सागर में मौत की बोतल किसने खोली
KHULASA FIRST
संवाददाता

शरद गुप्ता 96177-77331, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सागर के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों ने सिर्फ कई परिवारों के चूल्हे ही नहीं बुझाए जिला प्रशासन और उस पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है, जिसके जिम्मे अवैध शराब की निगरानी और कार्रवाई है।
मामला अब सिर्फ यह नहीं है कि जहरीली शराब किसने बनाई... सवाल यह भी है उसे बिकने से रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी...? क्या प्रशासन के पास पहले से कोई इनपुट था...आबकारी अमले ने इलाके में नियमित निगरानी की...
और अगर किसी खतरे की जानकारी पहले से थी… तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई..? रिपोर्टों में सामने आया है कि घटना से पहले संभावित खतरे को लेकर चेतावनी दिए जाने की बात कही गई थी।
यहीं से सवाल जिले के प्रशासनिक मुखिया तक भी पहुंचता है कलेक्टर जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होते हैं। जब किसी जिले में अवैध शराब का ऐसा नेटवर्क सामने आता है, कई गांव प्रभावित होते हैं, बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंचते हैं और मौतों का आंकड़ा बढ़ता जाता है…
तो जनता का यह पूछना जायज है जिले की निगरानी व्यवस्था आखिर कर क्या रही थी? क्या कलेक्टर कार्यालय तक अवैध शराब की गतिविधियों की कोई रिपोर्ट पहुंची थी...? आबकारी विभाग की नियमित समीक्षा में बंडा क्षेत्र को लेकर कोई शिकायत या इनपुट आया था...
पुलिस और आबकारी विभाग के बीच कोई संयुक्त कार्रवाई हुई थी...? पिछले कुछ दिनों में संदिग्ध शराब की बिक्री को लेकर कोई सूचना मिली थी, मिली थी तो उस पर क्या हुआ..? और नहीं मिली थी… तो निगरानी तंत्र इतना कमजोर क्यों था कि जहरीली शराब लोगों के घरों तक पहुंच गई ..!
यही इस दर्दनाक खबर का सबसे बड़ा प्रशासनिक सवाल है क्योंकि घटना के बाद अफसरों का मौके पर पहुंचना जरूरी है लेकिन असली सवाल यह है अफसर घटना से पहले कहां थे...? मौत के बाद छापे पड़ना आसान है...।
दुकान सील करना आसान है । केस दर्ज करना आसान है । निलंबन करना आसान है । असली प्रशासनिक सफलता तो तब होती जब जहरीली शराब बाजार तक पहुंचती ही नहीं । यही वह बिंदु है जिस पर जवाबदेही तय होनी चाहिए ।
विपक्ष सरकार की नाकामी गिनाएगा ही
असली सवाल उन परिवारों का है, जिनके घर का कमाने वाला अब वापस नहीं आएगा। इसलिए जांच सिर्फ यह पता करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए कि जहरीली शराब किसने बनाई। जांच को यह भी देखना होगा किसने बनाई, किसने बेची, किसने पहुंचाई, किसे जानकारी थी
किसने नजरअंदाज किया और किस स्तर पर सिस्टम फेल हुआ...? जांच में प्रशासनिक लापरवाही सामने आती है, तो क्या जवाबदेही सिर्फ छोटे कर्मचारियों तक सीमित रहेगी..! या फिर जिम्मेदारी उस स्तर तक जाएगी…
जहां फैसले लिए जाते हैं...? क्योंकि जनता को सिर्फ यह जानना नहीं है कि जहरीली शराब किसने बेची। जनता यह भी जानना चाहती है जिस पर रोकने की जिम्मेदारी थी, उसने रोका क्यों नहीं...?
सागर की इन मौतों का असली इंसाफ तभी होगा… जब जांच किसी एक आरोपी को पकड़कर खत्म नहीं होगी बल्कि उस पूरी व्यवस्था की पड़ताल होगी… जिसकी एक चूक ने कई घरों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया।
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