हुस्न का जाल क्या सत्ता में लाएगा भूचाल: खूबसूरती, ब्लैकमेल और सत्ता के गलियारों तक फैला गंदा खेल
KHULASA FIRST
संवाददाता

हनी क्वीन के पास मंत्री, अफसर और कारोबारी सबको फंसाने की थी पहले से तैयार थी स्क्रिप्ट
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
करीब सात साल पुराने मध्य प्रदेश के चर्चित ‘हनीट्रैप कांड’ का एक बार फिर नया और कहीं ज्यादा खतरनाक रूप सामने आया है। इस बार खेल सिर्फ नेताओं के वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं था, बल्कि सत्ता, शराब, जमीन, ड्रग्स और पुलिस नेटवर्क तक इसकी जड़ें फैल चुकी थीं।
खूबसूरत चेहरों, हाईप्रोफाइल पार्टियों और हिडन कैमरों के सहारे करोड़ों की वसूली का ऐसा जाल बुना गया, जिसमें प्रदेश ही नहीं, दिल्ली तक के बड़े नेताओं को फंसाने की तैयारी थी।
उल्लेखनीय है परसों रात क्राइम ब्रांच ने बिल्डर हितेंद्रसिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर से ब्लैकमेलिंग के मामले में द्वारकापुरी की अलका दीक्षित, बेटे जयदीप, खंडवा (पीथमपुर) के लाखन चौधरी, भोपाल की श्वेता जैन को पकड़ने के बाद कल जितेंद्र पुरोहित (देवास) को गिरफ्तार किया था।
सभी को कोर्ट में पेश कर छह दिन के रिमांड पर लेकर आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा रही है। उम्मीद है कि पूछताछ में कई बड़े नेताओं, कारोबारियों और अफसरों के नाम सामने आ सकते हैं।
फिलहाल पुलिस आरोपियों के मोबाइल, लैपटॉप, पेन ड्राइव और हिडन गैजेट्स की तलाश में जुटी है। वहीं हिरासत में लिए गए जिला विशेष शाखा के हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा निवासी राजेंद्र नगर से भी पूछताछ चल रही है।
क्राइम ब्रांच की जांच और पूछताछ में सामने आया है कि इस पूरे रैकेट की डोर भोपाल की चर्चित हनीट्रैप आरोपी श्वेता जैन और रेशू उर्फ अभिलाषा नामक युवती के हाथ में थी। वहीं, इंदौर में इसकी जड़ें शराब तस्कर अलका दीक्षित संभाले हुए थी।
बड़े नेता के कहने पर चिंटू को बनाया फरियादी- सूत्रों का कहना है जब हनीट्रैप सिंडिकेट का खुलासा हुआ तो उज्जैन के बड़े कारोबारी के भी गैंग का शिकार होने की बात सामने आई। चूंकि कारोबारी मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ा था, इसलिए पुलिस को इंदौर स्तर पर एक फरियादी की जरूरत थी।
इस बीच शराब कारोबारी हितेंद्रसिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर के भी गैंग का शिकार होने की बात सामने आई। खुलासा हुआ कि उससे एक करोड़ की मांग की गई थी। अलका, जयदीप और लाखन चिंटू से पहले जमीन और शराब कारोबार में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी का दबाव बना रहे थे। उसे सुपर कॉरिडोर पर कार से उतारकर धमकाया भी गया था। इसके बाद इंदौर के बड़े भाजपा नेता के कहने पर चिंटू को फरियादी बनाकर उसकी तरफ से केस दर्ज किया गया।
ड्रग्स, हथियार और पुलिस कनेक्शन की जांच के घेरे में
अलका दीक्षित के तार ड्रग्स और अवैध हथियारों के रैकेट से भी जुड़े होने के संकेत मिले हैं। सबसे चौंकाने वाला नाम इंटेलिजेंस शाखा में पदस्थ प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा का सामने आया है। बताया जा रहा है कि अलका ने रेशू के कुछ वीडियो विनोद को दिखाए थे, जो ब्लैकमेलिंग की रणनीति का हिस्सा बन गए।
कार्रवाई का भरोसा दिलाकर लिए वीडियो और फंस गया- विनोद और अलका के बेहद करीबी संबंध थे। अलका उसे ‘जीजा’ कहती थी और विनोद उसे बहन मानता था। अलका द्वारा रेशू के वीडियो दिखाने पर विनोद ने ब्लैकमेलिंग का आइडिया दिया।
बाद में जब लाखन और अलका ने श्वेता और रेशू को ही फंसाने की योजना बनाई, तब विनोद ने कहा कि वीडियो उसे दे दें, ताकि वह अफसरों को दिखाकर कार्रवाई करवा सके। विनोद ने वीडियो तो ले लिए, लेकिन परिवार में गमी के कारण मामला कुछ समय के लिए ठंडे बस्ते में चला गया।
पूरे खेल में लाखन की भूमिका भी अहम है। खुद को भाजपा पदाधिकारी बताने वाला लाखन प्रॉपर्टी कारोबार की आड़ में बड़े लोगों तक पहुंच बनाता था। लाखन को डर था कि कहीं श्वेता व रेशू उसे ही न फंसा दें।
जेल में बनी दोस्त, बाहर आकर शुरू हुआ ब्लैकमेल का साम्राज्य
पूछताछ में अलका दीक्षित ने बताया 2019 में वह शराब के एक मामले में जिला जेल में थी। हनीट्रैप केस की श्वेता जैन भी वहीं बंद थी। दोनों के एक ही बैरक में होने के चलते दोस्ती हो गई। बाहर निकलने के बाद उन्होंने मिलकर नया सिंडिकेट खड़ा कर लिया।
सूत्रों के अनुसार श्वेता ने अलका को हनीट्रैप के तरीके, हिडन कैमरे, मोबाइल एप और रिकॉर्डिंग गैजेट्स तक की जानकारी दी। यहीं से शुरू हुआ नेताओं, कारोबारियों और प्रॉपर्टी डीलरों को निशाना बनाने का सिलसिला। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गैंग बेहद शातिर तरीके से काम करता था।
मुलाकात के दौरान सामने वाले व्यक्ति से मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान दूर रखवा दिया जाता था, ताकि उसे शक न हो। असली खेल तब शुरू होता था, जब महिलाओं के पर्स, कपड़ों के बटन या दूसरी वस्तुओं में लगे हिडन गैजेट्स एक्टिव हो जाते थे।
इन्हीं कैमरों से निजी वीडियो रिकॉर्ड किए जाते और बाद में ब्लैकमेलिंग का हथियार बनाए जाते। क्राइम ब्रांच को शक है कि गैंग के पास अभी भी कई नेताओं और अफसरों से जुड़े वीडियो और डेटा मौजूद हैं, जिन्हें अलग-अलग जगहों पर छिपाकर रखा गया है।
बड़े सवाल
क्या इस बार भी हनीट्रैप गैंग का हश्र पूर्व में हुए हनीट्रैप केस की तरह होगा?
पूरा खेल डिजिटल साक्ष्यों पर चलेगा। पूर्व के केस में कोर्ट में केस की सीडी ही नहीं चली थी। इसका फायदा आरोपियों को मिला था। कहीं इस केस में भी ऐसी कोई गड़बड़ तो नहीं होगी?
क्या सच में प्रदेश के बड़े नेताओं और अफसरों के वीडियो इस गैंग के पास हैं? अगर दावा सही है तो आखिर वे वीडियो और डेटा कहां छिपाए गए हैं?
हनीट्रैप गैंग को सत्ता और सिस्टम के भीतर से कौन संरक्षण दे रहा था?
क्या ब्लैकमेलिंग के पीछे सिर्फ पैसा था या सत्ता में घुसपैठ की बड़ी साजिश? ये सवाल रेशू का नाम उठने के बाद सामने आ रहा है।
‘अंग्रेजी, खूबसूरती और अदाओं’ से नेताओं को फंसाती थी रेशू
सूत्रों के मुताबिक इस गैंग की सबसे रहस्यमय किरदार रेशू उर्फ अभिलाषा है। बताया जा रहा है कि मूलत: सागर की रेशू विदेश में पढ़ी-लिखी है और अंग्रेजी पर शानदार पकड़ रखती है। उसकी यही खासियत बड़े नेताओं, अफसरों और कारोबारियों को अपने जाल में फंसाने का सबसे बड़ा हथियार थी।
रेशू पहले हाईप्रोफाइल लोगों से दोस्ती बढ़ाती, फिर निजी मुलाकातों के दौरान हिडन गैजेट्स से वीडियो रिकॉर्ड किए जाते। इसके बाद शुरू होता करोड़ों की उगाही का खेल। सूत्रों का दावा है कि प्रदेश के एक बड़े मंत्री, जो शिवराज सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं, उनके भी वीडियो इस गैंग के पास बताए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि रेशू ने दिल्ली के एक बड़े नेता से दीपावली के दौरान करीब डेढ़ करोड़ रुपए तक वसूले थे। इसी रकम से लग्जरी कार खरीदी गई और प्रॉपर्टी में निवेश किया गया।
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