वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का आगाज: CJI बोले- न्याय की दौड़ में कोई पीछे न छूटे
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शनिवार से दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस की शुरुआत हुई। Enhancing Access to Justice थीम पर आयोजित इस सम्मेलन में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के न्यायाधीश, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल सहित न्यायिक और विधिक सेवा क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
इस विषय पर किया मंथन
कॉन्फ्रेंस का आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली, मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। सम्मेलन में न्याय तक आम नागरिक की आसान पहुंच और कानूनी सेवाओं को अधिक समावेशी बनाने पर मंथन किया जा रहा है।
CJI बोले- न्याय की शुरुआत संवाद और सम्मान से होती है
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने अपने करीब 15 मिनट के संबोधन में न्याय व्यवस्था को आम आदमी से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘United Voice, Strong Tomorrow’ की दिशा में आगे बढ़ने के लिए Dialogue, Dignity और Inclusion बेहद जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि लोगों तक न्याय पहुंचाने के लिए सबसे पहले उनसे उनकी भाषा में संवाद करना होगा। सिर्फ अपनी बात कहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को सुनना, उनकी समस्याओं को समझना और उनके दुख-दर्द को महसूस करना भी उतना ही जरूरी है।
CJI ने कहा कि संवाद एकतरफा नहीं हो सकता। व्यवस्था और नागरिक के बीच ऐसा संवाद होना चाहिए, जिसमें आम व्यक्ति अपनी बात बिना झिझक रख सके।
व्यक्ति को केस नंबर से नहीं, इंसान के तौर पर देखना होगा
जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायिक व्यवस्था में मानवीय संवेदनाओं की अहमियत बताते हुए कहा कि बातचीत के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक की गरिमा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के सम्मान को ठेस पहुंचती है तो न्याय का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
न्याय व्यवस्था में केवल केस और फाइल देखने के बजाय यह भी देखना जरूरी है कि संबंधित व्यक्ति के साथ किस तरह का व्यवहार किया जा रहा है।
न्याय की दौड़ में कोई पीछे न छूटे
CJI ने न्याय तक पहुंच को हर नागरिक का अधिकार बताते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें समाज का कोई भी वर्ग पीछे न छूटे। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को न्याय उपलब्ध कराना कोई दया या चैरिटी नहीं है, बल्कि संविधान द्वारा दिया गया नागरिक का अधिकार है। इसलिए न्याय की प्रक्रिया में सभी का समावेश होना जरूरी है।
अहिल्याबाई होलकर के शासन का दिया उदाहरण
अपने संबोधन में जस्टिस सूर्यकांत ने इंदौर की ऐतिहासिक विरासत और मां अहिल्याबाई होलकर के न्यायप्रिय शासन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में राजा और जनता के बीच कोई मध्यस्थ नहीं होता था। अहिल्याबाई स्वयं लोगों से मिलती थीं और उनकी समस्याएं सुनती थीं।
उन्होंने इसे आज की न्याय व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण उदाहरण बताया कि लोगों तक पहुंचना और उनकी बात सीधे सुनना कितना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने भी अहिल्याबाई के न्याय का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी मां अहिल्याबाई होलकर की न्याय व्यवस्था का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई ने न्याय के मामले में किसी तरह का पक्षपात नहीं किया। यहां तक कि अपने बेटे को भी दंड देने से पीछे नहीं हटीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी न्यायप्रिय परंपरा वाली भूमि पर न्याय तक पहुंच जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सम्मेलन का आयोजन बेहद उपयुक्त है।
दीप प्रज्वलन के साथ सम्मेलन की शुरुआत
दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ CJI और NALSA के संरक्षक-प्रमुख जस्टिस सूर्यकांत ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में NALSA के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस विक्रम नाथ, सुप्रीम कोर्ट के जज और गोवा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के पर्यवेक्षण न्यायाधीश जस्टिस मनमोहन सहित सुप्रीम कोर्ट के कई अन्य न्यायाधीश मौजूद रहे।
इसके अलावा केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संरक्षक-प्रमुख जस्टिस विवेक रूसिया, जस्टिस आनंद पाठक तथा वेस्ट जोन के विभिन्न राज्यों के हाईकोर्ट के न्यायाधीश और विधिक सेवा प्राधिकरणों के पदाधिकारी भी सम्मेलन में शामिल हुए।
दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में न्याय तक पहुंच को आसान बनाने, कमजोर और वंचित वर्गों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने तथा न्यायिक व्यवस्था में समावेशन और संवेदनशीलता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
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