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देश के नायकों के साथ यह कैसा बर्ताव: गोल्ड जीतकर ई-रिक्शा से पोल ढोते दिखे चैंपियन; खेल व्यवस्था पर उठे सवाल

KHULASA FIRST

संवाददाता

26 मई 2026, 1:14 pm
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देश के नायकों के साथ यह कैसा बर्ताव

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
रांची में आयोजित फेडरेशन कप में मध्य प्रदेश अकादमी भोपाल के दो युवा खिलाड़ियों ने इतिहास रच दिया। देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार ने पुरुष पोल वॉल्ट स्पर्धा में 5.45 मीटर की शानदार छलांग लगाकर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए क्वालिफाई कर लिया।

प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल
लेकिन इस ऐतिहासिक उपलब्धि के कुछ ही घंटों बाद सामने आई एक तस्वीर ने खेल प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। दोनों खिलाड़ी अपने 5 मीटर लंबे फाइबरग्लास पोल को खुद एक साधारण ई-रिक्शा में रखकर होटल ले जाते दिखाई दिए।

रिकॉर्डधारक खिलाड़ियों को अपने उपकरण खुद ढोने पड़े
पोल वॉल्ट में इस्तेमाल होने वाले फाइबरग्लास पोल बेहद महंगे और नाजुक होते हैं। इनमें हल्की सी क्षति भी खिलाड़ी के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। बावजूद इसके, देश के नए रिकॉर्डधारक खिलाड़ियों को अपने उपकरण खुद ढोने पड़े।

एक ही ऊंचाई, फिर भी देव को मिला गोल्ड
प्रतियोगिता में देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार दोनों ने 5.45 मीटर की समान छलांग लगाई थी। हालांकि नियमों के अनुसार देव मीणा को गोल्ड मेडल मिला, क्योंकि उन्होंने यह ऊंचाई कम प्रयासों में पार की थी। कुलदीप कुमार को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।

गांव से निकलकर बने देश के नंबर वन
19 वर्षीय देव कुमार मीणा मध्य प्रदेश के खातेगांव तहसील के छोटे से गांव सिल्फोड़खेड़ा के रहने वाले हैं। वे लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं।

फरवरी 2025 में उत्तराखंड नेशनल गेम्स में 5.32 मीटर
अप्रैल 2025 में नेशनल फेडरेशन सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5.35 मीटर
अब रांची में 5.45 मीटर की छलांग लगाकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड
देव अब भारत के नंबर वन पुरुष पोल-वॉल्ट खिलाड़ी बन चुके हैं।

पहले भी झेल चुके हैं परेशानी
यह पहला मौका नहीं है जब खिलाड़ियों को ऐसी मुश्किलों का सामना करना पड़ा हो। जनवरी 2025 में पनवेल रेलवे स्टेशन पर भी देव कुमार मीणा और उनके साथी खिलाड़ियों को लंबे पोल के कारण ट्रेन से उतार दिया गया था। उस दौरान रेलवे स्टाफ के व्यवहार और लगाए गए जुर्माने को लेकर देव का वीडियो भी वायरल हुआ था।

अब सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि देश के लिए रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ियों को आखिर बुनियादी सुविधाएं और सम्मान कब मिलेगा।

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