इतने शिक्षकों का अटैचमेंट खत्म: इन दफ्तरों से हटाकर स्कूल भेजे जाएंगे; इतने जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश, विधानसभा में सवाल उठने के बाद हुई कार्रवाई
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश सरकार ने स्कूलों के बजाय विभिन्न सरकारी कार्यालयों में वर्षों से पदस्थ 213 शिक्षकों का अटैचमेंट (संलग्नीकरण) समाप्त कर दिया है। लोक शिक्षण संचालनालय ( डीपीआई) ने 16 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों ( डीईओ) को आदेश जारी कर सभी शिक्षकों को तत्काल उनके मूल विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण कराने के निर्देश दिए हैं।
यह कार्रवाई विधानसभा में उठे एक सवाल के बाद की गई है। सरकार का कहना है कि अब शिक्षकों की सेवाएं केवल स्कूलों में ही ली जाएंगी, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
16 जिलों के शिक्षक होंगे स्कूल वापस
जिन जिलों के शिक्षकों का अटैचमेंट समाप्त किया गया है, उनमें उज्जैन, देवास, नीमच, शहडोल, दतिया, ग्वालियर, भिंड, श्योपुर, गुना, रीवा, सीधी, कटनी, सिंगरौली, सतना, राजगढ़ और मंडला शामिल हैं।
लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संबंधित शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त कर उनके मूल विद्यालयों में भेजा जाए।
स्कूल छोड़ दफ्तरों में कर रहे थे काम
विभागीय समीक्षा में सामने आया कि कई शिक्षक वर्षों से स्कूलों के बजाय विधायक कार्यालय, कलेक्टर कार्यालय, जिला पंचायत, मंत्रालय, जिला शिक्षा कार्यालय, निर्वाचन कार्यालय, जनपद पंचायत और एसडीएम कार्यालय जैसे विभिन्न सरकारी दफ्तरों में कार्यरत थे। कुछ शिक्षक विधायकों के निजी सहायक (पीए) के रूप में भी कार्य कर रहे थे।
विधानसभा में उठे सवाल के बाद कार्रवाई
यह पूरा मामला सिरोंज से भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा द्वारा विधानसभा में उठाए गए प्रश्न के बाद सामने आया। उन्होंने शिक्षकों के लंबे समय से स्कूलों से बाहर तैनात रहने का मुद्दा उठाया था।
इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिलों से ऐसे शिक्षकों की जानकारी मांगी और समीक्षा के बाद 213 शिक्षकों की सूची तैयार की। मानसून सत्र से पहले सरकार ने सभी का अटैचमेंट समाप्त करने का फैसला लिया।
वर्षों से मंत्रालय और अन्य विभागों में जमे थे शिक्षक
समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई शिक्षक एक दशक से अधिक समय से स्कूलों से बाहर कार्यरत थे। एक प्राथमिक शिक्षक वर्ष 2015 से भोपाल मंत्रालय में पदस्थ थे। एक सहायक शिक्षक 2008 से मंत्रालय में कार्यरत थे।
नरसिंहपुर के एक व्याख्याता 2009 से मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम में सेवाएं दे रहे थे। एक अन्य व्याख्याता 2022 से महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान में कार्यरत थे।
इसके अलावा कुछ शिक्षकों की हाल के वर्षों में विधायक कार्यालय, लोक निर्माण विभाग (PWD), कलेक्टर कार्यालय और एसडीएम कार्यालय में भी पदस्थापना की गई थी।
छात्रों के हित में लिया गया फैसला
भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा ने कहा कि उन्होंने यह मुद्दा विधानसभा में उठाया था, जिसके बाद सरकार ने कार्रवाई की। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम छात्रों के हित में है और इससे स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी।
सरकार का मानना है कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कर विद्यालयों में वापस भेजने से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार होगा और विद्यार्थियों को नियमित रूप से शिक्षकों का मार्गदर्शन मिल सकेगा।
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