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देशभर में बदला मौसम का मिजाज: 15 से ज्यादा राज्यों में प्री-मानसून का अलर्ट; आंधी-बारिश से 48 लोगों की मौत

KHULASA FIRST

संवाददाता

30 मई 2026, 3:50 pm
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देशभर में बदला मौसम का मिजाज

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली है। 15 से अधिक राज्यों में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं। आंधी, बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं ने कई राज्यों में जनजीवन प्रभावित कर दिया है।

17 लोगों की मौत
बिहार में पिछले 24 घंटों के दौरान आंधी-बारिश और आकाशीय बिजली गिरने से 17 लोगों की मौत हो गई। राजधानी पटना में खराब मौसम के कारण 4 उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा, जबकि 18 फ्लाइट देरी से संचालित हुईं।

25 जिलों में बारिश की संभावना
इससे 500 से अधिक यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग ने आज भी राज्य के 25 जिलों में बारिश की संभावना जताई है।

आंधी-तूफान से 31 लोगों की मौत
वहीं उत्तर प्रदेश में आंधी और तूफान से 31 लोगों की मौत की खबर है। सहारनपुर में भारी बारिश के बाद पहाड़ी क्षेत्रों से आए तेज बहाव में इनोवा, ट्रैक्टर सहित करीब 10 वाहन बह गए। प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है।

तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट
राजस्थान में भी मौसम का असर दिखाई दे रहा है। कई जिलों में रेतीला तूफान, आंधी और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है। चूरू, हनुमानगढ़, बीकानेर और सीकर सहित कई जिलों में तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है।

पठानकोट में हुई ओलावृष्टि
पंजाब के पठानकोट में ओलावृष्टि हुई, जबकि मोहाली में तेज बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में उत्तर भारत के कई राज्यों में इसी तरह का मौसम बना रह सकता है।

7 दिनों में केरलम पहुंच सकता है मानसून
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले सात दिनों के भीतर केरल पहुंच सकता है। हालांकि विभाग ने इस वर्ष मानसून सामान्य से कमजोर रहने की आशंका भी जताई है।

मौसम विभाग का अनुमान है कि जून से सितंबर के बीच देश में औसतन 78 सेंटीमीटर बारिश हो सकती है, जबकि सामान्य मानसूनी वर्षा का औसत 87 सेंटीमीटर माना जाता है।

आईएमडी ने जारी किया अलर्ट
आईएमडी के अनुसार बिहार और उत्तर प्रदेश में सामान्य बारिश की संभावना है, लेकिन देश के कई अन्य हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। विशेष रूप से वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में मानसून का असर अपेक्षाकृत कमजोर रहने की आशंका जताई गई है।

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