14 वर्ष के छात्र को स्कूल से क्यों निकाला: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को क्यों दिया नोटिस
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंस्टाग्राम पर शिक्षकों के मीम्स साझा करने के आरोप में इंदौर के एक प्रतिष्ठित स्कूल ने 14 वर्षीय छात्र को स्कूल से निकाल दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप किया है।
मप्र सरकार, बोर्ड और स्कूल प्रबंधन को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि बच्चे की शिक्षा किसी भी कीमत पर बाधित नहीं होनी चाहिए। इस मामले में जस्टिस बी.वी. नागरथना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने मध्य प्रदेश सरकार, आईसीएसई बोर्ड और स्कूल प्रबंधन सहित सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर 13 फरवरी 2026 तक जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया कड़ा रुख
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया और यह कहा कि मामला केवल स्कूल के अनुशासन तक सीमित नहीं , बल्कि एक बच्चे के शैक्षणिक भविष्य से जुड़ा है।
छात्र की शिक्षा पर क्या फैसला
अदालत ने प्रशासन से यह भी पूछा है कि इस छात्र को बोर्ड परीक्षा में शामिल कराने के लिए क्या व्यावहारिक रास्ता निकाला जा सकता है? सभी संबंधित यह स्पष्ट करें कि छात्र की शिक्षा जारी रखने के लिए किस संस्था की क्या जिम्मेदारी होगी।
यह है पूरा मामला
यह विवाद शहर के निजी स्कूल लिटिल वंडर्स कॉन्वेंट स्कूल का है। 9वीं कक्षा के एक छात्र पर आरोप है कि उसने अपने दो दोस्तों के साथ इंस्टाग्राम पर एक प्राइवेट अकाउंट बनाया । उसने इस पर शिक्षकों से जुड़े कुछ आपत्तिजनक मीम्स शेयर किए।
स्कूल प्रबंधन ने माना घोर अनुशासनहीनता
स्कूल प्रबंधन ने इसे घोर अनुशासनहीनता माना और छात्र को स्कूल से निष्कासित कर दिया। मामले में इंदौर हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद छात्र के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
एडवोकेट ने दी यह दलील
याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट निपुण सक्सेना ने अपनी दलील में स्कूल की कार्रवाई पूरी तरह से असंगत बताते हुए कहा कि कथित गलती के बदले स्कूल से निकाल देना बहुत बड़ी सजा है। 13-14 साल के बच्चे में किसी को अपमानित करने की आपराधिक मंशा नहीं खोजी जा सकती।
एडवोकेट ने यह भी कहा
एडवोकेट सक्सेना के अनुसार यदि ऐसे निष्कासन को सही माना गया, तो स्कूलों को बच्चों के मोबाइल और उनकी प्राइवेट डिजिटल लाइफ पर असीमित निगरानी का अधिकार मिल जाएगा, जो उनकी निजता का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने दिया यह तर्क
इंदौर हाईकोर्ट ने छात्र को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि समाज में एक सख्त संदेश जाना चाहिए ताकि छात्र इस तरह की गतिविधियों से दूर रहें। मामले में अगली सुनवाई 13 फरवरी को होगी।
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