पति की जघन्य हत्या की आरोपी पत्नी ने ऐसा कहा: बोली-मुझे फंसाया गया है; सुप्रीम कोर्ट में खुद को बताया बेकसूर, आज सुनवाई पर सबकी नजर
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर स्वयं को पूरी तरह निर्दोष बताया है। अदालत में दाखिल अपने विस्तृत जवाब में सोनम ने कहा कि उसे झूठे आरोपों के आधार पर इस मामले में फंसाया गया है और अभियोजन पक्ष के पास उसके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष एवं ठोस साक्ष्य नहीं हैं। उसने दावा किया कि पूरा मामला केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, अनुमान और आरोपों पर आधारित है।
जमानत दिए जाने का फैसला उचित नहीं
सोनम का यह हलफनामा ऐसे समय सामने आया है जब मेघालय सरकार उसकी जमानत रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। राज्य सरकार का कहना है कि गंभीर अपराध के बावजूद उसे जमानत दिए जाने का फैसला उचित नहीं था। इस याचिका पर गुरुवार को सर्वोच्च अदालत में सुनवाई प्रस्तावित है।
हत्या के मामले में क्या हैं आरोप
सोनम रघुवंशी पर आरोप है कि उसने अपने पति एवं इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रची। जांच एजेंसियों के अनुसार, मई 2025 में शादी के बाद हनीमून के बहाने वह राजा रघुवंशी को मेघालय के शिलॉन्ग ले गई, जहां कथित रूप से अपने प्रेमी राज कुशवाहा और उसके तीन सहयोगियों के साथ मिलकर हत्या की योजना को अंजाम दिलाया गया।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि यह हत्या पूर्व नियोजित साजिश का परिणाम थी और इसके लिए पहले से पूरी तैयारी की गई थी। इसी आधार पर सोनम सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
करीब एक वर्ष जेल में रहने के बाद मिली जमानत
मामले की जांच के दौरान सोनम रघुवंशी लगभग एक वर्ष तक न्यायिक हिरासत में रही। इसके बाद निचली अदालत ने उसे जमानत प्रदान की। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि जांच एजेंसी गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी आरोपी को विधिसम्मत तरीके से उपलब्ध कराने में विफल रही।
बाद में मेघालय हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि जांच एजेंसी की प्रक्रिया में बार-बार हुई त्रुटियां उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन न किए जाने की ओर संकेत करती हैं। हाई कोर्ट ने माना कि ऐसे मामलों में आरोपी के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट में क्या बोली सोनम
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में सोनम ने कहा कि उसके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। उसने अदालत से कहा कि मैं निर्दोष हूं। मुझे झूठे आरोप लगाकर फंसाया गया है। अभियोजन पक्ष का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और केवल आरोपों पर आधारित है। सोनम ने यह भी संकेत दिया कि उसके विरुद्ध प्रस्तुत सामग्री दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है और केवल संदेह के आधार पर उसे आरोपी बनाया गया है।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय हाई कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के आदेश पर कुछ सवाल जरूर उठाए थे, लेकिन तत्काल जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की अवकाशकालीन पीठ ने कहा था कि जब आरोपी पहले ही जमानत पर रिहा हो चुकी है, तब केवल अंतरिम रोक लगाने का अर्थ उसकी जमानत रद्द करना होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रारंभिक रूप से उसे यह जानकारी नहीं थी कि सोनम पहले ही जेल से बाहर आ चुकी है।
'जमानत नियम है, जेल अपवाद'
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने जमानत से जुड़े स्थापित कानूनी सिद्धांत को दोहराते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी कि अपराध कितना भी गंभीर क्यों न हो, जमानत नियम है और जेल भेजना अपवाद। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की जमानत रद्द करने की अपील पर अंतिम निर्णय विस्तृत सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा।
मेघालय सरकार की दलील
मेघालय सरकार का कहना है कि हत्या जैसा गंभीर अपराध होने के बावजूद सोनम को जमानत देना न्यायोचित नहीं है। सरकार का तर्क है कि उपलब्ध साक्ष्य और मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट द्वारा दी गई राहत पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। इसी आधार पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत रद्द करने का अनुरोध किया है।
आज की सुनवाई पर टिकी निगाहें
गुरुवार को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि मेघालय सरकार द्वारा दायर जमानत रद्द करने की याचिका पर आगे क्या आदेश दिया जाए। अदालत के समक्ष एक ओर राज्य सरकार के गंभीर आरोप होंगे, जबकि दूसरी ओर सोनम रघुवंशी का यह दावा होगा कि उसके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है और उसे झूठे मामले में फंसाया गया है। इस सुनवाई का फैसला न केवल सोनम रघुवंशी की जमानत की स्थिति तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि हाई कोर्ट द्वारा दिए गए जमानत आदेश में कानूनी प्रक्रिया का पालन किस सीमा तक हुआ था।
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