RTI दस्तावेजों में क्या खुलासा हुआ: इन प्रसिद्ध मंदिरों की समिति पर उठे सवाल; श्रद्धालुओं के चढ़ावे और मंदिर समिति के फंड से किसे लाभ
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, देहरादून।
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति से जुड़े कुछ सूचना का अधिकार यानी RTI दस्तावेज और भुगतान विवरण सामने आने के बाद मंदिर समिति के खर्चों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन दस्तावेजों में दावा किया जा रहा है कि केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और मंदिर समिति के फंड से भाजपा नेताओं, संघ से जुड़े लोगों, पदाधिकारियों तथा उनके परिचितों के आवास, भोजन और हेलीकॉप्टर जैसी सुविधाओं पर खर्च किया गया।
एडवोकेट विकेश सिंह नेगी ने सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के तहत विविध जानकारी मांगी थी। इसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हालांकि, इन दस्तावेजों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और न ही किसी जांच एजेंसी या अदालत ने इन खर्चों को “गैरकानूनी” घोषित किया है, लेकिन दस्तावेजों में दर्ज एंट्रीज ने पारदर्शिता और मंदिर निधि के उपयोग को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
दस्तावेजों के अनुसार, RTI के जरिए वर्ष 2025 के यात्रा काल में “अतिथियों/व्यक्तियों” की आवासीय, भोजन और हेली सेवाओं पर हुए खर्च का ब्यौरा मांगा गया था। जवाब में कई बिल, वाउचर और भुगतान रजिस्टर संलग्न किए गए हैं।
दस्तावेजों में किन नामों का उल्लेख?
वायरल दस्तावेजों में कुछ एंट्रीज विशेष रूप से चर्चा में हैं। इनमें कथित तौर पर- “मा. विधायक श्री केदारनाथ” के नाम से आवास व्यय, भाजपा जिला अध्यक्ष और भाजपा कार्यकर्ताओं के ठहरने का खर्च, “RSS C/o CEO Sir BKTC” के नाम से दर्ज प्रविष्टियां, कुछ अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों और अतिथियों के लिए कमरे, भोजन और हेलीकॉप्टर खर्च और “अतिथि सत्कार” मद से लाखों रुपए के भुगतान जैसी प्रविष्टियां दिखाई दे रही हैं।
एक दस्तावेज में “अतिथि सत्कार” मद के तहत लगभग ₹6.55 लाख तक के भुगतान का उल्लेख है। वहीं अन्य बिलों में हेलीकॉप्टर किराया, आवास और भोजन व्यवस्था के अलग-अलग भुगतान दर्ज हैं।
क्या यह खर्च नियमों के खिलाफ है?
यह सबसे बड़ा सवाल है। किसी भी मंदिर समिति या ट्रस्ट द्वारा अतिथियों, प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों या विशेष आमंत्रितों के लिए खर्च किया जाना अपने आप में अवैध नहीं माना जाता, यदि वह समिति के नियमों और स्वीकृत बजट के तहत हो, लेकिन आरोप है कि यदि श्रद्धालुओं के चढ़ावे का उपयोग राजनीतिक या वैचारिक रूप से जुड़े लोगों की सुविधाओं के लिए किया गया, तो यह नैतिक और प्रशासनिक सवाल खड़े करता है।
दूसरी ओर, मंदिर समिति से जुड़े लोगों का तर्क हो सकता है कि यात्रा प्रबंधन, सुरक्षा, प्रशासनिक समन्वय और धार्मिक आयोजन के दौरान अतिथि सत्कार एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है।
सोशल मीडिया पर बढ़ा विवाद
इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे “चढ़ावे के दुरुपयोग” का मामला बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि केवल बिलों में नाम दर्ज होने से यह साबित नहीं होता कि पैसा निजी मौज-मस्ती पर खर्च हुआ। अब तक मंदिर समिति की ओर से इन वायरल दस्तावेजों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
पहले भी चर्चा में रही समिति
हाल ही वर्षों में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति कई मुद्दों को लेकर चर्चा में रही है। RTI के जरिए पहले भी समिति की आय, VIP दर्शन और विशेष सेवाओं से होने वाली कमाई के आंकड़े सामने आ चुके हैं। एक RTI रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि BKTC ने VIP/priority darshan और हेलीकॉप्टर सेवा से करोड़ों की आय अर्जित की।
क्या जरूरी है?
यह मामला फिलहाल दस्तावेजों और आरोपों के स्तर पर है। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले इन बिंदुओं की आधिकारिक जांच और सत्यापन जरूरी होगा। क्या खर्च समिति के अधिकृत बजट के तहत हुए? क्या भुगतान नियमों के अनुरूप स्वीकृत थे? क्या लाभार्थियों को “अधिकृत अतिथि” की श्रेणी में रखा गया था? क्या मंदिर निधि के उपयोग में पारदर्शिता के सभी नियमों का पालन हुआ? यदि इन सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं आते, तो आने वाले समय में यह मामला और बड़ा राजनीतिक एवं धार्मिक विवाद बन सकता है।
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