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प्रदेश के किस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में चूहों के बाद अब बिल्लियां: एचआईवी संक्रमित मरीजों के वार्ड और दवा कक्ष में घूम रहीं

KHULASA FIRST

संवाददाता

19 फ़रवरी 2026, 5:29 pm
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प्रदेश के किस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में चूहों के बाद अब बिल्लियां

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महाराजा यशवंतराव अस्पताल में एचआईवी संक्रमित मरीजों के वार्ड और दवा कक्ष में बिल्लियों के घूमने का मामला सामने आया है। अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में एक बिल्ली ने तीन बच्चों को जन्म दिया। इसके बाद अस्पताल में बिल्लियों की आवाजाही लगातार देखी गई। यह लापरवाही तब उजागर हुई जब छह महीने पहले चूहों के कारण दो नवजात बच्चों की मौत हो चुकी थी।

ओपीडी में जन्मी बिल्ली के बच्चे

अस्पताल प्रबंधन ने तीन में से दो बच्चों को रेस्क्यू कर लिया है, जबकि तीसरे को पकड़ने की कार्रवाई जारी है।

एचआईवी मरीजों के दवा कक्ष में बिल्लियां

एचआईवी मरीजों को हर महीने मुफ्त दवाएं इसी कक्ष से दी जाती हैं। इसमें नवजात बच्चों के लिए दी जाने वाली सेप्ट्रोन दवाएं भी रखी जाती हैं। लेकिन बिल्लियों के घूमने और गंदगी फैलाने की शिकायतें मिली हैं।

एआरटी केंद्र के कर्मचारी बिल्लियों की देखभाल करते मिले

अस्पताल के एआरटी एकीकृत परामर्श केंद्र के कुछ कर्मचारी बिल्लियों की देखभाल करते नजर आए। इससे दवा कक्ष की सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण को लेकर सवाल उठे हैं।

डीन के निर्देश

एमजीएम मेडिकल कॉलेज और एमवाई अस्पताल के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने मामले को गंभीर माना। उन्होंने कहा कि हाउसकीपिंग कंपनी को परिसर खाली कराने और बिल्लियों को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। ओपीडी दोपहर २ बजे के बाद बंद हो जाती है, इसलिए संक्रमण का खतरा नहीं है।

डीन ने पुष्टि की कि तीन में से दो बच्चों को रेस्क्यू कर लिया गया है और तीसरे को पकड़ने की कार्रवाई जारी है। साथ ही पेस्ट और एनिमल कंट्रोल एजेंसी की जवाबदेही तय करने की बात कही गई।

हाउसकीपिंग और एनिमल कंट्रोल कंपनी पर जुर्माना

अस्पताल की सफाई और एनिमल कंट्रोल कंपनी बीवीजी पर २५ हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कंपनी की जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई की जा रही है।

पहले चूहों ने नवजातों को नुकसान पहुंचाया था

करीब छह महीने पहले अस्पताल के नवजात वार्ड में चूहों ने दो बच्चों को कुतर दिया था। इस घटना में दोनों नवजातों की मौत हो गई थी। लेकिन इस घटना के बावजूद अस्पताल में जानवरों की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है।

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