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वीडियो देखिये, केदारनाथ यात्रियों से मनमानी वसूली: सीतापुर पार्किंग में संचालक के खिलाफ व्यापारियों का धरना; तिगुना किराया लेने का आराेप

KHULASA FIRST

संवाददाता

09 मई 2026, 12:56 pm
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खुलासा फर्स्ट, सीतापुर।
केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकले श्रद्धालु इन दिनों आस्था के साथ-साथ अव्यवस्था का भी सामना कर रहे हैं। यात्रा के प्रमुख पड़ाव सीतापुर की पार्किंग में तीर्थयात्रियों से अनुबंध से कहीं अधिक शुल्क वसूले जाने के आरोप लगे हैं। मामले ने तूल पकड़ा तो स्थानीय व्यापारियों ने पार्किंग संचालक के खिलाफ धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।

यह पार्किंग पर्यटन विभाग द्वारा दिल्ली के आजाद नगर, कृष्णनगर निवासी भारत भूषण की फर्म म/स बिट सॉल्यूशंस को अगले पांच वर्षों के लिए निविदा प्रक्रिया के तहत आवंटित की गई है। अनुबंध की शर्तों के मुताबिक पार्किंग के वेटिंग हॉल में रजाई-गद्दे के साथ विश्राम की सुविधा मात्र 100 रुपये में दी जानी है और आठ घंटे की वाहन पार्किंग का शुल्क 300 रुपये तय है।

व्यापारियों का आरोप है कि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। हॉल में गद्दे बिछाकर प्रतिदिन 500 से 1000 तीर्थयात्रियों से 250 रुपये वसूले जा रहे हैं, यानी तय दर से ढाई गुना अधिक। वाहनों से भी निर्धारित 300 रुपये की जगह तिगुना किराया लिया जा रहा है। इतना ही नहीं, खाना पकाने के लिए अतिरिक्त जगह देने के एवज में प्रत्येक वाहन से 1200 रुपये अलग से वसूले जाने का भी आरोप है।

स्वाभिमान मोर्चा से जुड़े विधायक प्रत्याशी त्रिभुवन चौहान की अगुवाई में बड़ी संख्या में व्यापारी पार्किंग में ही धरने पर बैठ गए। सामाजिक कार्यकर्ता अशोक सेमवाल ने कहा कि जब पार्किंग में श्रद्धालु मात्र ढाई सौ रुपये में रात गुजार सकते हैं तो उनके लॉज और आवास खाली पड़े रहते हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है। व्यापारियों ने साफ कहा कि जब तक अवैध वसूली बंद नहीं होती, धरना जारी रहेगा।

मामले पर जिला पर्यटन अधिकारी राहुल चौबे ने कहा कि अनुबंध के अनुसार 100 रुपये में रजाई-गद्दा और 300 रुपये प्रति आठ घंटे पार्किंग शुल्क का ही प्रावधान है। अतिरिक्त समय पर 300 रुपये और लिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि इससे अधिक वसूली हो रही है तो मामले की जांच कराई जाएगी।

रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ की राह पर निकलते हैं और सीतापुर उनका अहम पड़ाव है। ऐसे में यदि यहीं से उनके साथ ठगी होने लगे तो यह न केवल यात्रियों बल्कि पूरी यात्रा व्यवस्था की साख पर सवाल खड़े करता है।

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