीं होती। आग लगने के बाद उद्योगपति खुद कह रहे थे उक्त अधिकारी अच्युतानंद मिश्रा और दूसरे अधिकारी रोहन सक्सेना हैं, जिन्होंने इस फैक्ट्री को जमीन दी थी।

कंपनी को आवंटित जमीन की रजिस्ट्री फर्जी
पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र-3 स्थित प्लॉट 1018 एवं 1019 (कुल क्षेत्रफल 99,660 वर्गफुट) पर पूर्व में मेसर्स जनक इंटरमीडिएट नामक उद्योग था। ऋण चुकाने में त्रुटि के कारण न्यायालय द्वारा संपत्ति ऑफिशियल लिक्विडेटर को प्रदान कर दी गई, जिससे इस सम्पत्ति को आरके स्टील एण्ड स्क्रैप सप्लायर प्रा.लि. नामक एक फर्म ने क्रय किया।

इकाई ने मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को हस्तांतरण हेतु नियमानुसार अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में उनके द्वारा सभी अपशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक निराकरण, प्लास्टिक रिसाइकिलिंग एवं उपयोग किये हुए तेल की रिसाइकिलिंग कार्य प्रस्तावित बताया।

मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लि. द्वारा इकाई को दिनांक 03 मार्च 2020 को सूचित किया मप्र राज्य औद्योगिक भूमि एवं प्रबंधन नियम 2019 के अंतर्गत प्लास्टिक रिसाइकिलिंग खतरनाक श्रेणी में है, अतः उक्त क्षेत्र में ऐसे प्रयोजन के लिए भूमि आवंटन निषिद्ध है।

भूमि का हस्तांतरण अन्य किसी मान्य प्रोजेक्ट हेतु किया जा सकता है। इकाई द्वारा दिनांक 9 मार्च 2020 को परिवर्तित प्रोजेक्ट रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें इंडस्ट्रियल फेब्रिकेशन बताया गया। प्रोजेक्ट को अनुमति देते हुए 6 जुलाई 2020 को आवेदक प्रमोद खंडेलवाल, संचालक आरके स्टील एंड स्क्रैप सप्लायर प्रालि. के पक्ष में कर दिया गया।

दिनांक 12 अक्टूबर 2020 को कंपनी द्वारा नाम बदल कर हजारगो इंडस्ट्रीज प्रालि. करने हेतु अनुमति चाही, जबकि इस नाम परिवर्तन 8 जनवरी 2020 को ही हो चुका था। इस प्रकार कंपनी के संचालकों द्वारा भूखंड की रजिस्ट्री उस नाम से कराई, जिस नाम से उस तिथि को उसका अस्तित्व समाप्त हो चुका था। नोटशीट्स देखने से पता चलता है एमपीआईडीसी के तत्कालीन महाप्रबंधक यूके तिवारी एवं कार्यकारी निदेशक रोहन सक्सेना ने बिना कोई प्रश्न उठाए हस्तांतरण की स्वीकृति प्रदान कर दी थी।

अपशिष्ट निपटान इकाई ही खोली
हजारगो इंडस्ट्रीज प्रालि ने 31 जनवरी 2020 को प्लॉट क्रमांक 1018 एवं 1019 में परिसंकटमय अपशिष्ट निपटान का उद्योग की स्थापना हेतु मप्र प्रदूषण नियंत्रण मण्डल को ऑनलाइन आवेदन किया, जिसमें पांच लाख टन प्रतिवर्ष, अपशिष्ट प्रीप्रोसेसिंग की सम्मति चाही गई।

आवेदन में बताया गया कि उनके द्वारा सभी प्रकार के तरल व ठोस अपशिष्ट, एग्रो केमिकल्स से संबंधित 65 हजार मी.टन, वाहन उद्योग से संबंधित 60 हजार मी.टन, औषधि उद्योग से संबंधित 75 हजार मी.टन, इंजीनियरिंग उद्योग से संबंधित 30 हजार मी. टन, पेट्रोकेमिकल उद्योग से संबंधित 75 हजार मी. टन, टेक्सटाइल उद्योग से संबंधित 75 हजार मी.टन, ऊर्जा उत्पादन उद्योग से संबंधित 25 हजार मी. टन, सौंदर्य प्रसाधन एवं प्लास्टिक उद्योग से संबंधित 20 हजार मी. टन, केमिकल उद्योग से संबंधित 75 हजार मी. टन अपशिष्ट की प्रीप्रोसेसिंग सम्मिलित थी।

14 फरवरी 2020 को स्वीकृति अच्युतानंद मिश्रा, सदस्य सचिव, मप्र प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के हस्ताक्षर से जारी कर दी गई। इसमें यह बताया गया आवेदन की जांच, श्री लोकेन्द्र त्रिवेदी, रसायनज्ञ मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने की थी। यह सम्मति 31 जनवरी 2025 तक के लिए जारी की गई थी।

इस संबंध में कथित स्वीकृति प्राप्त उद्योग के आसपास के उद्योगों को जब जानकारी प्राप्त हुई तो उन्होंने पीथमपुर औद्योगिक संगठन को शिकायत कर भविष्य में खतरनाक अपशिष्ट संग्रहण एवं उपचार इत्यादि प्रक्रिया से संभावित समस्याओं का उल्लेख किया।

आपत्ति पर पांच की जगह दो लाख मीट्रिक टन की सम्मति
इसी दिन इंदौर से प्रकाशित एक समाचार-पत्र ने ‘पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में दो एकड़ प्लॉट पर पांच लाख टन कचरा होगा प्रोसेस’ शीर्षक समाचार प्रकाशित किया। इस खबर और संगठन की शिकायत के पश्चात हजारगो इंडस्ट्री की उत्पादन सम्मति आवेदन को 2 फरवरी 2021 को अस्वीकृत कर दिया गया किंतु निरीक्षण में खतरनाक अपशिष्ट नहीं मिलने की बात कहकर, क्षेत्रीय अधिकारी पीथमपुर ने कार्रवाई नहीं की। 8 जनवरी 2021 को रोहन सक्सेना, कार्यकारी संचालक, एमपीआईडीसी, क्षेत्रीय कार्यालय इंदौर, से संयुक्त संचालक परिक्षेत्रीय कार्यालय म.प्र.प्रदूषण नियंत्रण मण्डल पीथमपुर को पत्र प्रेषित किया।

इसमें उक्त समाचार का हवाला देते हुए स्पष्ट किया हजारगो इंडस्ट्रीज को प्लॉट हस्तांतरण के समय कचरा निपटान हेतु इकाई की परियोजना को अस्वीकृत किया गया था और परिवर्तित परियोजना अनुसार इण्डस्ट्रियल फेब्रिकेशन की परियोजना के आधार पर हस्तांतरण किया गया था। पत्र में यह भी लिखा कि यदि मण्डल द्वारा इकाई को औद्योगिक कचरा निपटान की अनुमति दी गई हो, तो निरस्त करें।

इस पत्र के बाद भी म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण मण्डल द्वारा कोई संज्ञान न लेते हुए पुनः 31 अक्टूबर 2021 को पांच लाख मी. टन क्षमता के स्थान पर दो लाख मी. टन क्षमता हेतु सम्मति प्रदान कर दी गई। इसमें यह उल्लेख किया गया संस्थान द्वारा नॉन हेजार्डस अपशिष्ट, प्लास्टिक के संपहण हेतु प्लास्टिक अपशिष्ट नियम 2016 के अंतर्गत प्रोड्यूसर रिसपॉसिबिलिट्ज़ि ऑर्गेनाइजेशन के अंतर्गत पंजीयन किया गया है। यहां उल्लेखनीय है मप्र शासन के भूमि एवं प्रबंधन नियम, मप्र शासन के सभी विभागों पर समान रूप से लागू होते हैं। इसमें नियमों की अवहेलना की गई।

आरटीआई आवेदन पर भ्रामक जानकारी
एक आरटीआई व्हिसल ब्लोअर ने 2 फरवरी 2022 को मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल में आवेदन किया। यहांं मिले दस्तावेजों से मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की जादूगरी झलक रही थी। मात्र 99660 वर्गफुट (लगभग सवा दो एकड़) प्लॉट में पांच लाख टन अपशिष्ट की प्रीप्रोसेसिंग हेतु आवागमन संभव नहीं था।

यदि 365 दिन उद्योग में प्रतिदिन 1370 मी. टन अपशिष्ट प्रोसेस किया जाए और इतनी ही निकासी हो, तो लगभग 274 ट्रकों का लोडिंग-अनलोडिंग एवं आवागमन असंभव है। संगठन ने 19 दिसंबर 2020 को सचिव, म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण मण्डल को शिकायत कर सम्मति निरस्त करने वं अविलम्ब अनाधिकृत परिसंकटमय अपशिष्ट भंडारण के लिए जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम 1974 की धारा 25/26 का उल्लघंन करने, अधिनियम की धारा 41 एवं 44 के तहत कोर्ट केस एवं खतरनाक अपशिष्ट (प्रबंधन एवं हथालन) नियम 1989 यथा संशोधित नियम 2003 के नियम 5 के प्रावधानों का उल्लंंन, पर्यावरण (संरक्षण) नियम 1986 के नियम 15 के तहत केस दायर करने लिखा गया।

दोबारा आगाह करने पर भी नहीं जागे
इस प्रकार मप्र प्रदूषण निवारण मंडल के अधिकारियों ने नए चेयरमैन अनिरुद्ध मुखर्जी की नियुक्ति 1 नवम्बर 2021 के एक दिन पहले दो लाख मी. टन खतरनाक अपशिष्ट की प्रीप्रोसेसिंग सम्मति प्रदान की थी। संगठन ने क्षेत्रीय अधिकारी, म.प्र.प्रदूषण नियंत्रण मंडल, धार को पुनः उद्योग के संचालन से उत्पन्न खतरे के प्रति आगाह किया एवं पत्र की प्रतिलिपि अनिरुद्ध मुखर्जी चेयरमैन, एएन मिश्रा सदस्य सचिव मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल, जॉन किंग्सली प्रबंध संचालक, एमपीआईडीसी भोपाल एवं रोहन सक्सेना कार्यकारी संचालक, एमपीआईडीसी, क्षेत्रीय कार्यालय इंदौर को सूचित किया। संबंधितों द्वारा की कार्रवाई की जानकारी संगठन को नहीं दी गई।

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