इस कार्यक्रम में तीन पीढ़ियां क्यों साथ आईं: सोशल मीडिया की बढ़ती निर्भरता के दौर में कैसी अनूठी पहल शुरू की; यह था उद्देश्य
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मोबाइल फोन और सोशल मीडिया की बढ़ती निर्भरता के दौर में इंदौर की महिलाओं ने डिजिटल डिटॉक्स की दिशा में एक अनूठी पहल शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य लोगों को कुछ समय के लिए स्क्रीन से दूर कर वास्तविक सामाजिक जुड़ाव की ओर लौटाना है। इसी कड़ी में शहर के क्रोजोन कैफे में आयोजित ‘द सोशल शफल’ कार्यक्रम ने लोगों को परिवार, मित्रों और समाज के साथ प्रत्यक्ष संवाद का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सहित तीन पीढ़ियों ने एक साथ भाग लिया। प्रतिभागियों ने विभिन्न बोर्ड गेम्स खेले, सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लिया और नए लोगों से परिचय स्थापित किया। पूरे आयोजन के दौरान हंसी-मजाक, संवाद और आत्मीय मेलजोल का माहौल देखने को मिला।
स्क्रीन से दूरी, रिश्तों से नजदीकी
आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं था, बल्कि लोगों को यह एहसास कराना भी था कि तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच वास्तविक मानवीय रिश्तों और संवाद का महत्व आज भी उतना ही है। महिलाओं ने इस अभियान के माध्यम से स्वयं डिजिटल दुनिया पर निर्भरता कम करने और परिवार की तीन पीढ़ियों को एक-दूसरे के करीब लाने का संकल्प लिया।
आयोजन से जुड़ी महिलाओं का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अत्यधिक समय बिताने से पारिवारिक संवाद और सामाजिक संबंध प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में सामूहिक गतिविधियां लोगों को फिर से आपस में जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन सकती हैं।
बोर्ड गेम्स बन रहे डिजिटल डिटॉक्स का माध्यम
कार्यक्रम की आयोजक गुरप्रीत टुटेजा ने बताया कि डिजिटल युग में बोर्ड गेम्स लोगों के लिए डिजिटल डिटॉक्स का एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रहे हैं। इससे अलग-अलग आयु वर्ग के लोग एक स्थान पर बैठकर समय बिताते हैं, विचार साझा करते हैं और रिश्तों को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि अब लोग केवल बाहर घूमने या भोजन करने के लिए ही नहीं, बल्कि कुछ नया, सार्थक और यादगार अनुभव प्राप्त करने के लिए भी ऐसे आयोजनों का हिस्सा बन रहे हैं।
महिलाओं को मिला तनावमुक्त होने का अवसर
डॉ. मोनिका गोयल जैन ने बताया कि महिलाओं के लिए यह आयोजन विशेष रूप से लाभदायक साबित हुआ। घरेलू और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच उन्हें अपने मित्रों के साथ समय बिताने, खुलकर बातचीत करने और मानसिक तनाव से राहत पाने का अवसर मिला।
उनके अनुसार इस प्रकार की गतिविधियां महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ सामाजिक संबंधों को भी मजबूत करती हैं। इससे आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा मिलता है।
बच्चों और युवाओं के विकास में भी सहायक
विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड गेम्स केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे बच्चों और युवाओं में एकाग्रता, रणनीतिक सोच, टीम भावना और संवाद कौशल विकसित करने में भी मदद करते हैं। यही कारण है कि ऐसे आयोजनों के प्रति लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है।
तकनीक के बीच मानवीय संवाद का संदेश
‘द सोशल शफल’ कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि तकनीक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा जरूर है, लेकिन वास्तविक मुलाकातें, पारिवारिक संवाद और सामाजिक सहभागिता ही रिश्तों को जीवंत बनाए रखती हैं। डिजिटल युग में संतुलन बनाते हुए लोगों को समय-समय पर स्क्रीन से दूरी बनाकर परिवार और समाज के साथ जुड़ने की आवश्यकता है।
इंदौर में महिलाओं द्वारा शुरू की गई यह पहल अब एक सामाजिक अभियान का रूप लेती दिखाई दे रही है, जो आने वाले समय में डिजिटल डिटॉक्स और पारिवारिक जुड़ाव के लिए प्रेरणादायी उदाहरण बन सकती है।
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