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मॉर्गेज लोन नहीं चुकाया तो मकान को 25 प्रतिशत दाम पर नीलाम करने की साजिश रची: बैंक ऑफ महाराष्ट्र पलासिया शाखा की धोखाधड़ी

KHULASA FIRST

संवाददाता

30 मार्च 2026, 3:17 pm
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मॉर्गेज लोन नहीं चुकाया तो मकान को 25 प्रतिशत दाम पर नीलाम करने की साजिश रची

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अगर आप बैंक में अपनी संपत्ति गिरवी रखकर मॉर्गेज लोन ले रहे हैं तो सावधान हो जाइए। हो सकता है कि बैंक आपकी संपत्ति को औने-पौने दाम पर बेचने की साजिश रचे और आपको पता भी न चले। ये भी बैंक फ्रॉड से कम नहीं है। अधिकारी संपत्तिधारक की अज्ञानता का फायदा उठाकर संपत्ति का गलत मूल्यांकन करवाते हैं और फिर उसकी कीमत कम देते हैं।

ऐसा ही एक मामला ओल्ड पलासिया निवासी अर्पित मेहता व उनकी पत्नी रश्मि मेहता का है। उन्होंने अपना दो मंजिला मकान बैंक ऑफ महाराष्ट्र की पलासिया शाखा में जून 2021 में 10 करोड़ रुपए के लोन के लिए गिरवी रखा था। इसके बाद 2023 में उन्होंंने सनावदिया स्थित 27 हजार स्क्वेयर फीट जमीन (चार प्लॉट, जिनमें से एक पर मकान बना है) को बैंक में रखा और 15 करोड़ का लोन लिया।

2026 में खाता एनपीए यानी नॉन प्रोफार्मिंग एसेट्स होने के बाद बैंक ने नीलामी तय की और पुनर्मूल्यांकन कराया, जिसमें वेल्यूअर मोहन अजमेरा को 2021 की रिपोर्ट दी और प्लॉट से मकान को गायब कर दिया।

दोनों वेल्यूअर ने अलग-अलग कीमत लगाई... अधिकारियों के इशारे पर अजमेरा ने संपत्ति का मूल्यांकन मूल कीमत का 25 प्रतिशत ही किया। चूंकि नियम है कि 2 करोड़ से अधिक संपत्ति की कीमत पर बैंक दो वेल्यूअरों से वेल्यू निकलवाना होती है। वर्ष 2021 में दोनों वेल्यूअर ने अलग-अलग कीमत लगाई।

अजमेरा ने मकान की कीमत 4 करोड़ 45 हजार लगाई थी, जबकि दूसरे वेल्यूअर ने 4 करोड़ 90 हजार कीमत आंकी। यहीं से बैंक का फ्रॉड शुरू हो गया। बैंक के दूसरे वेल्यूअर ने वर्ष 2023 में मकान की वेल्यू 4 करोड़ 04 लाख आंकी। इसी से स्पष्ट हो गया कि बैंक अधिकारी लोनग्रहिता मेहता के साथ धोखाधड़ी कर रहे हैं।

उनके गलत इरादे और बुरी मंशा 2026 में आकर और अधिक स्पष्ट हो गई, जबकि 2026 में एनपीए होने के बाद वेल्यूअर मोहन अजमेरा ने पलासिया स्थित दो मंजिला मकान की कीमत 3 करोड़ 52 लाख 80 हजार रुपए लगाई।

मेहता का सवाल है कि संपत्ति की कीमत बढ़ती है या घटती है, लेकिन बैंक ने घटा दी। अधिकारियों की फ्रॉड की मंशा केवल यहीं नहीं रुकी। उन्होंने सनावदिया स्थित मकान वाले प्लॉट की कीमत 1 करोड़ 12 लाख से घटाकर मात्र 52 लाख रुपए आंकी।

ताबड़तोड़ ऑक्शन को स्थगित कर दिया... बैंक अधिकारियों की नीयत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने गत 9 मार्च को ऑक्शन की विज्ञप्ति अखबारों में प्रकाशित करवाई, जिसमें पलासिया स्थित दो मंजिला मकान की कीमत 3 करोड़ 55 लाख और सनावदिया के चारों प्लॉट की कीमत 1 करोड़ 85 लाख रुपए लिखी, जो कि उनकी मूल कीमत से आधे से भी आधी थी।

जब इसकी शिकायत पीड़ित अर्पित मेहता ने बैंक के बड़े अधिकारियों, ईओडब्ल्यू, सीवीसी व थाने में की तो बैंक अधिकारियों ने ताबड़तोड़ ऑक्शन को स्थगित कर दिया।

उन्होंने इसके लिए तकनीकी कारणों का हवाला दिया। मेहता ने बताया कि जब उन्होंने बैंक से लीगल दस्तावेज मांगे तो बैंक अधिकारियों ने टालमटोल करना शुरू कर दी और आखिरकार दस्तावेज नहीं दिए।

इससे भी उनकी मंशा पर संदेह होता है। उन्होंने बताया कि बैंक अधिकारियों द्वारा दी जा रही परेशानियों के कारण वे व्यापार में ज्यादा ध्यान नहीं दे पाए, जिससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा।

वैल्यूअर ने जमीन खाली बताई, जबकि जब वो इंस्पेक्शन के लिए गए थे, तब के फोटो में पीछे मकान दिख रहा है।

दलाल ने डाला दबाव- एक करोड़ ले लो
मेहता ने बताया कि इस मामले में बैंक का एक दलाल ज्योतिर्मय विजयवर्गीय भी सामने आया और उसने उन्हें फोन लगाकर कहा कि आप एक करोड़ रुपए ले लें और ऑक्शन होने दें ताकि वो ये प्रॉपर्टी किसी और को बिकवा सके। अपनी आपत्ति वापस ले लें, लेकिन मेहता ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। अधिकारियों की मनमानी इस कदर है कि थाने से समन जाने के बाद भी वे बयान देने नहीं आ रहे।

मेहता का आरोप है कि बैंक के एजीएम रोहित रमन, रिकवरी ऑफिसर कुमार गौतम, लीगल ऑफिसर तिलकराज और एम सत्यनारायण ने मिलकर उनके साथ धोखाधड़ी की कोशिश की है। मामले में बैंक अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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