वीडियो देखिये, प्रदेश में बार-बार धमाकों का दर्द: बड़े हादसों ने खड़े किए सुरक्षा पर सवाल; जानिये कब-कब हुए ऐसे विस्फोट
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्यप्रदेश में बीते वर्षों में हुए भीषण विस्फोट और पटाखा फैक्ट्री हादसों ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और अवैध गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा देवास के टोंककला हादसे के बाद प्रदेश में पहले हो चुके बड़े ब्लास्ट भी चर्चा में आ गए हैं।
इन घटनाओं में सैकड़ों लोगों की जान गई और हजारों परिवार प्रभावित हुए, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अवैध फैक्ट्रियों का सिलसिला पूरी तरह नहीं थम पाया है। देवास जिले के टोंक कलां इलाके में गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे एक पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ। इस हादसे में धीरज, सनी और सुमित नाम के तीन मजदूरों की जान चली गई, जबकि 25 लोग घायल हुए हैं।
हरदा पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट (6 फरवरी 2024)
हरदा जिले के बैरागढ़ इलाके में एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। इस हादसे में 13 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 170 लोग घायल हुए थे। धमाका इतना जबरदस्त था कि इसकी गूंज 20-25 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। विस्फोट के बाद आसपास के 100 से अधिक घरों में आग लग गई थी, जिससे भारी तबाही मची।
देवास (टोंककला) ब्लास्ट (मई 2024)
देवास के टोंककला क्षेत्र में पहले भी पटाखा फैक्ट्री में बड़ा विस्फोट हो चुका है, जिसमें 3 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के मकानों की दीवारें तक हिल गई थीं। अब हालिया हादसे ने इस क्षेत्र में बार-बार हो रही लापरवाही को उजागर कर दिया है।
पेटलावद (झाबुआ) विस्फोट (12 सितंबर 2015)
पेटलावद में हुआ विस्फोट प्रदेश के इतिहास का सबसे भयावह हादसा माना जाता है। बस स्टैंड के पास एक गोदाम में रखे जिलेटिन रॉड्स और अन्य विस्फोटक सामग्री में धमाका हुआ था, जिसमें 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। यह हादसा अवैध रूप से विस्फोटक सामग्री रखने और सुरक्षा नियमों की अनदेखी का बड़ा उदाहरण बना।
मुरैना पटाखा ब्लास्ट (अक्टूबर 2022)
मुरैना के बनमोर इलाके में एक घर में अवैध रूप से पटाखा निर्माण का काम चल रहा था, जहां अचानक विस्फोट हो गया। इस हादसे में 4 लोगों की मौत हुई और पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो गई। स्थानीय स्तर पर निगरानी की कमी इस घटना में सामने आई थी।
महू (इंदौर) पटाखा फैक्ट्री आग (मार्च 2024)
महू के आंबीपुरा गांव में पटाखा फैक्ट्री में लगी आग में कई महिलाएं गंभीर रूप से झुलस गई थीं। हालांकि इस घटना में जानमाल का नुकसान सीमित रहा, लेकिन यह हादसा भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी का परिणाम माना गया।
बार-बार हादसे, लेकिन सबक अधूरा
प्रदेश में इन घटनाओं का सिलसिला यह दर्शाता है कि अवैध फैक्ट्रियों, सुरक्षा नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक ढिलाई के कारण बार-बार बड़े हादसे हो रहे हैं। हर घटना के बाद जांच और सख्ती की बात होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका असर सीमित ही नजर आता है। ताजा देवास हादसे के बाद एक बार फिर सवाल खड़ा हो गया है। क्या अब भी ठोस और स्थायी कदम उठाए जाएंगे या फिर यह घटनाएं यूं ही दोहराई जाती रहेंगी?
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