गलत ब्लड ग्रुप बताने वाली: नीरज लैब पर कब होगी कार्रवाई; सीएमएचओ की नाकामी से पंगु हुआ इंदौर का स्वास्थ्य तंत्र
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
स्वास्थ्य सेवाओं पर निजी पैथोलॉजी लैब्स का शिकंजा इस कदर कस चुका है कि अब चार-पांच दिन के नवजात मासूमों की जिंदगी भी दांव पर लगाई जा रही है। शहर के तुकोगंज क्षेत्र स्थित नीरज डायग्नोस्टिक्स एंड इमेजिंग सेंटर ने एक नवजात शिशु विराजसिंह राजपूत की ब्लड रिपोर्ट में जिस तरह का संगीन और जानलेवा फर्जीवाड़ा किया, उसने इंदौर के संपूर्ण चिकित्सा तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
यह कोई साधारण चूक या मामूली गफलत नहीं, बल्कि एक मासूम बच्चे की सांसों पर सीधे डाका डालने का अक्षम्य अपराध है। जिस बच्चे की धड़कनें अभी ठीक से संभल भी नहीं पाई थीं, उसका ब्लड ग्रुप नीरज डायग्नोस्टिक्स ने पहली रिपोर्ट में ‘ए पॉजिटिव’ लिखकर परिजन के हाथ में थमा दिया।
जब शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश बिरला ने इस संदिग्ध रिपोर्ट पर सवाल उठाए और परिजन ने यूनिपैथ स्पेशलिटी लेबोरेटरी में दोबारा जांच कराई, तो बच्चे का असली ब्लड ग्रुप ‘बी पॉजिटिव’ निकला।
सोचने वाली बात यह है कि अगर डॉक्टर की सतर्कता से यह फर्जीवाड़ा पकड़ा न गया होता और किसी भी आपात स्थिति में उस मासूम को गलत ग्रुप का खून चढ़ा दिया जाता, तो उसकी जान जा सकती थी। इस घोर लापरवाही के बाद भी नीरज डायग्नोस्टिक्स लैब प्रबंधन का शर्मनाक रवैया यह रहा कि इसे महज ‘टाइपिंग मिस्टेक’ बताकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की।
क्या किसी नवजात शिशु की जिंदगी निजी लैब्स के लिए महज एक टाइपिंग मिस्टेक भर है? दो-दो बार सैंपल लेने का नाटक रचने के बाद भी अगर यह लैब गलत रिपोर्ट जारी कर रही है, तो साफ है कि यहां मरीजों की जिंदगी से सरेआम खिलवाड़ कर कमाई की अंधी दौड़ में स्वास्थ्य मानकों को कचरे के डिब्बे में फेंक दिया जाता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने इंदौर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हासानी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। आखिर किस आधार पर और किन मजबूरियों के चलते पूरे जिले के लाखों नागरिकों और मासूमों के स्वास्थ्य की जवाबदेही ऐसे सुस्त और नाकाम अधिकारी के हाथों में सौंप दी गई?
शहर के कोने-कोने में कुकुरमुत्ते की तरह खुल चुकी गैर-जिम्मेदार और फर्जी पैथोलॉजी लैब्स पर सीएमएचओ कार्यालय का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। जब-जब ऐसी जीवनघाती लापरवाही की शिकायतें पहुंचती हैं, तब-तब फाइल दबाकर बैठ जाना और जांच के नाम पर लीपापोती करना ही सीएमएचओ की कार्यशैली बन चुका है।
पीड़ित पिता सुरेंद्र राजपूत ने समाजसेवी सुमित तलरेजा के सहयोग से सीएमएचओ कार्यालय में आवक क्रमांक के साथ बकायदा लिखित शिकायत दर्ज कराई, लेकिन क्या महज शिकायत का कागज जमा कर लेना ही काफी है? डॉ. माधव हासानी की इस लाचारी और ढुलमुल रवैये के खिलाफ अब कड़े कदम उठाने का वक्त आ गया है।
मासूम बच्चों के परिजन प्रशासन से पुरजोर गुहार लगा रहे हैं कि तुरंत इस मामले में हस्ताक्षेप कर ऐसी कातिलाना लापरवाही बरतने वाली नीरज डायग्नोस्टिक्स जैसी लैब्स पर अविलंब ताला जड़े।
प्रशासन को बिना किसी ढिलाई के नीरज डायग्नोस्टिक्स का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर संचालक के खिलाफ आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज कराना चाहिए। अन्यथा भविष्य में किसी भी मासूम के साथ होने वाले बड़े हादसे की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
जांच में आई भिन्नता तकनीकी त्रुटि के कारण
ब्लड ग्रुप की जांच में आई भिन्नता एक तकनीकी त्रुटि के कारण हुई थी। इस मामले में पैथोलॉजिस्ट से चर्चा करके पूरे विषय को समझा जा रहा है। मरीज का बच्चा जब आया था, तब उसका बिलीरुबिन (पीलिया) काफी बढ़ा हुआ था। - डॉ. नीरज गुप्ता, संचालक, नीरज डायग्नोस्टिक्स एंड इमेजिंग सेंटर
लाइसेंस निरस्त व कड़ी कार्रवाई कराएंगे
नवजात शिशु की ब्लड रिपोर्ट में दो-दो बार परस्पर विरोधी जानकारी देकर मासूम के जीवन को संकट में डालना अक्षम्य अपराध है। पैसों की अंधी दौड़ में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाली ऐसी गैर-जिम्मेदार लैब्स का लाइसेंस निरस्त कराया जाएगा।
हम इस गंभीर लापरवाही के खिलाफ जिला प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगे। नीरज डायग्नोस्टिक्स प्रबंधन पर पुलिस मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा। - पंखुरी डोसी, भाजपा पार्षद, इंदौर
लैब के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी
मामला संज्ञान में आते ही त्वरित जांच के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य मानकों और मरीज की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लैब के खिलाफ सख्त वैधानिक एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. माधव हासानी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, इंदौर
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