देश का गौरव बढ़ाने वाला सैनिक क्यों है परेशान: कितने साल से किस बात के लिए भटक रहा; कौन लगवा रहा चक्कर, प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देश की रक्षा में सरहद पर तैनात एक सैनिक को अपने ही घर में न्याय के लिए भटकना पड़े। यह तस्वीर इंदौर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। राजौरी में तैनात आर्मी सूबेदार नीलेश पांचाल पिछले तीन वर्षों से अपनी पुश्तैनी जमीन पर कब्जा रोकने के लिए प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
“सरहद पर देश बचाया, यहां अपनी जमीन नहीं बचा पा रहा”
सूबेदार नीलेश पांचाल ने भावुक होकर बताया कि वे ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान चार दिन तक बिना सोए-खाए ड्यूटी करते रहे। उन्होंने कहा कि हम बॉर्डर पर देश की रक्षा करते हैं, लेकिन यहां देश के अंदर अपनी ही जमीन नहीं बचा पा रहा हूं। उनकी यह पीड़ा प्रशासनिक उदासीनता की गंभीर तस्वीर पेश करती है।
पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप
मामला महू क्षेत्र के अंबाचंदन गांव का है, जहां सूबेदार की पुश्तैनी जमीन पर पड़ोसियों द्वारा कब्जा किए जाने का आरोप है। पिछले 3 साल से सीमांकन के लिए आवेदन के साथ हर बार छुट्टी में आकर अधिकारियों के चक्कर लगा रहे, लेकिन अब तक न सीमांकन, न कार्रवाई हुई।
जनसुनवाई में फिर लगाई गुहार
आज सूबेदार कलेक्टोरेट की जनसुनवाई में पहुंचे और अधिकारियों से न्याय की अपील की। उन्होंने बताया कि साल में एक बार मिलने वाली छुट्टी का पूरा समय पटवारी और प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर में निकल जाता है।
पटवारी पर गंभीर आरोप
सूबेदार ने संबंधित पटवारी अमित पर आरोप लगाते हुए कहा कि हर बार उन्हें टाल दिया जाता है। वह कहते हैं कि मैं तो कैलेंडर के हिसाब से काम करूंगा। मेरी छुट्टी खत्म हो जाती है और फिर फाइल वहीं की वहीं रह जाती है।
15 मई को ड्यूटी जॉइन करनी है, आदेश अब भी लंबित
सूबेदार को 15 मई को वापस ड्यूटी पर लौटना है, लेकिन अभी तक जमीन के सीमांकन या कब्जा हटाने को लेकर कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं हुआ है।
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