पांच बेटियों ने क्या मिसाल पेश की: मां की कौन सी अंतिम इच्छा पूरी की; प्रशासन ने गार्ड ऑफ ऑनर क्यों दिया
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर से समाज सेवा और संस्कार की मिसाल सामने आई है। सुदामा नगर निवासी 79 वर्षीय संतोष वर्मा के निधन के बाद उनकी पांच बेटियों ने न केवल उनकी अर्थी को कंधा दिया, बल्कि उनकी अंतिम इच्छा और परोपकारी स्वभाव के अनुसार उनकी देह मेडिकल रिसर्च के लिए दान कर दी। शासन की ओर से इस कार्य के सम्मान में संतोष वर्मा को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
परिवार और जीवन
करीब 40 साल पहले संतोष वर्मा के पति रविशंकर का निधन हो गया था। उनके कोई पुत्र नहीं था। उन्होंने अपनी पांच बेटियों—मृदुला चौधरी, कुमुदिनी महालहा, कीर्ति वर्मा, वंदना वर्मा और मयूरी गालर—को ऐसे संस्कार दिए कि आज वे समाज की रूढ़ियों से परे जाकर अपने माता-पिता के आदर्शों का पालन कर रही हैं।
कुछ साल से संतोष वर्मा पूरी तरह व्हीलचेयर पर थीं। बेटियों ने उनके साथ समय बिताया और उनकी सेवा की। अंतिम समय में वे बड़ी बेटी कुमुदिनी के पास थीं। एक हफ्ते से बीमार रहने के बाद उनका निधन हुआ।
अंतिम निर्णय और देहदान
संतोष वर्मा के निधन के बाद बेटियों ने आपसी सहमति से आंखें, त्वचा और देह दान करने का निर्णय लिया। यह कदम समाज को यह संदेश देता है कि मृत्यु के बाद भी जीवन को अर्थपूर्ण बनाया जा सकता है।
नेत्रदान: इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के माध्यम से उनकी आंखें दान की गईं, जिससे दो अंधे व्यक्तियों की जिंदगी में रोशनी आएगी।
त्वचा दान: उनकी त्वचा झुलसे हुए मरीजों की चिकित्सा में उपयोग के लिए दी गई।
देहदान: उनकी देह मेडिकल रिसर्च सेंटर को सौंप दी गई, ताकि भावी डॉक्टर्स चिकित्सा में प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।
अंतिम संस्कार
अंत्येष्टि क्रिया गायत्री परिवार की परंपरा अनुसार प्रतीकात्मक हवन और मंत्रोच्चार के माध्यम से संपन्न हुई। पांचों बेटियों ने अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया और उनकी परोपकारी सोच का सम्मान किया। संतोष वर्मा बुजुर्ग होने के बावजूद हमेशा धार्मिक कार्य और अनुष्ठानों में शामिल रहती थीं, और उनके योगदान ने जीवन और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को उजागर किया।
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