वीडियो देखिये, हाईकोर्ट के स्थगन के बावजूद मनमानी: बालसमुद चेकिंग पर आरोप; परिवहन व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट इंदौर।
बालसमुद (सेंधवा) स्थित परिवहन चेकिंग पॉइंट को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। माननीय मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद यहां पुराने परिवहन चेक पोस्ट जैसी व्यवस्था संचालित किए जाने के आरोप सामने आए हैं। मामले को लेकर ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की आरटीओ एंड ट्रैफिक कमेटी के चेयरमैन सी.एल. मुकाती ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शिकायत भेजकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
“सीमलेस ट्रांसपोर्ट” की नीति पर सवाल
शिकायत में कहा गया है कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था और सुगम यातायात के लिए पारंपरिक चेक पोस्ट बंद कर “मोबाइल व रैंडम चेकिंग” प्रणाली लागू की थी। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों का निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना था। इसके बावजूद बालसमुद में पुराने ढर्रे पर चेकिंग होने के आरोप शासन की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
टोल लेन बंद कर लंबी कतारें लगाने का आरोप
ट्रांसपोर्टरों की ओर से भेजे गए वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि कई टोल लेनों को पत्थर रखकर बंद कर दिया गया है। वाहनों को रोककर लंबी कतारें लगाई जा रही हैं और टेबल लगाकर जांच के नाम पर अवैध वसूली तथा चालकों से दुर्व्यवहार किया जा रहा है। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम की स्थिति बन रही है।
ईंधन बर्बादी और आर्थिक नुकसान का मुद्दा
शिकायत में यह भी कहा गया है कि घंटों जाम में फंसे रहने से डीजल की अनावश्यक खपत हो रही है, जिससे न केवल परिवहन व्यवसायियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है बल्कि ईंधन बचत से जुड़े राष्ट्रीय प्रयासों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
हाईकोर्ट आदेश का हवाला
मामले में यह भी उल्लेख किया गया है कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने RP No. 967/2026 में 11 मई 2026 को पारित आदेश में स्पष्ट किया था कि तकनीक आधारित ई-चालान और मॉनिटरिंग व्यवस्था के दौर में पारंपरिक चेक पोस्ट दोबारा शुरू करने की आवश्यकता नहीं है। साथ ही पूर्व आदेश के प्रभाव पर स्थगन भी दिया गया था।
जांच और कार्रवाई की मांग
सी.एल. मुकाती ने मांग की है कि बालसमुद चेकिंग पॉइंट की तत्काल उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, बंद टोल लेनों को खोला जाए और राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्बाध यातायात सुनिश्चित किया जाए। साथ ही न्यायालय के आदेश की अवहेलना और कथित अवैध वसूली में शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की गई है।
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