20 दिन में वाहन चोरी के 191 केस दर्ज: चोर हो गए बेलगाम; पुलिस हुई बेअसर, कट रही गाड़ियां
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुद ढूंढो- कहकर लौटाया जा रहा शिकायत लेकर पहुंचे पीड़ितों को
कई मामलों में हफ्तों बाद दर्ज हुई एफआईआर, सैकड़ों केस अब भी पेंडिंग
200 चोरी पर 50 भी बरामद नहीं
पुलिस की जांच पर उठ रहे सवाल
रविश राजेंद्र सिंह 79870-55743 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अप्रैल अभी खत्म भी नहीं हुआ है और शहर में बाइक चोरी ने खौफनाक रूप ले लिया है। महज 20 दिन में अलग-अलग थानों में 191 बाइक चोरी के केस दर्ज हुए हैं, जबकि इससे दोगुने से ज्यादा मामलों में अब भी सिर्फ आवेदन या रजिस्टर में एंट्री कर पीड़ितों को टाला जा रहा है।
हालात ऐसे हैं कि बाइक चोर गैंग बेखौफ होकर रोजाना शहर के अलग-अलग इलाकों से दर्जनों गाड़ियां पार कर रही है और पुलिस या तो शिकायत लेने में देरी कर रही है या फिर कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर रही है। खास बात यह है कि बाइक चोरी के अधिकतर मामलों में पीड़ित बाइक चोरी करते हुए सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध करवा रहे हैं, इसके बावजूद पुलिस ढीला रवैया अपनाए हुए हैं। कहना गलत नहीं होगा कि जो पुलिस रात होते ही चेकिंग पॉइंट पर शराबियों को पकड़ने में सक्रिय हो जाती है वह यदि रात्रि गश्त ढंग से करे तो कई आमजन की खुशियां अफसोस में बदलने से बच सकती हैं।
जानकारी के मुताबिक पिछले दिनों लसूड़िया, विजयनगर में सबसे ज्यादा बाइक चोरी के मामले सामने आए हैं। एमआईजी थाने में भी बाइक चोरी के छह मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन सूत्रों का दावा है कि एमआईजी थाना क्षेत्र में दर्जनभर से ज्यादा बाइक चोरी के मामले सामने आए हैं।
बाइक चोरी के फुटेज उपलब्ध, फिर कार्रवाई क्यों नहीं?- कई पीड़ित ऐसे भी हैं जिन्होंने बाइक चोरी के सीसीटीवी फुटेज तक पुलिस को उपलब्ध कराए हैं। फुटेज में साफ तौर पर चोरों का वारदात का तरीका दिखाई देता है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है।
सूत्रों के मुताबिक कई मामलों में पुलिस ने फुटेज लेने के बाद भी न तो संदिग्धों की पहचान की कोशिश की और न ही गिरफ्तारी के लिए दबिश दी। वहीं शहर में लगातार बढ़ रही बाइक चोरी की घटनाओं के पीछे सबसे बड़ा कारण पुलिस का ढीला रवैया ही माना जा रहा है। अगर शुरुआती स्तर पर ही हर शिकायत पर तुरंत एफआईआर दर्ज कर सख्ती से जांच की जाती तो गैंग का नेटवर्क जल्दी सामने आ सकता था, लेकिन शिकायत दर्ज करने में देरी, जांच में सुस्ती और रिकवरी में नाकामी ने चोरों को खुला मैदान दे दिया है।
पुलिसिया रिकॉर्ड में बाइक चोरी के दर्ज आंकड़े
शहर के अलग-अलग थानों में दर्ज बाइक चोरी के मामलों के आंकड़े पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सबसे ज्यादा बाइक चोरी के केस लसूड़िया में 32 और विजय नगर थाने में 27 दर्ज हुए हैं। इसके अलावा हीरानगर में 13, राऊ में 12, बाणगंगा में 12, भंवरकुआं में 11, अन्नपूर्णा में 9, तिलक नगर में 8, आजाद नगर में 8, परदेशीपुरा में 7, संयोगितागंज में 7, एमआईजी में 6, खजराना में 4, चंदन नगर में 6, एरोड्रम में 3, राजेंद्र नगर में 3, द्वारकापुरी में 4, मल्हारगंज में 2, पलासिया में 2, सराफा में 1, रावजी बाजार में 1, जूनी इंदौर में 2, एमजी रोड में 2, तुकोगंज में 3, सदर बाजार में 1, कनाड़िया में 1, छत्रीपुरा में 1, तेजाजी नगर में 3 केस दर्ज हुए हैं।
इन थानों में एफआईआर के आंकड़े भले ही कम दिख रहे हों, लेकिन यहां का रजिस्टर, डायरी कुछ ओर ही हाल बयां कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इन थानों पर भी (प्रत्येक थाने पर) दर्जनभर से ज्यादा आवेदन धूल खा रहे हैं। कुछ थानों जैसे गांधी नगर, कोतवाली, छोटी ग्वालटोली और पंढरीनाथ में भले ही केस दर्ज नहीं दिखाए गए हों, लेकिन सूत्रों का दावा है कि यहां भी शिकायतें आईं, जिन्हें सिर्फ आवेदन या रजिस्टर में दर्ज कर टाल दिया गया है।
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और भी गंभीर नजर आती है। अनुमान के मुताबिक 250 बाइक चोरी होने पर पुलिस 50 भी बरामद नहीं कर पा रही है। यह आंकड़ा पुलिस की जांच और कार्रवाई पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
राजनीतिक दबाव के बाद दर्ज किया केस
पीड़ित कौशल जारवाल के मुताबिक पिछले सप्ताह उसकी बुलेट (क्रमांक एमपी 09 वीबी 9309) अंबेडकर नगर से चोरी हो गई थी। थाने पहुंचे तो डायरी में नोट कर बोला गया कि शाम या कल तक ढूंढ लो मिल गई तो ठीक नहीं तो तीन दिन बाद केस दर्ज करेंगे। तीन दिन बाद पहुंचा तो बोला गया कि टारगेट पूरा हो गया है कल करेंगे।
राजनीतिक दबाव बनाया उसके बाद पुलिस ने केस दर्ज किया। जिसमें की सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस को उपलब्ध करवाए हैं, जिसमें चोर बुलेट ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। सप्ताहभर हो गया, लेकिन बुलेट का कोई सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगा। दिव्यांश सिंह सेंगर की बाइक (एमपी 09 वी एक्स 9739) नेहरू नगर 6 नंबर गली से चोरी हुई थी, उसके साथ भी इसी तरफ का बर्ताव किया गया।
6 नंबर गली में से ही अनिल कैरव नमक युवक की बाइक (एमपी 09 एक्स एफ 9971) , नेहरू नगर 8 नंबर गली में रहने वाले भागवत प्रसाद शर्मा की बाइक (एमपी 42 जेड ई 6741) दो दिन पहले देर रात साढ़े तीन बजे करीब बाइक सवार दो युवक चुराकर ले गए। सूत्रों के मुताबिक एमआईजी थाना क्षेत्र में इस माह करीब एक दर्जन बाइक चोरी के मामले सामने आ चुके हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहरभर के थानों के क्या हाल होंगे और तो और विजयनगर और लसूड़िया थाना क्षेत्र के क्या।
फरियादी को ही बना दिया जाता है जांच अधिकारी
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बाइक चोरी के शिकार लोग जब थाने पहुंचते हैं और अपनी पीड़ा बताते हैं तो शहरी पुलिस थानों से उन्हें सीधे यह कहकर लौटा देती है कि पहले खुद ढूंढ लो, शाम तक मिल जाएगी। पीड़ित दिनभर अपने स्तर पर बाइक तलाशते हैं, सीसीटीवी खंगालते हैं, आसपास पूछताछ करते हैं, लेकिन जब बाइक नहीं मिलती तो अगले दिन फिर थाने पहुंचते हैं।
वहां भी एफआईआर दर्ज करने के बजाय आवेदन लेकर फिर टाल दिया जाता है। कई मामलों में तो पीड़ितों को 4-5 दिन, यहां तक कि एक हफ्ते तक चक्कर लगवाए जाते हैं। कुछ मामलों में पखवाड़े बाद जाकर केस दर्ज किया जाता है। यह रवैया न सिर्फ पीड़ितों को मानसिक रूप से तोड़ रहा है, बल्कि चोरों के हौसले भी बढ़ा रहा है।
धार-देवास जिले के कंजर गैंग के साथ लोकल चोर भी सक्रिय
बाइक चोरी के मामलों में देवास के लाल घाटी और धार के कंजर इलाकों की गैंग का नाम सामने आता रहा है। हाल ही में एसीपी रूबीना मेजबानी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने देवास में दबिश देकर 20 चोरी की बाइक जब्त भी की थीं। संयोगितागंज पुलिस ने भी एक मामले का खुलासा किया था।
इसके बावजूद शहर में चोरी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। आमजन का मानना हैं कि अब सिर्फ बाहरी गैंग ही नहीं, बल्कि शहर के लोकल चोर भी इस धंधे में सक्रिय हो चुके हैं। ये छोटे-छोटे समूह बनाकर अलग-अलग इलाकों में रैकी करते हैं और मौका मिलते ही बाइक पार कर देते हैं।
चोरी के बाद तुरंत कट रही गाड़ियां- सूत्रों के मुताबिक चोरी की गई अधिकतर बाइक या तो शहर से लगे जिलों में भेज दी जाती हैं या फिर शहर के ही कुछ इलाकों में काट दी जाती हैं। कटने के बाद बाइक के पार्ट्स अलग-अलग बेच दिए जाते हैं, जिससे उन्हें ट्रेस करना लगभग नामुमकिन हो जाता है। यही वजह है कि चोरी हुई बाइक के मिलने की संभावना बेहद कम रह जाती है।
बाइक चोर गैंग बेहद शातिर तरीके से वारदात को अंजाम देती है।
पहले इलाके की करते हैं रैकी।
बिना लॉक या कमजोर लॉक वाली बाइक को निशाना बनाते हैं।
1-2 मिनट में बाइक स्टार्ट कर फरार हो जाते हैं।
कई मामलों में डुप्लीकेट चाबी या मास्टर की का इस्तेमाल किया जाता है।
सवाल, जिनका जवाब जनता पुलिस से मांग रही है
आखिर क्यों पुलिस तुरंत एफआईआर दर्ज नहीं कर रही?
क्यों पीड़ितों को खुद बाइक ढूंढने के लिए कहा जा रहा है?
क्यों सीसीटीवी फुटेज मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती?
चोरी की बाइक कहां जा रही हैं, इसका खुलासा अब तक क्यों नहीं हुई?
पहले बाइक, स्पोर्ट्स बाइक, स्कूटी, अब बुलेट तक चोरी
अधिकतर मामलों में देखा गया है कि बाइक चोर टोली में आते हैं, जो अलग-अलग बाइक पर डबल या ट्रिपलिंग रहते हैं। पहले रैकी करते हैं, इसमें उनके निशाने पर नॉर्मल बाइक जैसे सीडी डीलक्स, स्प्लेंडर, सीडी डॉन, होंडा साइन, एक्टिवा रहती हैं, जिनका लॉक आसानी से तोड़कर चोर ले जाते हैं। इसके अलावा स्पोर्ट्स बाइक आरवन 5, पल्सर, बाइक चोरी होने के मामले सबसे ज्यादा आते हैं, लेकिन चोर अब आसानी से बुलेट चुराकर ले जाने लगे हैं।
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