दशकों पुराना सपना साकार: पीथमपुर-धार रेल ट्रैक पर दौड़ा पहला इंजन; 26 मार्च तक चलेगा ट्रायल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, पीथमपुर।
धार जिले के लिए ऐतिहासिक क्षण सामने आया है। वर्षों से लंबित रेल कनेक्टिविटी का सपना अब साकार होता दिख रहा है। इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के तहत पीथमपुर से धार के बीच तैयार नई रेल लाइन पर सोमवार को पहली बार इंजन ट्रायल रन किया गया। आजादी के बाद यह पहला मौका है जब धार की धरती पर रेल इंजन पहुंचा है।
इंजीनियरों की टीम की पूरे ट्रैक पर नजर
रेलवे विकास निगम लिमिटेड (RVNL) और पश्चिम रेलवे के अधिकारियों की मौजूदगी में सुबह से ट्रायल शुरू हुआ। इंजीनियरों की टीम पूरे ट्रैक पर नजर रखकर तकनीकी परीक्षण कर रही है।
38 किलोमीटर ट्रैक पर हुआ परीक्षण
पीथमपुर से धार तक करीब 38 किलोमीटर लंबे रेल ट्रैक पर टॉवर वैगन के जरिए परीक्षण किया गया। इस दौरान ट्रैक की गुणवत्ता, घुमाव, संतुलन और सिग्नलिंग सिस्टम की बारीकी से जांच की जा रही है।
26 मार्च तक चलेगा ट्रायल
रेलवे ने सुरक्षा और तकनीकी परीक्षण के लिए 23 से 26 मार्च तक का समय तय किया है। इस अवधि में अलग-अलग गति से इंजन दौड़ाकर ट्रैक की क्षमता और सुरक्षा मानकों का आकलन किया जाएगा। हालांकि धार तक पटरी बिछ चुकी है, लेकिन इंदौर (टिही) से सीधा कनेक्शन अभी अधूरा है।
टिही सुरंग बना रही है चुनौती
इस परियोजना का सबसे जटिल हिस्सा टिही के पास बन रही लंबी सुरंग है। अधिकारियों के अनुसार, सुरंग का निर्माण अंतिम चरण में है और मई-जून 2026 तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद इंदौर से धार का सीधा रेल संपर्क संभव हो सकेगा।
स्टेशनों का काम अंतिम दौर में
पीथमपुर, सागौर, गुणावद और धार रेलवे स्टेशनों के भवन लगभग तैयार हो चुके हैं। फिलहाल प्लेटफॉर्म और यात्री सुविधाओं से जुड़ा कार्य जारी है।
लागत बढ़कर 1800 करोड़ के पार
2008 में शुरू हुई इस परियोजना की शुरुआती लागत 678 करोड़ रुपए थी, लेकिन भूमि अधिग्रहण और तकनीकी कारणों से हुई देरी के चलते अब यह बढ़कर 1800 करोड़ रुपए से अधिक हो गई है।
औद्योगिक और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा
इस रेल लाइन से पीथमपुर के ऑटोमोबाइल हब जिसे ‘डेट्रॉयट ऑफ इंडिया’ कहा जाता है को माल परिवहन में बड़ी सुविधा मिलेगी। वहीं धार और झाबुआ जैसे आदिवासी क्षेत्रों की इंदौर और गुजरात से कनेक्टिविटी बेहतर होने से व्यापार और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। अभी तक धार-इंदौर के बीच केवल सड़क मार्ग ही प्रमुख विकल्प था।
रेलवे की अपील
ट्रायल रन के दौरान रेलवे ने स्थानीय लोगों से पटरियों से दूर रहने और मवेशियों को ट्रैक के पास न जाने देने की अपील की है। तेज रफ्तार इंजन और हाई वोल्टेज ओवरहेड लाइनों के चलते हादसे का खतरा बना रह सकता है। इस ट्रायल के साथ ही धार जिले के लिए रेल कनेक्टिविटी की दिशा में एक बड़ा कदम उठ गया है, जिससे आने वाले समय में क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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