इसे क्या कहें- नगर निगम या नरक निगम: कहां गए 2 करोड़ के रोबोट
KHULASA FIRST
संवाददाता
होली से पहले इंदौर के माथे पर एक और कलंक
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
होली पर्व से पहले नगर निगम के जिम्मेदारों की घोर लापरवाही के चलते शहर एक बार फिर शर्मसार हुआ। करोड़ों रुपए खर्च कर खरीदी गईं सीवरेज सफाई की अत्याधुनिक रोबोटिक मशीनें अब गायब-सी हो चुकी हैं।
कुछ वर्षों पहले इंदौर नगर निगम ने 40-40 लाख रुपए की लागत से पांच रोबोटिक मशीनें खरीदी थीं। कुल मिलाकर लगभग 2 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। दावा किया गया था कि अब किसी भी गहरे सीवर चैंबर की सफाई बिना मानव को उतारे मशीनों से की जाएगी, लेकिन समय बीतने के साथ ये मशीनें कबाड़ में तब्दील होती नजर आईं।
आधे से ज्यादा रोबोट या तो खराब पड़े हैं या उनका उपयोग ही नहीं हो रहा। नगर निगम ने करोड़ों की मशीनें खरीद तो लीं, लेकिन उनके रखरखाव और नियमित उपयोग की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की। आज हालात यह हैं कि सफाई मित्रों को फिर से जान जोखिम में डालकर सीवर में उतरना पड़ रहा है।
प्रश्न है कि क्या निगम अपने ही कर्मचारियों की जान से खिलवाड़ कर रहा है? क्या सफाई मित्रों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं है? निगम जहां एक ओर स्वच्छता के गीत और प्रचार में व्यस्त रहा, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत ने एक भयावह तस्वीर पेश की।
सीवरेज साफ करने वाली मशीनें हुईं नदारद
शहर में 3 से 30 फीट तक गहरे सीवर चैंबर हैं। समय पर सफाई नहीं होने से सड़कों के जलमग्न होने और पीने के पानी में सीवरेज मिल जाने की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। अतीत में इन गहरे चैंबरों में कर्मचारियों को उतरकर सफाई करनी पड़ती थी, जो बेहद जोखिमभरा कार्य था।
जहरीली गैस, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता था। इन्हीं खतरों से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से नगर निगम ने हैदराबाद की तर्ज पर पांच रोबोटिक मशीनें खरीदी थीं। इन मशीनों से 8 मीटर तक की गंदगी निकाली जा सकती थी और कैमरे की मदद से ड्रेनेज के भीतर की स्थिति भी देखी जा सकती थी।
यह मशीन हाइड्रोलिक प्रेशर से संचालित होती थी और इसे चलाने के लिए तीन कर्मचारियों की आवश्यकता होती थी। शुरुआत में शहर के कई चैंबरों की सफाई मशीनों से की गई थी। दावा किया गया था कि अब किसी भी कर्मचारी को सीवर में नहीं उतरना पड़ेगा, लेकिन समय के साथ यह दावा खोखला साबित हुआ।
सीवर सफाई में मौतों का काला इतिहास
वर्ष 2003-04 से 2008-09 के बीच मध्य प्रदेश में हाथों से सीवर सफाई के दौरान 11 सफाई कर्मचारियों की मौत हुई थी। इनमें चार मौतें शिवपुरी में, दो-दो ग्वालियर, झुंडपुरा और देवास में तथा एक मौत इंदौर में हुई थी। इन आंकड़ों ने तब सरकार और निगम को झकझोरा था। भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए मशीनों के उपयोग पर जोर दिया गया था।
ड्रेनेज सफाई सिस्टम
7 हजार सफाई संरक्षक (सड़क व अन्य स्थानों की सफाई के लिए) {772 सफाई मित्र (ड्रेनेज लाइन व चैंबर सफाई के लिए) {22 प्रेशर गाड़ियां {10 डिसेल्टिंग रिक्शा {5 रोबोट मशीन {2 छोटी प्रेशर गाड़ियां {10 डिवाटरिंग गाड़ियां
शहर का सीवरेज सिस्टम
2200 किलोमीटर लंबा सीवरेज नेटवर्क
लगभग 2 लाख सीवरेज चैंबर
10 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट
सुरक्षा उपकरण कागजों पर
85 वार्डों में से प्रत्येक में एक-एक गैस डिटेक्टर {30 एयर ब्लोअर {700 गैस मास्क सफाई मित्रों को वितरित।
कागजों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम दिखाई देते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत ने कई सवाल खड़े किए हैं। यदि भविष्य में रोबोटिक मशीनों को फिर से सक्रिय नहीं किया गया और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन नहीं हुआ, तो ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता। ये आंकड़े पूर्व उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं, वर्तमान में इनमें आंशिक परिवर्तन संभव है।
यह हुआ था...
राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र स्थित चोइथराम सब्जी मंडी में सोमवार शाम एक दर्दनाक हादसा हुआ था। सीवर चैंबर की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से नगर निगम के दो सफाईकर्मियों करण और अजय की दम घुटने से मौत हो गई थी। पुलिस के अनुसार निगम के कर्मचारी सक्शन टैंकर लेकर शाम करीब 6.30 बजे चोइथराम मंडी गेट पर पहुंचे थे।
सफाई के दौरान सक्शन टैंकर का पाइप निकालते समय उसका एक हिस्सा दुर्घटनावश सीवर टैंक में गिर गया था। उसी हिस्से को निकालने के लिए करण पहले टैंक में उतरे, फिर अजय भी नीचे गए। टैंक के भीतर अत्यधिक जहरीली गैस बनी होने से दोनों कर्मचारी बेहोश हो गए और दम घुटने से उनकी मौत हो गई।
सीएम ने की मुआवजे की घोषणा
चोइथराम गेट स्थित एक चैंबर में गिरे पाइप को निकालने उतरे निगम के दो कर्मचारियों करण और अजय की मौत हो गई। हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोनों के परिजन को 30-30 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने के निर्देश जारी किए हैं। यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2023 में दिए गए निर्देशों के आधार पर लिया गया।
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